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क्या आपके पास ऐसी जमीन है जहां पानी कम है? या ऐसी ढलान वाली पथरीली जमीन है जहां सोयाबीन और कपास भी ठीक से नहीं उगते? अगर हाँ, तो आज की यह रिपोर्ट आर्थिक रूप से लाभकारी विकल्प बन सकती है। आज हम बात कर रहे हैं सीताफल (Custard Apple) की खेती की, जिसे महाराष्ट्र के कई किसान अब ‘रेगिस्तान का हीरा’ कहने लगे हैं।
सीताफल एक ऐसी फसल है जिसे एक बार लगाओ, तो वह लंबे समय तक उत्पादन देने वाली लंबे समय तक स्थिर आय देने वाली फसल। आज की इस ग्राउंड रिपोर्ट में, मैं (सचिन) आपको सीताफल की खेती का वो गणित समझाऊंगा जो आपको एक साधारण किसान से एक ‘सफल बागवान’ बना देगा।
1. सीताफल की खेती ही क्यों? (Introduction)
अक्सर किसान भाई मुझसे पूछते हैं, “सचिन भाई, अंगूर और आम में बहुत खर्चा है, कोई ऐसी फसल बताओ जो कम खर्चे में तगड़ा मुनाफा दे?” मेरा जवाब होता है— सीताफल।
इसके 3 सबसे बड़े कारण हैं:
- जानवरों का डर नहीं: सीताफल के पत्ते कड़वे होते हैं, इसलिए इसे नीलगाय, जंगली सूअर, बंदर या बकरी भी नहीं खाते। हमारे हिंगोली के बॉर्डर वाले गांवों के लिए यह वरदान है।
- कम पानी: इसे अंगूर या केले की तरह रोज पानी नहीं चाहिए। अगर आपके पास केवल बारिश का पानी है, तब भी यह फसल हो सकती है।
- कम बीमारियां: इस पर कीड़ों का हमला बहुत कम होता है, जिससे दवाइयों का खर्चा बच जाता है।

2. उन्नत किस्म का चुनाव: NMK-1 ‘गोल्डन’ का जादू
पुराने समय में हम देसी सीताफल उगाते थे, जिसमें बीज बहुत ज्यादा और गूदा (Pulp) कम होता था। लेकिन 2026 के इस दौर में आपको ‘NMK-1 गोल्डन’ (NMK-1 Golden) किस्म पर ही ध्यान देना चाहिए।
- विशेषता: इसके फल का वजन 400 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक होता है।
- फायदा: यह फल जल्दी काला नहीं पड़ता और इसकी शेल्फ-लाइफ ज्यादा होती है, जिससे इसे दूर की मंडियों (जैसे दिल्ली या दुबई) में भेजना आसान होता है। इसके अलावा ‘बालानगर’ और ‘अर्का सहन’ भी अच्छी किस्में हैं।
3. जमीन की तैयारी और रोपण (Step-by-Step)
सीताफल किसी भी मिट्टी में हो सकता है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली जमीन सबसे बेस्ट है।
- गड्ढों की खुदाई: मार्च-अप्रैल में 2x2x2 फीट के गड्ढे खोदें।
- दूरी: पौधों के बीच की दूरी 12×12 फीट या 15×10 फीट रखें।
- खाद: गड्ढे भरते समय 10 किलो गोबर की खाद, 500 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और 100 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर जरूर डालें।

4. सीताफल की ‘प्रूनिंग’ (छंटाई): फल का साइज बढ़ाने का सीक्रेट
कई किसान शिकायत करते हैं कि फल तो बहुत लगे हैं, पर साइज छोटा है। इसका कारण है— छंटाई की कमी।
- समय: मई के आखिरी हफ्ते में भारी छंटाई (Heavy Pruning) करें।
- तरीका: पुरानी और सूखी टहनियों को काट दें। इससे नई कोपलें आएंगी जिनमें फल बड़े और चमकदार लगेंगे।
5. सीताफल का अर्थशास्त्र: खर्चा और मुनाफे का टेबल
| विवरण (1 एकड़) | अनुमानित लागत (NMK-1) |
| पौधे और रोपण (300 पौधे) | ₹25,000 – ₹30,000 |
| खाद और मजदूरी (पहले 3 साल) | ₹40,000 |
| ड्रिप इरिगेशन (सब्सिडी के बाद) | ₹15,000 |
| कुल शुरुआती निवेश | ₹80,000 – ₹90,000 |
| चौथे साल से सालाना कमाई | ₹3,00,000 – ₹5,00,000 |
6. सचिन भाई की ’10 महायोध्दा’ सलाह (Deep Value Points)
- कलमी पौधे ही लें: हमेशा सरकारी प्रमाणित नर्सरी से ‘ग्राफ्टेड’ पौधे ही खरीदें। बीज वाले पेड़ फल देने में बहुत समय लेते हैं।
- इंटरक्रॉपिंग (Intercropping): शुरू के 3 साल सीताफल के बीच में मूंग, उड़द या गेंदे के फूल लगाएं। इससे आपका बागवानी का खर्चा निकल जाएगा।
- पानी का सही समय: जब पेड़ पर फूल (Flowering) आ रहे हों, तब बहुत ज्यादा पानी न दें, वरना फूल झड़ सकते हैं। फल सेट होने के बाद नियमित सिंचाई करें।
- जैविक खाद पर जोर: सीताफल को रासायनिक खाद से ज्यादा गोबर की खाद और ‘वेस्ट डीकंपोजर’ पसंद है। इससे फल की मिठास बढ़ती है।
- मिली बग (Mealy Bug) से बचाव: बारिश के बाद सफेद रंग के कीड़े (मिली बग) फलों पर लग सकते हैं। इससे बचने के लिए वर्टिसिलियम लेकानी (Verticillium lecanii) का छिड़काव करें।
- फल की चमक: फल तोड़ने से 15 दिन पहले ‘पोटैशियम शोनाइट’ का स्प्रे करने से फल पर जबरदस्त चमक आती है।
- हिंगोली और लातूर का दौरा: “भाइयों, हमने लातूर के कई किसानों को देखा है जो सीताफल का पल्प (Pulp) निकालकर उसे -18 डिग्री पर स्टोर करते हैं। इससे वे ऑफ-सीजन में भी 500 रुपये किलो तक भाव पाते हैं।”
- पैकिंग की कला: सीताफल को हमेशा ‘फोम नेट’ में पैक करें। फल के ऊपर का छिलका बहुत नाजुक होता है, अगर वह दब गया तो फल खराब हो जाएगा।
- मंडी का चुनाव: अपने फल सीधे स्थानीय बाजार में न बेचें। पुणे, मुंबई या हैदराबाद की मंडियों में सीताफल के भाव 20% ज्यादा मिलते हैं।
- धैर्य रखें: सीताफल का पेड़ 4 साल बाद अपनी पूरी क्षमता पर आता है। पहले 3 साल बस उसकी जड़ें मजबूत करने पर ध्यान दें।
महत्वपूर्ण सूचना: किसी भी जैविक या रासायनिक इनपुट का उपयोग करने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ से मात्रा, समय और उपयुक्तता की पुष्टि अवश्य करें।
7. वैल्यू एडिशन: पल्प (Pulp) निकालकर कमाई दुगनी करें
सीताफल की सबसे बड़ी कमजोरी है कि यह बहुत जल्दी पक जाता है।
- समाधान: अगर मंडी में भाव कम है, तो फलों का गूदा (Pulp) निकाल लें। सीताफल का पल्प आइसक्रीम और बासुंदी बनाने वाली कंपनियों को बहुत महंगे दाम पर बिकता है। आप एक छोटा ‘पल्प एक्सट्रैक्टर’ लगाकर अपने घर से ही बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

8. निर्यात (Export) की संभावनाएं
यूरोप और खाड़ी देशों (UAE, Oman) में सीताफल की बहुत मांग है।
- एक्सपोर्ट टिप: निर्यात के लिए फल का वजन 500 ग्राम प्लस होना चाहिए और उस पर एक भी काला धब्बा नहीं होना चाहिए। इसके लिए ‘फ्रूट कवर’ (Fruit Cover) तकनीक का इस्तेमाल करें।
9. ‘हैंड पॉलिनेशन’ (Hand Pollination) की जादुई तकनीक
अक्सर सीताफल में फूल तो बहुत आते हैं, लेकिन फल कम लगते हैं। इसका कारण है सही परागण (Pollination) न होना।
- डीप नॉलेज: सीताफल का फूल सुबह के समय ‘मादा’ होता है और दोपहर बाद ‘नर’।
- सचिन भाई की टिप: “अगर आप फूलों के समय सुबह-सुबह ब्रश की मदद से पराग को एक फूल से दूसरे फूल पर लगा दें (Hand Pollination), तो आपके बाग में फलों की संख्या 30% तक बढ़ सकती है। यह तकनीक नासिक के सफल किसान इस्तेमाल करते हैं।”
(ह आंकड़े किसानों के अनुभव पर आधारित हैं, क्षेत्र अनुसार बदल सकते हैं।)सीताफल की खेती (Custard Apple Farming): बंजर जमीन से सोना उगाने का तरीका, सचिन भाई की ‘गोल्डन’ रिपोर्ट

10. ‘NM K-1 गोल्डन’ और ‘बालानगर’ में असली अंतर
किसान अक्सर किस्मों में भ्रमित हो जाते हैं।
- बारीकी से समझें: ‘बालानगर’ पुरानी और अच्छी किस्म है, लेकिन इसका फल पकने के बाद जल्दी फट जाता है। वहीं ‘NMK-1 गोल्डन’ का छिलका थोड़ा सख्त होता है, जिससे यह फल पकने के बाद भी 3-4 दिनों तक सुरक्षित रहता है। अगर आपको माल दूर की मंडी (जैसे दिल्ली या एक्सपोर्ट) में भेजना है, तो NMK-1 ही लगाएं।
11. ‘मल्चिंग’ और जमीन का तापमान
सीताफल की जड़ें सतह के पास होती हैं, इसलिए तेज गर्मी से उन्हें बचाना जरूरी है।
- स्टेप: पौधों के चारों तरफ 100 माइक्रोन का ‘मल्चिंग पेपर’ लगाएं या सूखे चारे की मोटी परत (Organic Mulching) बिछाएं। इससे जड़ों के पास नमी बनी रहती है और मिट्टी का तापमान नहीं बढ़ता, जिससे पौधों की ग्रोथ रुकती नहीं है।

12. फल फटने (Fruit Cracking) की समस्या का पक्का इलाज
अक्टूबर-नवंबर में जब फल पकने वाले होते हैं, तब कई बार वे फटने लगते हैं।
- कारण और समाधान: यह ‘बोरोन’ (Boron) की कमी और पानी के गलत मैनेजमेंट की वजह से होता है।
- सचिन भाई का फॉर्मूला: “फल सेट होने के बाद हर 15 दिन में ‘बोरोन’ (2 ग्राम प्रति लीटर) का स्प्रे करें। साथ ही, ड्रिप से पानी की मात्रा स्थिर रखें—कभी बहुत ज्यादा और कभी एकदम सूखा, ऐसा न करें।”
13. फल मक्खी (Fruit Fly) और ‘फ्रूट बैगिंग’
सीताफल के अंदर इल्लियां निकलने का सबसे बड़ा कारण ‘फ्रूट फ्लाई’ है।
- नई तकनीक: विदेशों में निर्यात करने वाले किसान अब फलों पर ‘फोम नेट’ या ‘पेपर बैग’ (Bagging) चढ़ाते हैं। इससे मक्खी फल के अंदर अंडे नहीं दे पाती और फल का रंग भी एकदम साफ और सुनहरा आता है।

14. ‘वेस्ट डीकंपोजर’ (WDC) का करिश्मा
सीताफल को भारी रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती।
- इस्तेमाल: हर महीने ड्रिप के माध्यम से 200 लीटर ‘वेस्ट डीकंपोजर’ का घोल दें। यह जमीन में मौजूद पुराने कचरे को सड़ाकर खाद बना देता है और सीताफल के पौधों को प्राकृतिक नाइट्रोजन और पोटाश प्रदान करता है।
15. सीताफल की कटाई (Harvesting) का सही समय
अक्सर किसान कच्चे फल तोड़ लेते हैं जिससे वे कभी मीठे नहीं होते।
- सही पहचान: जब सीताफल की ‘आंखें’ (सफेद धारियां) चौड़ी हो जाएं और अंदर से हल्का मलाईदार रंग दिखने लगे, तभी उसे तोड़ें। डंठल के साथ फल तोड़ने से वह लंबे समय तक ताजा रहता है।
16. सीताफल के लिए ‘कस्टमाइज्ड’ वाटर मैनेजमेंट
सीताफल को ‘ड्रॉट टॉलरेंट’ (सूखा सहन करने वाला) कहा जाता है, लेकिन फल के समय इसे पानी चाहिए।
- शेड्यूल: फ्लावरिंग के समय पानी कम दें (Stress दें)। जैसे ही फल चने के दाने के बराबर हो जाएं, पानी बढ़ा दें। फरवरी से मई तक जब पेड़ सुप्तावस्था (Dormancy) में हो, तब पानी बिल्कुल बंद कर दें।
17. हिंगोली-लातूर बेल्ट में ‘पल्प प्रोसेसिंग’ यूनिट
“भाइयों, मैंने लातूर के औसा इलाके में देखा है कि किसान केवल फल नहीं बेच रहे, उन्होंने छोटे ‘कोल्ड रूम’ बनाए हैं। अगर सीताफल 20 रुपये किलो बिक रहा है, तो वे उसका पल्प निकालकर उसे 200 रुपये किलो के हिसाब से आइसक्रीम कंपनियों को बेचते हैं। यह ‘वैल्यू एडिशन’ ही आपको असली अमीर बनाएगा।”

18. भविष्य का मार्केट: सीताफल की चाय और पाउडर
क्या आप जानते हैं कि सीताफल के पत्तों की चाय और फलों का पाउडर भी अब मार्केट में आ गया है?
- बड़ा अवसर: आने वाले समय में जो किसान केवल फल नहीं, बल्कि इसके ‘बाय-प्रोडक्ट्स’ पर ध्यान देगा, वह कम लागत में बेहतर रिटर्न की संभावना। यह 2026 की आधुनिक खेती का विजन है।
19. सीताफल का निर्यात (Export): हिंगोली के खेत से खाड़ी देशों तक का सफर
अगर आप अपने सीताफल को डॉलर और रियाल में बेचना चाहते हैं, तो आपको इन 3 अंतरराष्ट्रीय मानकों को समझना होगा:
- क्वालिटी और वजन: एक्सपोर्ट के लिए फल का वजन 400 ग्राम से 600 ग्राम के बीच होना चाहिए। फल का रंग गहरा हरा (Golden Green) होना चाहिए और उस पर एक भी काला दाग या खरोंच नहीं होनी चाहिए।
- हॉट वॉटर ट्रीटमेंट (HWT): विदेशों में भेजने से पहले फलों को कीट-मुक्त करने के लिए गर्म पानी से उपचारित किया जाता है। इससे फल की टिकने की क्षमता (Shelf-life) 2-3 दिन बढ़ जाती है।
- पैकेजिंग का स्टैंडर्ड: एक्सपोर्ट के लिए 3 किलो या 5 किलो के होल वाले कार्डबोर्ड बॉक्स इस्तेमाल किए जाते हैं। हर सीताफल को एक ‘फोम नेट’ के अंदर सुरक्षित रखा जाता है ताकि जहाज या हवाई जहाज के सफर में वे आपस में टकराकर काले न पड़ें।
- बाजार: वर्तमान में दुबई, ओमान, कुवैत और कतर में महाराष्ट्र के सीताफल की भारी मांग है। अगर आप ‘महायोद्धा’ बनकर समूह में खेती करें, तो आप सीधे एक्सपोर्टर से डील कर सकते हैं।

20. किसानों के जमीनी अनुभव: “जिन्होंने बंजर को सोना बनाया”
मैंने खुद मराठवाड़ा के इन सफल बागवानों से बात की है और उनके अनुभव हमारे हिंगोली के भाइयों के लिए बहुत प्रेरणादायक हैं:
अ) लातूर के किसान तुकाराम जी का अनुभव:
“सचिन भाई, मेरे पास 2 एकड़ ऐसी जमीन थी जहां कंकर ही कंकर थे। मैंने वहां NMK-1 गोल्डन सीताफल लगाया। पहले 2 साल सब हंसते थे, लेकिन तीसरे साल जब मैंने 4 लाख के फल बेचे, तो सबकी आंखें खुल गईं। सीताफल ने मुझे वो दिया जो सोयाबीन 10 साल में नहीं दे सका।”
ब) हिंगोली (सेनगाँव) के युवा किसान विठ्ठल का अनुभव:
“हमारे इलाके में बंदरों का बहुत त्रास है। मैंने संतरा लगाया था, सब बर्बाद हो गया। फिर मैंने सचिन भाई की सलाह पर सीताफल लगाया। आज बंदर आते तो हैं, पर पत्ते कड़वे होने की वजह से छूते भी नहीं। अब मेरा बाग सुरक्षित है और कमाई भी फिक्स है।”
स) नांदेड़ के किसान गजानन राव का ‘पल्प’ मॉडल:
“मैंने सिर्फ फल नहीं बेचे, मैंने गांव में एक छोटी पल्प मशीन लगाई। जब मार्केट में सीताफल का रेट 15 रुपये गिर गया, तब मैंने पल्प निकालकर स्टोर कर लिया और बाद में उसे पुणे की आइसक्रीम कंपनी को 250 रुपये किलो बेचा। किसानों को अब व्यापारी नहीं, खुद का मालिक बनना होगा।”
21. सीताफल की खेती में ‘5 बड़ी गलतियां’ जो आपको नहीं करनी हैं
- कच्चे फल तोड़ना: सीताफल जब तक अपनी ‘आंखें’ न खोल दे (सफेद धारियां न दिखें), तब तक न तोड़ें। कच्चा फल कभी मीठा नहीं होगा।
- दवाइयों का अंधाधुंध छिड़काव: सीताफल एक प्राकृतिक फसल है। इस पर बहुत ज्यादा हैवी केमिकल स्प्रे न करें, वरना इसके पत्तों की कड़वाहट खत्म हो जाएगी और कीड़े बढ़ जाएंगे।
- जल निकासी का अभाव: अगर आपके खेत में पानी जमा होता है, तो सीताफल की जड़ें सड़ सकती हैं। हमेशा ‘बेड’ (Bed) बनाकर ही पौधे लगाएं।
- सस्ते पौधों के चक्कर में पड़ना: सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते पौधों से बचें। हमेशा सरकारी लाइसेंस वाली नर्सरी से ही पौधे लें।
- अकेले खेती करना: अगर आपके गांव में 10-15 किसान मिलकर सीताफल लगाएंगे, तभी व्यापारी आपके गांव में ट्रक लेकर आएगा।

22. सचिन भाई का फाइनल निष्कर्ष
मेरे किसान योद्धाओं! 2026 की खेती अब सिर्फ पसीने की नहीं, बल्कि ‘प्लानिंग’ की खेती है। रत्नागिरी का हापूस हो या हिंगोली का सीताफल, सफलता उसे ही मिलती है जो नई तकनीक और एक्सपोर्ट के मानकों को समझता है। सीताफल वह फसल है जो आपको ‘अन्य फसलों की तुलना में कम देखभाल वाली’ है।
अपनी बंजर जमीन को कोसना छोड़ें, आज ही सीताफल का एक पौधा लगाएं और उसे अपने भविष्य का ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ बनाएं।
जय जवान, जय किसान, जय महायोध्दा!
“किसान भाइयों, सिर्फ लेख पढ़ने से बागवानी समझ नहीं आती, उसे खेत में होते हुए देखना बहुत जरूरी है। नीचे दिए गए वीडियो में आप NMK-1 गोल्डन सीताफल के फल का साइज, उसकी छंटाई (Pruning) का सही तरीका और पल्प (Pulp) निकालने का पूरा प्रोसेस लाइव देख सकते हैं। इस वीडियो को पूरा देखें ताकि आप अपनी बंजर जमीन को सोना बनाने का हुनर सीख सकें:”
23. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. सीताफल के लिए सबसे च्छी जमीन कौन सी है?
उत्तर: वैसी तो यह हर जगह होता है, लेकिन मध्यम काली और हल्की पथरीली जमीन इसके लिए सबसे उत्तम है।
Q2. क्या इसके लिए सरकारी सब्सिडी मिलती है?
उत्तर: हाँ, ‘फलोत्पादन योजना’ के तहत 50% से 80% तक सब्सिडी का प्रावधान है।
Q3. एक एकड़ में कितने पौधे लगते हैं?
उत्तर: 12×12 फीट की दूरी पर लगभग 300 पौधे लगाए जा सकते हैं।
24. निष्कर्ष (Conclusion)
सीताफल की खेती (Custard Apple Farming) केवल एक फसल नहीं, बल्कि बंजर और कम पानी वाली जमीन के लिए एक शानदार आर्थिक विकल्प है। यदि किसान भाई सही योजना, उन्नत किस्म (जैसे NMK-1 गोल्डन), और ‘हैंड पॉलिनेशन’ जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हैं, तो यह बाग सालों-साल स्थिर और बंपर आय देने की क्षमता रखता है।
महाराष्ट्र के हमारे हिंगोली, लातूर और नांदेड़ जैसे क्षेत्रों की जलवायु सीताफल के लिए वरदान है। जो किसान पारंपरिक खेती के रिस्क से बचना चाहते हैं और कम मेहनत में ‘Business Model’ खड़ा करना चाहते हैं, उनके लिए सीताफल की बागवानी सबसे उपयोगी चुनाव है। सही ग्रेडिंग और पल्प प्रोसेसिंग के जरिए आप अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।
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अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों, अनुभवों और सामान्य कृषि पद्धतियों पर आधारित है।
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इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय की जिम्मेदारी पाठक की स्वयं की होगी।


