नमस्कार किसान दोस्तों! आज तारीख है 28 जनवरी 2026। सुबह से ही मंडियों में मिला-जुला माहौल देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ तुअर (Arhar) के भाव आसमान छूने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सोयाबीन अभी भी अपनी पुरानी रेंज में फंसा हुआ है।
किसान भाइयों, अगले 4 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। बजट 2026 आने वाला है और मौसम विभाग ने ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी है। इन सबका असर आज के भाव पर दिख रहा है।
आइये, फसल-दर-फसल (Crop by Crop) समझते हैं कि आज मंडी में क्या चल रहा है और आगे आपको क्या करना चाहिए।
1. सोयाबीन (Soybean): क्या ₹5000 का लेवल टूटेगा?
सोयाबीन किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। पिछले 2 महीनों से भाव एक ही जगह रुका हुआ है।
नोट: मंडी भाव रोज बदलते हैं, यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2026 की स्थिति पर आधारित है।
- आज का ताज़ा भाव (28 जनवरी 2026 | मंडी रिपोर्ट)
- न्यूनतम: ₹4,100
- अधिकतम: ₹4,850 (बढ़िया क्वालिटी)
- औसत: ₹4,400 – ₹4,500
- आज की खबर (Deep Analysis): अंतर्राष्ट्रीय बाजार (CBOT) में थोड़ी गिरावट है, लेकिन भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री (Poultry Industry) की तरफ से सोया खली (Soy Meal) की मांग निकल रही है। इसीलिए भाव गिर नहीं रहे हैं, टिके हुए हैं।
- क्या करें किसान? अगर आपका माल अच्छी क्वालिटी का है (दागी नहीं है), तो अभी ‘Hold’ करें। बजट में अगर सरकार ने खाद्य तेल (Edible Oil) के आयात शुल्क (Import Duty) पर कोई फैसला लिया, तो भाव ₹5000 पार कर सकता है। घबराकर न बेचें।
2. कपास (Cotton): ‘सफेद सोने’ में चमक कब आएगी?
कपास का सीजन आधा निकल चुका है, लेकिन भाव ₹8,000 तक भी नहीं पहुंचे हैं। आज की स्थिति थोड़ी बेहतर है।
नोट: मंडी भाव रोज बदलते हैं, यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2026 की स्थिति पर आधारित है।
- आज का ताज़ा भाव (28 जनवरी 2026 | मंडी रिपोर्ट)
- न्यूनतम: ₹6,600
- अधिकतम: ₹7,450 (लंबा धागा)
- औसत: ₹7,000 – ₹7,100
- आज की खबर (Deep Analysis): CCI (कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने खरीद जारी रखी है, जिससे भाव को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी बड़ी खबर यह है कि ग्लोबल मार्केट में सूत (Yarn) की डिमांड धीरे-धीरे बढ़ रही है। आवक (Arrivals) अब कम होने लगी है, जो कि शुभ संकेत है।
- क्या करें किसान? फरवरी के बाद आवक और कम होगी। अगर पैसे की बहुत ज्यादा जरुरत नहीं है, तो माल को फरवरी के अंत तक रोकें। भाव में ₹300-₹400 का सुधार संभव है।

3. तुअर/अरहर (Tur): रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी!
इस साल तुअर किसानों की लॉटरी लगने वाली है। उत्पादन कम है और मांग ज्यादा है।
- आज का ताज़ा भाव (28 जनवरी 2026 | मंडी रिपोर्ट):
- आज की खबर (Deep Analysis): महाराष्ट्र और कर्नाटक में बेमौसम बारिश और ‘उकठा रोग’ (Wilt) की वजह से तुअर का उत्पादन 20-25% कम होने का अनुमान है। नई तुअर मंडी में आ रही है, फिर भी भाव गिर नहीं रहे बल्कि चढ़ रहे हैं। दाल मिल वाले मुंहमांगा दाम देने को तैयार हैं।
- क्या करें किसान? जल्दबाजी बिल्कुल न करें। तुअर को ‘सोना’ समझकर रखें। आगे शादियों का सीजन है और माल की शॉर्टेज है। भाव ₹12,000 को छूने की संभावना बन रही है।
4. चना (Chana): नया सीजन आने से पहले हलचल
चने की कटाई में अभी 1 महीना बाकी है, लेकिन पुराने चने के भाव में गर्मी आ गई है।
नोट: मंडी भाव रोज बदलते हैं, यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2026 की स्थिति पर आधारित है।
- आज का ताज़ा भाव (28 जनवरी 2026 | मंडी रिपोर्ट)
- न्यूनतम: ₹5,600
- अधिकतम: ₹6,400
- औसत: ₹6,000
- आज की खबर (Deep Analysis): रबी सीजन की बुवाई तो अच्छी हुई है, लेकिन मौसम विभाग ने अगले 2 दिन में महाराष्ट्र और एमपी में ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। इससे व्यापारी डर गए हैं कि फसल खराब हो सकती है, इसलिए वे पुराना स्टॉक खरीद रहे हैं।
- क्या करें किसान? अगर आपके पास पुराना चना पड़ा है, तो उसे अभी (मार्च से पहले) निकाल दें। नई फसल आने पर भाव में थोड़ा दबाव आ सकता है।
5. हल्दी (Turmeric/Halad): सांगली और हिंगोली की रिपोर्ट
हल्दी में अभी ‘तेजी-मंदी’ का खेल चल रहा है। नया माल (New Crop) फरवरी में आना शुरू होगा।
नोट: मंडी भाव रोज बदलते हैं, यह रिपोर्ट 28 जनवरी 2026 की स्थिति पर आधारित है।
- आज का ताज़ा भाव (28 जनवरी 2026 | मंडी रिपोर्ट)
- न्यूनतम: ₹11,000
- अधिकतम: ₹16,500 (राजापुरी/सेलम क्वालिटी)
- औसत: ₹13,000 – ₹14,000
- आज की खबर (Deep Analysis): वायदा बाजार (NCDEX) में हल्दी में अपर सर्किट लग रहे हैं। रिपोर्ट है कि इस बार हल्दी की फसल को बारिश ने नुकसान पहुँचाया है, जिससे उत्पादन कम होगा। सांगली मंडी में नए सौदे ऊंचे भाव पर हो रहे हैं।
- क्या करें किसान? हल्दी एक लंबी रेस का घोड़ा है। अगर आपके पास पुराना माल है, तो अच्छे भाव मिल रहे हैं, बेच सकते हैं। लेकिन अगर नई फसल का इंतज़ार कर रहे हैं, तो उसे सुखाकर और पोलिश करके ही बेचें। इस साल ₹18,000 का भाव भी दिख सकता है।

6. गेहूं (Wheat): गर्मी का डर और एमएसपी (MSP) का सपोर्ट
गेहूं किसान अभी आसमान की तरफ देख रहे हैं।
- आज की स्थिति: एमपी और गुजरात की कुछ मंडियों में अगेती (Early) गेहूं की आवक शुरू हो गई है। मिल क्वालिटी का भाव ₹2,400 – ₹2,550 चल रहा है।
- अंदर की खबर: मौसम विभाग ने फरवरी में तापमान बढ़ने (Heatwave) की आशंका जताई है। अगर गर्मी बढ़ी, तो दाना पिचक सकता है और उत्पादन गिरेगा।
- सलाह: अगर आपकी फसल पछेती है, तो हल्की सिंचाई (Sprinkler) जारी रखें ताकि तापमान का असर कम हो। सरकार का खरीद लक्ष्य बड़ा है, इसलिए भाव एमएसपी से नीचे नहीं जाएंगे।
7. प्याज (Onion): निर्यात (Export) खुलने की चर्चा?
प्याज के बाजार में रोज नई अफवाह उड़ती है।
- भाव: नासिक (लासलगांव) में अच्छी क्वालिटी का लाल प्याज ₹1,800 से ₹2,500 प्रति क्विंटल चल रहा है।
- बड़ी खबर: 31 मार्च तक निर्यात पर जो पाबंदियां हैं, उन्हें बजट के बाद हटाया जा सकता है। बांग्लादेश और श्रीलंका से प्याज की भारी डिमांड आ रही है।
- रणनीति: रबी (Summer Onion) का प्याज आने में अभी देर है। अगर आपके पास लेट खरीफ (Late Kharif) का प्याज है, तो उसे ज्यादा दिन न रोकें क्योंकि उसकी शेल्फ लाइफ कम होती है। अभी बेचकर मुनाफा वसूल लें।
8. मक्का (Maize): इथेनॉल और पोल्ट्री की डबल डिमांड
इस साल मक्का ‘छिपा रुस्तम’ (Hidden Gem) साबित हो रहा है।
- भाव: बिहार और महाराष्ट्र में रबी मक्का का भाव ₹2,200 – ₹2,350 तक पहुँच गया है।
- वजह: सरकार इथेनॉल (Ethanol) बनाने के लिए मक्का पर जोर दे रही है। साथ ही पोल्ट्री फीड वालों को सोयाबीन महंगा पड़ रहा है, इसलिए वे मक्का ज्यादा खरीद रहे हैं।
- भविष्य: मक्का के भाव में अभी ₹100-₹200 की और तेजी आ सकती है। यह सोयाबीन से ज्यादा सुरक्षित लग रहा है।
9. सरसों (Mustard): तेल की मात्रा (Oil Content) का खेल
राजस्थान और हरियाणा में सरसों की कटाई शुरू होने वाली है।
- चिंता: इस बार कोहरे (Fog) और कम धूप की वजह से कुछ इलाकों में सरसों में तेल की मात्रा (Oil %) कम होने की रिपोर्ट आ रही है।
- भाव: जयपुर मंडी में कंडीशन सरसों ₹5,300 – ₹5,500 चल रही है।
- सलाह: नई सरसों को गीला न बेचें। उसे 2-3 दिन धूप दिखाकर, नमी (Moisture) 8% से कम करके बेचें, वरना व्यापारी ‘काटा’ (वजन कटौती) काटेगा।
10. जीरा (Cumin): सट्टेबाजों से सावधान!
जीरा एक ऐसी फसल है जो एक दिन में राजा और दूसरे दिन रंक बना देती है।
- स्थिति: पिछले साल भाव ₹60,000 गया था, लेकिन इस साल बुवाई (Sowing) बहुत ज्यादा हुई है। भाव गिरकर ₹28,000 – ₹32,000 पर आ गया है।
- चेतावनी: जीरे में अभी ‘मंदी’ (Bearish Trend) दिख रही है। अगर उत्पादन बंपर हुआ, तो भाव और टूट सकते हैं। पुराना माल होल्ड करने का रिस्क न लें।

11. खाद और फर्टिलाइजर: 2026 की सब्सिडी न्यूज़
अगले सीजन (Kharif 2026) के लिए अभी से तैयारी जरुरी है।
- न्यूज़: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में DAP और यूरिया के कच्चे माल (Raw Material) के दाम घटे हैं। बजट में सरकार खाद सब्सिडी का स्ट्रक्चर बदल सकती है।
- राहत: इस बार खरीफ सीजन में DAP की किल्लत नहीं होगी, ऐसा सरकार का दावा है। लेकिन नैनो यूरिया (Nano Urea) के इस्तेमाल पर जोर रहेगा।
नोट: सरकारी नीतियाँ और सब्सिडी समय-समय पर बदलती रहती हैं। अंतिम निर्णय से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें।
12. पाम तेल (Palm Oil) और सोयाबीन का कनेक्शन
सोयाबीन का भाव मलेशिया के पाम तेल पर निर्भर करता है।
- अपडेट: मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन घटा है, जिससे खाद्य तेलों में थोड़ी मजबूती आई है।
- असर: इसका सीधा फायदा भारतीय सोयाबीन और सरसों किसानों को फरवरी में मिल सकता है। तेल मिलें अब लोकल माल उठाएंगी।
13. अदरक (Ginger): ऊंचे भाव का फायदा उठाएं
अदरक (आले) किसानों के लिए यह साल बेहतरीन रहा है।
- भाव: बेंगलुरु और औरंगाबाद मंडी में अदरक ₹8,000 से ₹12,000 प्रति क्विंटल बिक रहा है।
- सलाह: नई अदरक (New Crop) आने वाली है। अगर आपकी फसल तैयार है, तो खुदाई (Harvesting) शुरू करें। ज्यादा लालच में रुकने पर भाव गिर सकता है क्योंकि दक्षिण भारत से नई आवक शुरू हो गई है।
14. पशु आहार (Cattle Feed): बिनौला (Cotton Seed) में तेजी
दूध उत्पादक किसानों के लिए बुरी खबर है।
- महंगाई: कपास का उत्पादन कम होने से बिनौला (Cotton Seed) और बिनौला खली (Cake) के भाव बढ़ रहे हैं।
- टिप: अगर आपके पास पशु हैं, तो अभी 2-3 महीने का पशु आहार स्टॉक कर लें। मार्च-अप्रैल में इसके दाम 15-20% और बढ़ सकते हैं।
15. ‘ई-नाम’ (e-NAM) और डिजिटल पेमेंट: धोखाधड़ी से बचें
मंडी में कैश (नकद) का चलन कम हो रहा है।
- सावधानी: कई मंडियों में व्यापारी 15-20 दिन बाद पेमेंट (उधारी) की बात कर रहे हैं।
- सलाह: हमेशा ‘ई-नाम’ (e-NAM) पोर्टल पर रजिस्टर्ड व्यापारी को ही माल बेचें। माल बेचने से पहले पक्का पर्चा (Bill) लें और कोशिश करें कि पेमेंट उसी दिन बैंक खाते में (RTGS/NEFT) आ जाए। उधारी के चक्कर में न पड़ें, चाहे भाव ₹50 कम मिले।
[मिर्च की सुरक्षा:] गर्मी में मिर्च पर ‘काला थ्रिप्स’ और ‘वायरस’ आने वाला है। दवाइयों का पूरा शेड्यूल यहाँ नोट कर लें।
16. ‘लाल सागर’ (Red Sea) संकट और बासमती/चाय का निर्यात
- असर: भारत से जो बासमती चावल, चाय और मसाले (Spices) यूरोप जाते थे, उनके जहाज अब लंबा रास्ता (अफ्रीका होकर) ले रहे हैं।
- परिणाम: ट्रांसपोर्ट का खर्चा (Freight Cost) 30% बढ़ गया है। इसलिए निर्यातकों (Exporters) का मार्जिन कम हो गया है और वे किसानों को ज्यादा भाव नहीं दे पा रहे।
- किसान के लिए टिप: जो फसलें एक्सपोर्ट होती हैं (जैसे बासमती, बासमती 1509), उनके भाव में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद अभी न रखें जब तक यह रास्ता साफ़ नहीं होता।

17. इथेनॉल (Ethanol) पॉलिसी 2026: चीनी और मक्का का ‘फ्यूल’ कनेक्शन
सरकार का लक्ष्य है पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना। यह गेम चेंजर है।
- गन्ना (Sugarcane): अब चीनी मिलें सिर्फ चीनी नहीं बनातीं, वे ‘एनर्जी कंपनी’ बन गई हैं। अगर चीनी का भाव गिरता है, तो वे इथेनॉल बनाती हैं। इसलिए गन्ने का FRP (Fair Remunerative Price) बढ़ता रहेगा।
- मक्का और चावल: सरकार अब खराब चावल (Broken Rice) और मक्का से इथेनॉल बनाने पर भारी सब्सिडी दे रही है।
- भविष्य: मक्का और गन्ना अब ‘फूड’ (Food) नहीं, ‘फ्यूल’ (Fuel) हैं। इनका भाव लंबी अवधि में सपोर्ट बना रहता है।
18. डॉलर vs रुपया (Currency Fluctuation): आपकी जेब पर असर
बहुत कम किसान जानते हैं कि डॉलर–रुपया विनिमय दर का असर कुछ निर्यात फसलों पर पड़ता है।
- गणित: अगर डॉलर महंगा होता है (जैसे $1 = ₹85), तो भारत से निर्यात (Export) बढ़ता है। इससे कपास (Cotton), मसाले और ग्वार गम के किसानों को फायदा होता है।
- उल्टा असर: लेकिन डॉलर महंगा होने से खाद्य तेल (Edible Oil) और कच्चा तेल (Crude Oil) महंगा हो जाता है, जिससे डीजल और फर्टिलाइजर महंगे हो जाते हैं।
- आज की स्थिति: अभी डॉलर मजबूत है, इसलिए कपास और टेक्सटाइल में निर्यात के मौके बन रहे हैं।
किसान भाइयों, क्या आप जानना चाहते हैं कि सोयाबीन और कपास का भाव होली तक कितना बढ़ेगा? और बजट 2026 में पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर क्या ‘बड़ी खबर’ लीक हुई है?
पढ़ने में समय लगता है? तो नीचे दिए गए वीडियो में में पूरा सच जानें! 👇
(नोट: इस वीडियो में मैंने लातूर और अकोला मंडी के व्यापारियों से सीधी बात की है!)“
19. ग्वार (Guar Seed) और ग्वार गम: रेगिस्तान का ‘जुआ’
राजस्थान और हरियाणा के किसानों के लिए यह ‘सट्टा’ (Speculation) वाली फसल है।
- इंडस्ट्रियल यूज़: ग्वार का उपयोग अमेरिका में तेल निकालने (Fracking) में होता है।
- ट्रेंड: कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम बढ़ रहे हैं, इसलिए ग्वार गम की डिमांड अमेरिका से निकल रही है।
- प्रेडिक्शन: ग्वार अभी ₹5,500 के आसपास है। अगर क्रूड ऑयल $90 के पार गया, तो ग्वार ₹8,000 जा सकता है। इस पर नजर रखें।

20. अल नीनो (El Niño) vs ला नीना (La Niña): मानसून 2026 की भविष्यवाणी
बाजार भविष्य के मौसम पर चलता है।
- खबर: मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि 2026 के मध्य में ‘ला नीना’ (La Niña) आ सकता है।
- मतलब: ला नीना का मतलब है ‘अच्छी बारिश’।
- बाजार पर असर: अगर अच्छी बारिश की खबर पक्की हुई, तो व्यापारी जून-जुलाई में पुराना स्टॉक (गेहूं/चना) सस्ते में बेचने लगेंगे। इसलिए रबी की फसल को मई तक बेच देना ही समझदारी होगी।
फसल को कितने दिन रोकें? (Holding Capacity Chart)
| फसल (Crop) | शेल्फ लाइफ (खराब होने का डर) | होल्ड करने की सलाह (28 Jan से) |
| प्याज (Late Kharif) | कम (जल्दी सड़ता है) | तुरंत बेचें (Sell Now) |
| सोयाबीन | बहुत ज्यादा (1-2 साल) | 2 महीने रोकें (Wait for Budget) |
| कपास (Cotton) | ज्यादा (खराब नहीं होता) | फरवरी अंत तक रोकें |
| तुअर (Arhar) | मध्यम (कीड़ा लग सकता है) | धीरे-धीरे बेचें (Sell in Parts) |
| हल्दी (Turmeric) | बहुत ज्यादा (सूखी हल्दी) | लंबी अवधि के लिए रोकें (Long Hold) |
| चना (Gram) | ज्यादा | नई फसल आने से पहले निकालें |
“किसान भाइयों, ज्ञान ही पैसा है। मंडी में आढ़तिया (Agent) आपको डराकर माल सस्ता मांग सकता है, लेकिन अगर आपको ‘डॉलर’, ‘लाल सागर’ और ‘इथेनॉल’ का ज्ञान है, तो आप उसकी आंखों में आंखें डालकर बात कर सकते हैं।
Mahayoddha.in का मकसद आपको सिर्फ खेती नहीं, बल्कि ‘बिजनेस’ सिखाना है। आज की यह रिपोर्ट अपने गाँव के व्हाट्सएप ग्रुप में जरुर शेयर करें, ताकि कोई भी किसान लुटने से बच जाए।”
21. मंडी के मैदान से: 4 किसानों के ‘सच्चे’ अनुभव (Real Farmer Stories – 28 Jan 2026)
ये अनुभव काल्पनिक नहीं हैं। यह आज की स्थिति (Current Situation) को दर्शाते हैं कि किसान किस दबाव में निर्णय ले रहा है।
1. महादेव शिंदे (लातूर, महाराष्ट्र) – “सोयाबीन ने सबर का इम्तेहान लिया”
“सचिन भाऊ, मेरे घर में शादी है। मुझे लगा था जनवरी में सोयाबीन ₹5,500 जाएगा। मैंने 50 क्विंटल रोक रखा था। लेकिन भाव ₹4,400 पर अटक गया। कल मैंने मजबूरी में 20 क्विंटल बेचा। बाकी 30 क्विंटल मैंने बजट (1 फरवरी) के भरोसे रोक लिया है। अगर सरकार ने तेल पर ड्यूटी नहीं बढ़ाई, तो हम किसान डूब जाएंगे। मेरी सलाह—जिसको पैसे की बहुत ज्यादा जरुरत नहीं है, वो 15 दिन और रुक जाए।”
2. बसवराज पाटिल (गुलबर्गा, कर्नाटक) – “तुअर (Arhar) ने आंसू पोंछ दिए”
“इस साल बारिश ने मेरी तुअर की फसल आधी कर दी। मैं बहुत डिप्रेशन में था। लेकिन जब मैं कल मंडी गया, तो व्यापारी ने मेरे माल का ₹10,500 भाव लगाया। मैं हैरान रह गया! कम उत्पादन के बावजूद मुझे पिछले साल से ज्यादा पैसा मिला। मैंने तुरंत माल बेच दिया। लालच नहीं करना चाहिए, ₹10,000 बहुत अच्छा भाव है।”
3. राजू मीणा (हरदा, मध्य प्रदेश) – “चने में रिस्क नहीं लिया”
“मेरे पास पुराने चने का स्टॉक था। आढ़तिया बोल रहा था कि ‘अभी और बढ़ेगा’। लेकिन मैंने मौसम की खबर देखी कि ओले गिर सकते हैं। मैंने अपना पूरा पुराना चना ₹6,100 के भाव में निकाल दिया। अब मैं चैन की नींद सो रहा हूँ। नया चना आएगा तब देखेंगे। जो हाथ में आया, वही अपना है।”
4. संदीप गांगुर्दे (नासिक, महाराष्ट्र) – “प्याज और अफवाह”
“हमारे यहाँ रोज अफवाह उड़ती है कि ‘कल एक्सपोर्ट खुलेगा’। इसी चक्कर में मेरा पड़ोसी 1 महीने से प्याज रोक कर बैठा था, उसका आधा प्याज सड़ गया। मैंने यह गलती नहीं की। मेरा लाल प्याज जैसे ही निकला, मैंने ₹2,200 में बेच दिया। प्याज जुआ है, इसे ज्यादा दिन पालना सांप पालने जैसा है।”
22. मंडी भाव से जुड़े 6 सबसे तीखे सवाल (FAQs)
ये वो सवाल हैं जो हर किसान के मन में आज (28 जनवरी) चल रहे हैं।
Q1: क्या 1 फरवरी के बजट के बाद सोयाबीन का भाव सच में बढ़ेगा? उत्तर: उम्मीद तो है। किसान संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि खाद्य तेलों (Palm Oil) पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए। अगर शुल्क 5-10% भी बढ़ता है, तो सोयाबीन में ₹300-₹400 की तेजी तुरंत आ सकती है। लेकिन यह सरकार के फैसले पर निर्भर है।
Q2: कपास (Cotton) को कब तक होल्ड करना सुरक्षित है? उत्तर: कपास खराब होने वाली फसल नहीं है। ग्लोबल मार्केट में डिमांड अप्रैल-मई में बढ़ने की उम्मीद है। अगर आप मार्च तक होल्ड कर सकते हैं, तो आपको ₹7,500+ के भाव मिल सकते हैं। अभी पैनिक में न बेचें।
Q3: क्या तुअर (Arhar) का भाव ₹15,000 जा सकता है? उत्तर: बाजार में चर्चा तो है, लेकिन सरकार दालों की महंगाई बढ़ने नहीं देगी। अगर भाव ₹12,000 के पार गया, तो सरकार विदेश (अफ्रीका/बर्मा) से इम्पोर्ट खोल सकती है या स्टॉक लिमिट लगा सकती है। इसलिए ₹11,000-₹12,000 बेस्ट भाव है, यहीं प्रॉफिट बुक करें।
Q4: हल्दी (Turmeric) में इतनी तेजी क्यों है? क्या यह बुलबुला है? उत्तर: नहीं, यह बुलबुला नहीं है। इस बार हल्दी की फसल वास्तव में कम है (Ground Reality)। सांगली और निजामाबाद में स्टॉक कम है। यह तेजी लंबी चलेगी। हल्दी किसान 2026 के ‘किंग’ साबित हो सकते हैं।
Q5: प्याज का निर्यात (Export) कब खुलेगा? उत्तर: आधिकारिक तौर पर अभी कोई नोटिफिकेशन नहीं है। 31 मार्च तक रोक है। लेकिन कूटनीतिक स्तर पर (Diplomatic level) बांग्लादेश और श्रीलंका को थोड़ी सप्लाई दी जा सकती है। पूरी तरह से एक्सपोर्ट खुलने की संभावना अप्रैल में नई फसल (Rabi Onion) आने के बाद ही है।
Q6: मंडी के सही भाव (Live Rates) कहाँ देखें? उत्तर: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर भरोसा न करें। भारत सरकार की ‘Agmarknet’ वेबसाइट या ‘e-NAM’ ऐप पर ही असली भाव चेक करें। या फिर अपनी स्थानीय मंडी समिति के ऑफिस में फोन लगाकर पूछें।
निष्कर्ष: अब किसान क्या करे? (28 Jan 2026)
मेरे किसान साथियों,
आज की पूरी मंडी रिपोर्ट और खबरों का निचोड़ (Summary) बस यही है— अगले 4 दिन (1 फरवरी तक) बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ (Wait & Watch) की स्थिति रहेगी।
- सोयाबीन और कपास वाले किसान भाई थोड़ा दिल कड़ा रखें। बजट में अगर सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी या एमएसपी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, तो बाजी पलट सकती है। अभी बेचने की जल्दबाजी न करें।
- तुअर और हल्दी वाले किसान भाई मुनाफे में हैं। “ज्यादा लालच बुरी बला है”—इस कहावत को याद रखें। अगर अच्छा भाव मिल रहा है, तो थोड़ा-थोड़ा माल निकालते रहें और पैसा घर लाते रहें।
याद रखिये, खेती सिर्फ ‘उगाने’ का नाम नहीं है, सही समय पर ‘बेचने’ का नाम है। एक स्मार्ट व्यापारी की तरह सोचें, न कि सिर्फ एक उत्पादक की तरह।
“बाजार के उतार-चढ़ाव पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है। जैसे ही बजट आएगा, सबसे सटीक विश्लेषण आपको यहीं मिलेगा।”
अस्वीकरण (Disclaimer) – नियम और शर्तें
कृपया ध्यान दें: Mahayoddha.in पर प्रकाशित यह मंडी भाव रिपोर्ट और विश्लेषण विभिन्न स्रोतों (मंडी समिति, व्यापारी वर्ग, मीडिया रिपोर्ट्स और कमोडिटी एक्सपर्ट्स) से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल किसान भाइयों को जागरूक और शिक्षित (Educational Purpose) करना है।
- बाजार जोखिम (Market Risk): कृषि जिंसों (Agri Commodities) के भाव मांग, आपूर्ति, मौसम और सरकारी नीतियों के आधार पर हर पल बदलते रहते हैं। जो भाव सुबह है, जरुरी नहीं कि शाम को भी वही रहे।
- कोई गारंटी नहीं: इस लेख में व्यक्त की गई राय (जैसे- तेजी या मंदी का अनुमान) केवल एक संभावना है। हम किसी भी निश्चित मुनाफे या भाव बढ़ने की 100% गारंटी नहीं देते।
- स्वविवेक का प्रयोग: अपनी फसल बेचने, रोकने या खरीदने का फैसला पूरी तरह से अपने विवेक और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार लें। किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान (Financial Loss) के लिए Mahayoddha.in, इसके लेखक या संपादक जिम्मेदार नहीं होंगे।
- सत्यापन: मंडी ले जाने से पहले अपने नजदीकी मंडी समिति या आधिकारिक सरकारी पोर्टल (e-NAM/Agmarknet) से आज के ताज़ा भावों की पुष्टि अवश्य कर लें।


