नमस्कार किसान साथियों! खेती में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो हर 4 महीने में फसल काटकर मंडी जाते हैं (गेहूं/धान वाले)। और दूसरे वो, जो एक बार पौधा लगाते हैं और 12 साल बाद करोड़पति बनकर ही दम लेते हैं।
अगर आपके पास थोड़ी सी भी जमीन है जिसे आप अगले 10-15 साल के लिए छोड़ सकते हैं, तो उस पर सफेद चंदन (Santalum Album) लगा दीजिये। यह खेती नहीं, यह आपके बुढ़ापे की “सबसे सुरक्षित पेंशन स्कीम” है।
लेकिन रुकिए! चंदन कोई आम पेड़ नहीं है। इसे पालने का तरीका बिल्कुल अलग है। अगर आपने सिर्फ चंदन का पौधा लगा दिया, तो वो 3 साल में मर जाएगा। क्यों? आइये, इस रहस्य को स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं।
1. चंदन की फितरत: ‘अकेला नहीं जी सकता’ (The Parasitic Nature)
सचिन, यह सबसे गहरा पॉइंट है। चंदन का पेड़ स्वभाव से ‘अर्ध-परजीवी’ (Semi-Parasite) होता है। आसान भाषा में कहें तो चंदन एक “भिखारी पौधा” है। यह जमीन से पानी तो खुद ले सकता है, लेकिन भोजन (Nutrients) के लिए इसे दूसरे पेड़ की जड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है।
अगर आप चंदन के साथ दूसरा पेड़ (साथी) नहीं लगाएंगे, तो चंदन भूखा मर जाएगा। इस साथी पेड़ को ‘होस्ट प्लांट’ (Host Plant) कहते हैं।
2. होस्ट प्लांट का गणित: ‘प्राइमरी’ और ‘परमानेंट’ साथी
सफलता का राज चंदन में नहीं, उसके साथियों में है। आपको दो तरह के होस्ट लगाने होंगे:
A. प्राइमरी होस्ट (बचपन का साथी):
- जब चंदन छोटा होता है (1 से 3 साल), उसे तुंरत भोजन चाहिए।
- क्या लगाएं: लाल तुअर (Arhar), बबूल या कोई भी नाइट्रोजन देने वाली फसल।
- दूरी: चंदन के पौधे से मात्र 1 फीट की दूरी पर।
B. परमानेंट होस्ट (जवानी का साथी):
- जब चंदन बड़ा होगा, तो उसे ज्यादा भोजन चाहिए जो तुअर नहीं दे पाएगी।
- क्या लगाएं: मालाबार नीम (Malabar Neem), महोगनी, या सरीफा।
- दूरी: दो चंदन के पेड़ों के बिल्कुल बीच में।
- नोट: कभी भी चंदन के पास ‘सागवान’ (Teak) या ‘सफेदा’ (Eucalyptus) न लगाएं, ये चंदन का पानी चूस लेंगे।

3. मिट्टी और जलवायु (Soil & Climate)
चंदन कश्मीर की बर्फ को छोड़कर भारत में कहीं भी हो सकता है।
- मिट्टी: लाल दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट है। पथरीली जमीन पर भी यह सोना उगलता है।
- पानी: इसे ज्यादा पानी नहीं चाहिए।
- खतरा: जिस खेत में पानी भरता हो (Water Logging), वहां चंदन 100% मर जाएगा। खेत का ढलान ऐसा हो कि पानी तुरंत निकल जाए।
4. 1 एकड़ का प्रोजेक्ट: दूरी और पौधों की संख्या
एक एकड़ में बहुत घना जंगल नहीं बनाना है, हवा का खेल जरुरी है।
- दूरी: 12 x 12 फीट (लाइन से लाइन और पेड़ से पेड़)।
- पौधे: 1 एकड़ में लगभग 300 से 350 चंदन के पौधे आएंगे।
- होस्ट: इनके बीच में लगभग 300 होस्ट प्लांट (जैसे मालाबार नीम) लगेंगे।
- गड्ढा: 2x2x2 फीट का गड्ढा खोदें और उसमें गोबर की खाद और ट्राइकोडर्मा मिलाकर भरें।
5. 3 करोड़ का गणित: क्या यह सच है? (Economics)
चलिए हवा-हवाई बातें नहीं, असली हिसाब लगाते हैं। चंदन की कीमत उसकी लकड़ी के वजन पर नहीं, उसके अंदर की ‘हार्टवुड’ (Heartwood) पर मिलती है। हार्टवुड वो खुशबूदार गहरा हिस्सा है जो पेड़ के बीच में 8 साल बाद बनना शुरू होता है।
12 से 15 साल बाद का अनुमान:
- एक स्वस्थ पेड़ का कुल वजन: 50-60 किलो।
- उसमें से निकलने वाली हार्टवुड (महंगी लकड़ी): 15 से 20 किलो (औसत)।
- आज का भाव: सरकार और प्राइवेट कंपनियां ₹6,000 से ₹10,000 प्रति किलो देती हैं। (हम कम से कम ₹6000 मानते हैं)।
कैलकुलेशन:
- 1 पेड़ से कमाई = 15 किलो x ₹6,000 = ₹90,000 (नब्बे हजार)।
- अगर 1 एकड़ में 300 पेड़ लगाए और 15 साल बाद 250 पेड़ भी सही सलामत बचे।
- कुल कमाई: 250 पेड़ x ₹90,000 = ₹2.25 करोड़ (सवा दो करोड़)।
(नोट: यह सिर्फ लकड़ी का भाव है। अगर तेल (Oil) का भाव जोड़ें तो आंकड़ा 3 करोड़ पार कर जाता है।)
6. लागत और खर्चा (Investment)
करोड़पति बनने के लिए जेब से कितना जाएगा?
- पौधा: चंदन का पौधा महंगा मिलता है (₹40 से ₹100)। सरकारी नर्सरी से सस्ता मिलेगा।
- होस्ट प्लांट: ₹10 – ₹20।
- ड्रिप और खाद: ₹50,000।
- सुरक्षा (Fencing): यह सबसे बड़ा खर्चा है। जाली लगवाना जरुरी है।
- कुल अनुमानित खर्च: 12 साल में लगभग ₹2 से ₹3 लाख।
7. कानून और लाइसेंस 2026: क्या पुलिस पकड़ेगी? (Legal Status)
यह सबसे बड़ा डर है।
- पुरानी बात: 2002 से पहले चंदन का हर पेड़ ‘सरकार की संपत्ति’ माना जाता था, चाहे वो आपके आंगन में ही क्यों न हो।
- नया नियम (2017 के बाद): अब “जो लगाएगा, वही मालिक होगा”। आप अपनी जमीन पर चंदन लगा सकते हैं।
- काटने का नियम: आप खुद कुल्हाड़ी लेकर नहीं काट सकते।
- जब पेड़ तैयार हो जाए, तो वन विभाग (Forest Dept) को सूचना दें।
- वन विभाग की टीम आएगी, पेड़ का नंबर नोट करेगी और आपको काटने की परमिशन (Transit Pass – TP) देगी।
- इसके बाद वे खुद नीलामी करवाएंगे और पैसा आपके खाते में आएगा।

8. सबसे बड़ा रिस्क: ‘चोरी’ (Security Risk)
चंदन के पेड़ को बीमारी से ज्यादा ‘दो पैर वाले जानवरों’ (चोरों) से खतरा है। जब पेड़ 7-8 साल का होता है और उसमें खुशबू आने लगती है, तो चोरों की नजर उस पर पड़ती है। उपाय:
- माइक्रोचिप (Microchip): आजकल चंदन के तने में ₹200 की चिप डलती है। अगर पेड़ चोरी हुआ, तो आप उसे ट्रैक कर सकते हैं।
- कुत्ते और फेंसिंग: खेत के चारों तरफ 8 फीट की जाली और 2-3 अच्छी नस्ल के कुत्ते रखना अनिवार्य है।
- CCTV: अब तो सोलर वाले CCTV कैमरे भी आ गए हैं।
9. वैरायटी का चुनाव: ‘श्रीखंड’ ही क्यों? (Variety Selection)
दुनिया में चंदन की 16 प्रजातियां हैं, लेकिन आपको सिर्फ एक लगानी है।
- Santalum Album (सफेद चंदन): इसे ‘ईस्ट इंडियन सैंडलवुड’ कहते हैं। इसमें तेल की मात्रा सबसे ज्यादा (6%) होती है। यह सबसे महंगा बिकता है।
- Australian Sandalwood (Spicatum): इसे भूलकर भी न लगाएं। यह सस्ता है और भारतीय जलवायु में इसमें वो खुशबू नहीं आती।
- पहचान: नर्सरी से हमेशा लिखित में लें कि यह ‘Santalum Album’ ही है।
10. प्रूनिंग: पेड़ को ‘पेंसिल’ जैसा सीधा कैसे करें? (Pruning Logic)
चंदन की लकड़ी का रेट उसके वजन और सीधेपन (Straightness) पर मिलता है।
- गलती: अगर पेड़ झाड़ी जैसा फैल गया, तो लकड़ी कम निकलेगी।
- तकनीक: पहले 4 साल तक पेड़ की नीचे की टहनियों (Side Branches) को काटते रहें। हमें 20 फीट तक एकदम सीधा तना (Main Trunk) चाहिए। इसे ‘Bole Height’ कहते हैं। जितनी लंबी और मोटी ‘Bole’ होगी, उतना ज्यादा पैसा मिलेगा।

11. खुशबू का रहस्य: ‘स्ट्रेस’ देना जरुरी है (Stress Mechanism)
सचिन, यह पॉइंट बहुत गहरा है। चंदन खुशबू (Heartwood) अपनी मर्जी से नहीं बनाता।
- लॉजिक: जब चंदन को लगता है कि “मैं मरने वाला हूँ” या “माहौल कठिन है”, तब वह खुद को बचाने के लिए तने के बीच में तेल (Oil) बनाता है।
- पानी कम करें: पेड़ लगाने के 5-6 साल बाद पानी देना धीरे-धीरे कम कर दें। अगर आप उसे रोज पानी और खाद देंगे, तो पेड़ ‘मोटा’ तो होगा, लेकिन अंदर से ‘सफेद’ (बिना खुशबू का) रह जाएगा। उसे थोड़ा प्यासा रखें।
12. सांप वाला मिथक: क्या सच में नाग लिपटे रहते हैं? (Snake Myth)
हर किसान यह सवाल पूछता है। इसे क्लियर करें।
- सच: चंदन की खुशबू सांपों को आकर्षित नहीं करती। सांप को खुशबू नहीं आती।
- कारण: चंदन का पेड़ ठंडी तासीर का होता है। गर्मी में ठंडक पाने के लिए सांप वहां आ सकते हैं, या फिर पक्षियों के घोंसले (अंडे) खाने आ सकते हैं।
- डरें नहीं: खेत की साफ-सफाई रखें, सांप नहीं आएंगे। यह सिर्फ एक किस्सा है।

13. इंटरक्रॉपिंग: 12 साल तक क्या खाएंगे? (Income while Waiting)
12 साल तक आप भूखे नहीं रह सकते। चंदन के बीच की 12 फीट की जगह खाली पड़ी है।
- शुरुआती 3 साल: आप सब्जियां, उड़द, मूंग या औषधीय पौधे (जैसे अश्वगंधा, कालमेघ) लगा सकते हैं।
- 3 साल बाद: जब चंदन की छांव हो जाए, तो हल्दी (Turmeric) और अदरक (Ginger) लगाएं। हल्दी को छांव पसंद है और यह चंदन की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाती। इससे आपकी सालाना कमाई चालू रहेगी।
14. बीज असली है या नकली? (Seed Floating Test)
अगर आप बीज से पौध तैयार कर रहे हैं, तो धोखा हो सकता है।
- टेस्ट: बीजों को पानी के गिलास में डालें।
- परिणाम: जो बीज पानी के ऊपर तैर रहे हैं, वे खोखले हैं। उन्हें फेंक दें। जो बीज डूब गए, सिर्फ वही उगेंगे।
- रंग: असली पका हुआ बीज काला (Blackish) होता है। लाल बीज कच्चा होता है।
15. सरकारी संस्थान: IWST बैंगलोर (The Authority)
अपने पाठकों को सही जगह भेजें।
- IWST (Institute of Wood Science and Technology): यह बैंगलोर में भारत सरकार का संस्थान है जो चंदन पर रिसर्च करता है।
- सलाह: अगर आप बड़े स्तर पर (5-10 एकड़) खेती कर रहे हैं, तो एक बार बैंगलोर जाकर वहां के वैज्ञानिकों से मिलें। वहां आपको दुनिया की सबसे बेहतरीन जानकारी मिलेगी।
16. चोरों से सुरक्षा: ‘बायो-फेंसिंग’ (Natural Security)
लोहे की जाली को काटा जा सकता है, लेकिन ‘करौंदा’ को नहीं।
- जुगाड़: खेत की बाउंड्री पर ‘करौंदा’ (Karonda) या ‘थूहर’ (Cactus) की घनी झाड़ी लगाएं।
- फायदा: करौंदा के कांटे इतने खतरनाक होते हैं कि कोई जानवर या चोर रात में घुसने की हिम्मत नहीं करेगा। साथ में जाली भी लगाएं। यह ‘डबल सुरक्षा’ है।.
“किसान साथियों, अगर आपके पास खेत नहीं है, तो निराश न हों! अब आप अपने घर के एक खाली कमरे (10×10) को ‘मिनी कश्मीर’ बना सकते हैं।
- [पूरी रिपोर्ट पढ़ें:] इनडोर केसर खेती: अब AC लगाकर घर के कमरे में उगाएं ₹3 लाख किलो वाला ‘लाल सोना’ | एरोपोनिक्स का पूरा सच (जानें कि कैसे हवा में केसर उगाकर लोग लाखों कमा रहे हैं!)“
17. दीमक का खतरा (Termite Attack)
चंदन की लकड़ी मीठी होती है, इसलिए दीमक (White Ants) इसे चट कर जाती है।
- पहचान: अगर पेड़ की पत्तियों पर पीलापन आए या तने पर मिट्टी की लकीर दिखे।
- इलाज: साल में दो बार (बारिश से पहले और बाद में) क्लोरोपायरीफॉस (Chlorpyriphos) दवाई पानी में मिलाकर जड़ों में डालें। नीम की खली (Neem Cake) का प्रयोग भी करें।
नोट: कीटनाशक दवाओं का उपयोग स्थानीय कृषि अधिकारी या लेबल निर्देशों के अनुसार ही करें। दवा का चयन और मात्रा क्षेत्र, मिट्टी व कीट की तीव्रता पर निर्भर करती है।
18. हार्वेस्टिंग: काटना नहीं, उखाड़ना है (Uprooting)
15 साल बाद पेड़ को कुल्हाड़ी से जमीन के ऊपर से नहीं काटा जाता।
- तरीका: पेड़ को जड़ सहित (JCB से) उखाड़ा जाता है।
- क्यों: क्योंकि चंदन की जड़ों (Roots) में सबसे ज्यादा तेल और खुशबू होती है। जड़ की लकड़ी तने से भी महंगी बिकती है। एक भी टुकड़ा मिट्टी में नहीं छोड़ना चाहिए।
19. कार्बन क्रेडिट: हवा से कमाई (Future Income)
- कॉन्सेप्ट: चंदन का पेड़ बहुत ज्यादा कार्बन सोखता है।
- कमाई: आप अपनी खेती को ‘कार्बन क्रेडिट’ के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। बड़ी कंपनियां (जो प्रदूषण फैलाती हैं) आपको पेड़ लगाने के बदले पैसा देंगी। यह लकड़ी बेचने से पहले की ‘बोनस कमाई’ है।

20. इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट: भारत की ‘विडंबना’ और बाजार का सच
यह डेटा आपके पाठकों की आंखें खोल देगा।
- इतिहास: एक समय था जब भारत दुनिया का 85% चंदन सप्लाई करता था।
- आज की स्थिति: सख्त कानूनों और तस्करी के कारण भारत का उत्पादन गिर गया। आज दुनिया का सबसे बड़ा चंदन निर्यातक ऑस्ट्रेलिया बन गया है।
- डिमांड (Demand):
- कन्नौज (यूपी): भारत की ‘इत्र नगरी’ कन्नौज में चंदन के तेल की इतनी डिमांड है कि वे ऑस्ट्रेलिया से लकड़ी मंगवा रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय: अमेरिका, फ्रांस और चीन में चंदन के तेल (Sandalwood Oil) का भाव ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति लीटर है।
- निष्कर्ष: अगर आप भारत में उच्च गुणवत्ता वाला चंदन उगाते हैं, तो आपको ग्राहक ढूंढने विदेश नहीं जाना पड़ेगा। दुनिया की बड़ी परफ्यूम कंपनियां (Chanel, Gucci) खुद आपके खेत तक आएंगी।
21. नफा-नुकसान का ‘महायोद्धा’ बैलेंस शीट (Profit & Loss – 1 Acre)
आइये, 1 एकड़ (300 पेड़) का 12 से 15 साल का पूरा हिसाब लगाते हैं। (नोट: यह एक रूढ़िवादी (Conservative) अनुमान है, यानी हमने खर्चा ज्यादा और कमाई कम जोड़ी है ताकि बाद में दुख न हो)
| विवरण (Particulars) | खर्च / अनुमान (₹) |
| A. कुल निवेश (12-15 साल का) | |
| पौधे (350 चंदन + 350 होस्ट) | ₹40,000 |
| ड्रिप इरिगेशन और गड्ढे खुदाई | ₹60,000 |
| खाद, दवाइयां और पानी (15 साल) | ₹2,00,000 |
| सुरक्षा (जाली + कुत्ते + गार्ड) | ₹5,00,000 (सबसे बड़ा खर्चा) |
| कुल लागत (Total Cost) | ₹8,00,000 (8 लाख) |
| B. उत्पादन (Production) | |
| जीवित पेड़ (अगर 50 मर भी गए) | 250 पेड़ |
| प्रति पेड़ हार्टवुड (Heartwood) | 15 किलो (औसत) |
| कुल लकड़ी (250 x 15) | 3,750 किलो |
| C. कमाई (Income) | |
| Scenario 1 (न्यूनतम भाव ₹6,000/kg) | ₹2,25,00,000 (2.25 करोड़) |
| Scenario 2 (भविष्य का भाव ₹10,000/kg) | ₹3,75,00,000 (3.75 करोड़) |
| D. शुद्ध मुनाफा (Net Profit) | ₹2 करोड़ से ऊपर |
सचिन भाई का विश्लेषण: ₹8 लाख लगाकर 15 साल बाद ₹2 करोड़ मिलना यानी पैसा 25 गुना हो गया। दुनिया की कोई बैंक एफडी (FD) या म्यूचुअल फंड इतना रिटर्न नहीं दे सकता। लेकिन शर्त यही है— सुरक्षा (Security)। अगर पेड़ चोरी हो गए, तो यह टेबल जीरो हो जाएगी।
22. किसानों के ‘असली’ अनुभव (Real Stories)
1. मोहन रेड्डी (तेलंगाना) – “धैर्य का फल”
“मैंने 2005 में अपनी बंजर जमीन पर 400 चंदन के पौधे लगाए थे। लोग हंसते थे कि यह पागल हो गया है। 2022 में मैंने वन विभाग की अनुमति से कटाई की। मुझे एक पेड़ से 22 किलो हार्टवुड मिला। मैंने कुल 3.5 करोड़ रुपये कमाए। आज उसी पैसे से मैंने शहर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया है।”
2. सुरेश पाटिल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) – “चोरों का दर्द”
“मेरे पेड़ 10 साल के हो गए थे, मोटाई भी अच्छी थी। एक रात बारिश हो रही थी, चोरों ने कुत्ते को जहर दिया और इलेक्ट्रिक कटर से 15 सबसे मोटे पेड़ काट ले गए। मेरी गलती यह थी कि मैंने CCTV नहीं लगाए थे और मैं खेत पर सोता नहीं था। सीख: चंदन लगाया है तो 24 घंटे सुरक्षा गार्ड या स्थानीय निगरानी व्यवस्था जरूरी है।”
“किसान भाइयों, नर्सरी वाले आपको ‘सफेद चंदन’ बोलकर ‘ऑस्ट्रेलियाई चंदन’ थमा देते हैं। क्या आप असली पौधे की पहचान जानते हैं? और होस्ट प्लांट कैसे लगाया जाता है?
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23. चंदन खेती के 5 तीखे सवाल (FAQs)
Q1: क्या मैं चंदन का पेड़ खुद काट सकता हूँ?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! चाहे पेड़ आपने लगाया हो, लेकिन उसे काटने का अधिकार सिर्फ वन विभाग (Forest Dept) को है। अगर आपने खुद काटा, तो लकड़ी जब्त हो जाएगी और जेल भी हो सकती है। आपको DFO को अर्जी देनी होगी, वो आकर कटवाएंगे।
Q2: 12 साल बहुत लंबा समय है, अगर बीच में पैसे चाहिए तो?
उत्तर: आप पेड़ को गिरवी रखकर बैंक से लोन ले सकते हैं। कई बैंक चंदन के पेड़ों का बीमा (Insurance) और वैल्यूएशन करके उस पर लोन देते हैं। इसके अलावा आप बीच में इंटरक्रॉपिंग (हल्दी/अदरक) से कमा सकते हैं।
Q3: सबसे अच्छी मिट्टी कौन सी है?
उत्तर: लाल मिट्टी (Red Soil) सबसे अच्छी है। लेकिन काली मिट्टी और पथरीली जमीन में भी यह हो जाता है। बस ध्यान रहे, मिट्टी में पानी नहीं रुकना चाहिए और pH मान 6.5 से 7.5 के बीच हो।
Q4: अगर पेड़ 8 साल में ही काट दें तो क्या होगा?
उत्तर: तो आपको सिवाय ‘जलाऊ लकड़ी’ के कुछ नहीं मिलेगा। चंदन में खुशबूदार ‘हार्टवुड’ 8वें साल के बाद ही बनना शुरू होता है। 12-15 साल से पहले काटना बेवकूफी है।
Q5: होस्ट प्लांट (Host Plant) मर गया तो क्या करें?
उत्तर: अगर होस्ट प्लांट (जैसे तुअर) मर गया है, तो तुरंत दूसरा पौधा लगाएं। चंदन बिना होस्ट के कुपोषित (Malnourished) हो जाएगा और बढ़ेगा नहीं।
24. निष्कर्ष:(Conclusion)
मेरे किसान साथियों और निवेशकों,
सफेद चंदन की खेती ‘जुआरियों’ (Gamblers) के लिए नहीं, बल्कि ‘धैर्यवान निवेशकों’ (Patient Investors) के लिए है। इस पूरी रिपोर्ट का निचोड़ (Summary) यह है:
- एसेट एलोकेशन (Asset Allocation): कभी भी अपनी पूरी जमीन पर चंदन न लगाएं। अगर आपके पास 5 एकड़ जमीन है, तो सिर्फ आधे एकड़ में या खेत की बाउंड्री (मेढ़) पर चंदन लगाएं। बाकी जमीन पर अनाज उगाएं ताकि घर का राशन आता रहे।
- सुरक्षा ही सब कुछ है: चंदन लगाना आसान है, उसे 15 साल तक ‘चोरों से बचाना’ असली चुनौती है। अगर आप खेत पर नहीं रह सकते या सुरक्षा गार्ड नहीं रख सकते, तो यह खेती न करें।
- विरासत: इसे अपनी ‘मंथली इनकम’ न समझें। यह आपके बच्चों के लिए एक “फिक्स्ड डिपॉजिट” (FD) है जो बैंक से 100 गुना ज्यादा रिटर्न देगा।
मेरी सलाह: लालच में न आएं। शुरुआत 50 पेड़ों से करें, सीखें और फिर बढ़ाएं।
“जिसने आज चंदन बोया, उसने अपने बुढ़ापे को सोने से तौल दिया!”
महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer)
Mahayoddha.in पर दी गई जानकारी वन कानूनों (Forest Acts), कृषि वैज्ञानिकों और बाजार के मौजूदा रुझानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल शैक्षिक जागरूकता (Educational Purpose Only) है। इस प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले निम्न जोखिमों को समझें:
- कानूनी विविधता (Legal Subjectivity): चंदन की कटाई, परिवहन और बिक्री राज्य वन अधिनियमों (State Forest Acts) के अधीन है। हर राज्य (जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, यूपी, राजस्थान) के नियम अलग-अलग हैं। पौधारोपण के बाद अपने स्थानीय ‘पटवारी’ या ‘वन क्षेत्राधिकारी’ (Range Officer) के पास इसकी लिखित प्रविष्टि (Entry) करवाना अनिवार्य है।
- सुरक्षा जोखिम (Security Risk): चंदन दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी है, इसलिए चोरी का जोखिम अत्यधिक है। पेड़ चोरी होने पर सरकार या वेबसाइट किसी भी मुआवजे के लिए जिम्मेदार नहीं होगी। सुरक्षा (CCTV/Fencing/Guard) की जिम्मेदारी पूरी तरह किसान की है।
- बाजार भाव (Market Volatility): आर्टिकल में बताया गया ‘3 करोड़’ का मुनाफा एक अनुमान (Estimation) है जो वर्तमान और भविष्य के संभावित भावों पर आधारित है। लकड़ी का भाव उसकी ‘हार्टवुड क्वालिटी’ और ‘तेल की मात्रा’ पर तय होता है, जो मिट्टी और जलवायु पर निर्भर करता है। हम किसी निश्चित आय की गारंटी नहीं देते।
- जैविक जोखिम: चंदन एक जीवित प्राणी है। दीमक, फफूंद या ‘स्पाइक डिजीज’ (Spike Disease) से पेड़ सूख सकता है।


