चिया सीड्स की खेती 2026: कम पानी में ₹15,000–₹20,000/क्विंटल कमाई | पूरी किसान गाइड

नमस्कार किसान साथियों! क्या आप भी गेहूं और सरसों की खेती करके थक गए हैं? खाद-पानी का खर्चा बढ़ रहा है और मंडी में भाव वही पुराना ₹2200-₹2500 मिल रहा है।

अगर मैं आपसे कहूं कि एक ऐसी फसल है:

  1. जिसमें गेहूं से आधा पानी लगता है।
  2. जिसे आवारा पशु (नीलगाय/सुअर) मुंह भी नहीं लगाते।
  3. और जिसका मंडी भाव ₹15,000 से ₹20,000 प्रति क्विंटल है।

नोट: चिया सीड्स पर सरकार का MSP लागू नहीं होता, इसलिए बाजार भाव समय, गुणवत्ता और मांग पर निर्भर करता है।

जी हाँ, उस फसल का नाम है— चिया सीड्स (Chia Seeds)। शहरों में लोग इसे ‘वजन घटाने’ (Weight Loss) के लिए सोने के भाव खरीद रहे हैं। इसे ‘सुपरफूड’ कहा जाता है। आइये जानते हैं कि कैसे आप अपनी गेहूं की परम्परागत खेती छोड़कर 110 दिन में पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर मुनाफे की संभावना।


Table of Contents

1. चिया सीड्स आखिर है क्या? (What is Chia Seed?)

सबसे पहले कन्फ्यूजन दूर करें। कई किसान इसे ‘सब्जा’ (तुलसी के बीज) समझ लेते हैं।

  • सब्जा: यह अलग है, इसका दाना काला और बड़ा होता है।
  • चिया: इसका वैज्ञानिक नाम Salvia Hispanica है। इसका दाना बहुत महीन (तिल जैसा), चितकबरा (सफेद-काला मिक्स) और चमकदार होता है।
  • खासियत: इसमें दूध से ज्यादा कैल्शियम और मछली से ज्यादा ओमेगा-3 होता है। इसलिए विदेशी लोग इसे खूब खाते हैं।

2. किसान इसे क्यों पसंद कर रहे हैं? (Why Farmers Love It?)

अगर आप इन 3 समस्याओं से परेशान हैं, तो चिया आपके लिए वरदान है:

  1. आवारा पशु: चिया के पौधे में एक विशेष प्रकार की गंध (Minty Smell) और तेल होता है। नीलगाय या बकरी इसे सूंघकर ही दूर भाग जाती है। आपको रातभर खेत में जागकर रखवाली नहीं करनी पड़ेगी।
  2. कम पानी: जहां गेहूं को 5-6 पानी चाहिए, चिया सिर्फ 2 से 3 पानी में पककर तैयार हो जाता है।
  3. लागत कम: इसमें यूरिया-डीएपी का खर्चा न के बराबर है।
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3. बुवाई का सही समय और मौसम (Time & Climate)

चिया मूल रूप से ‘रबी’ (सर्दी) की फसल है।

  • बुवाई का समय: अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के दूसरे सप्ताह तक (गेहूं के साथ)।
    • नोट: अगर ज्यादा पछेती (Late) बुवाई करेंगे, तो मार्च की गर्मी में दाना पिचक जाएगा।
  • जलवायु: इसे ठंडा मौसम पसंद है। फसल पकते समय मौसम साफ़ और सूखा होना चाहिए।

4. खेत की तैयारी और बीज दर (Soil Prep & Seed Rate)

चिया का बीज खसखस (Posta) जैसा बहुत बारीक होता है, इसलिए खेत की तैयारी बहुत सावधानी से करनी पड़ती है।

  • मिट्टी: भुरभुरी होनी चाहिए। खेत को रोटावेटर से समतल करा लें।
  • बीज दर: 1 एकड़ में मात्र 1 से 1.5 किलो बीज लगता है। (बीज की कीमत ₹1000 से ₹1500 प्रति किलो होती है)।
  • बीज उपचार: बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) से उपचारित करें ताकि जड़ गलन रोग न लगे।

5. बुवाई का ‘देसी जुगाड़’ (Sowing Method)

चिया का बीज इतना हल्का होता है कि हवा में उड़ जाता है। इसे मशीन से नहीं बो सकते।

  • तरीका: 1 किलो बीज में 5-10 किलो बालू (रेत) या सूखी मिट्टी मिला लें।
  • छिटकवां विधि: अब इसे पूरे खेत में एक समान छिड़क दें।
  • सावधानी: बीज छिड़कने के बाद ऊपर से पाटा (Planker) न चलाएं। बीज बहुत नाजुक होता है, अगर ज्यादा मिट्टी दब गई तो अंकुरण नहीं होगा। बस हल्का सा हाथ या झाड़ू फेर दें।
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6. खाद और पानी (Fertilizer & Irrigation)

  • खाद: खेत तैयार करते समय 2 ट्रॉली गोबर की खाद डालें। रसायनिक खाद में एक एकड़ में 1 बोरी SSP (सिंगल सुपर फॉस्फेट) काफी है। यूरिया की ज्यादा जरुरत नहीं होती, वरना पौधा सिर्फ लम्बाई में बढ़ेगा, दाना नहीं बनेगा।
  • पानी:
    1. पहला पानी: बुवाई के तुरंत बाद (हल्का पानी)।
    2. दूसरा पानी: 25-30 दिन बाद (निराई-गुड़ाई के समय)।
    3. तीसरा पानी: फूल आते समय (60-70 दिन पर)।
    • चेतावनी: फूल आने पर फव्वारा (Sprinkler) न चलाएं, वरना फूल झड़ जाएंगे। खुला पानी (Flood Irrigation) दें।

7. कटाई और गहाई (Harvesting – The Critical Step)

यहाँ किसान सबसे बड़ी गलती करता है।

  • पहचान: लगभग 100-110 दिन बाद (मार्च-अप्रैल में) जब पौधे पीले पड़ जाएं और बालियाँ (Spikes) भूरी हो जाएं, तब समझो फसल तैयार है।
  • रिस्क: अगर फसल ज्यादा सूख गई, तो दाने खेत में ही झड़ जाएंगे।
  • तरीका: सुबह के समय (जब थोड़ी ओस हो) दरांती से काटें। कटी हुई फसल को 2-3 दिन धूप में सुखाएं और फिर लकड़ी से पीटकर या थ्रेशर (जीरो नंबर जाली) से दाना अलग कर लें।

8. बीज का रंग: काला या सफेद? (Black vs White Seeds)

बाजार में दो तरह के चिया सीड्स मिलते हैं। किसान अक्सर कंफ्यूज रहते हैं।

  • काला चिया (Black Chia): यह सबसे कॉमन है। इसमें 80-90% दाने काले होते हैं। इसका उत्पादन ज्यादा होता है और यह सख्त जान होता है।
  • सफेद चिया (White Chia): यह थोड़ा दुर्लभ (Rare) है। इसका भाव काले वाले से ₹2000-₹3000 ज्यादा मिलता है क्योंकि यह दिखने में सुंदर होता है।
  • सलाह: अगर पहली बार कर रहे हैं, तो काले बीज से शुरुआत करें। यह रिस्क-फ्री है।
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9. ‘विरलीकरण’ (Thinning): पौधों की भीड़ कम करें

चिया का बीज हम छिड़क कर बोते हैं, इसलिए कई बार एक ही जगह 10-15 पौधे उग आते हैं।

  • नुकसान: अगर पौधे घने होंगे, तो तना पतला रह जाएगा और हवा चलने पर फसल गिर जाएगी (Lodging)।
  • उपाय: बुवाई के 20-25 दिन बाद खेत में जाएं और जहां पौधे घने हैं, वहां से कमजोर पौधों को उखाड़कर फेंक दें।
  • नियम: दो पौधों के बीच 6 इंच से 1 फीट की दूरी होनी चाहिए। तभी तना मजबूत बनेगा और बालियाँ (Flower Spikes) लंबी आएंगी।

10. खरपतवार नियंत्रण: रसायन या खुरपी? (Weed Management)

चिया का पौधा खुद एक चौड़ी पत्ती वाली फसल है।

  • चेतावनी: इसमें 2,4-D या कोई भी चौड़ी पत्ती वाला खरपतवार नाशक (Weedicide) गलती से भी न डालें। पूरी फसल जल जाएगी।
  • समाधान: इसमें सिर्फ हाथ से निराई-गुड़ाई (Manual Weeding) ही सबसे सुरक्षित तरीका है। पहली निराई 25 दिन पर और दूसरी 45 दिन पर करें। इससे जड़ों को हवा मिलेगी और पैदावार 20% बढ़ जाएगी।

11. सबसे बड़ा रोग: तना गलन (Stem Rot)

चिया में कीड़े कम लगते हैं, लेकिन फंगस (Fungus) इसका सबसे बड़ा दुश्मन है।

  • लक्षण: अगर तना जमीन के पास से काला पड़ने लगे या सफेद फफूंद दिखे।
  • कारण: खेत में ज्यादा नमी या पानी का जमाव।
  • इलाज: जैसे ही लक्षण दिखें, कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर जड़ों के पास स्प्रे करें (Drenching)।

नोट: फफूंदनाशक या किसी भी रसायन का उपयोग स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह, लेबल निर्देशों और फसल की स्थिति के अनुसार ही करें। दवा का चयन और मात्रा क्षेत्र व रोग की तीव्रता पर निर्भर करती है।

12. पाले (Frost) से सुरक्षा: फसल का ‘स्वेटर’

चिया के फूल जनवरी-फरवरी की कड़ाके की ठंड में आते हैं। अगर पाला (Frost) गिर गया, तो दाना नहीं बनेगा।

  • देसी जुगाड़: जिस रात पाला पड़ने की संभावना हो (आसमान साफ़ हो और हवा बंद हो), उस रात खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा में धुआं (Smoke) कर दें।
  • सिंचाई: खेत में हल्की सिंचाई कर दें। गीली मिट्टी का तापमान 2 डिग्री तक बढ़ जाता है, जो फसल को बचा लेता है।

13. थ्रेशिंग की सेटिंग (Threshing RPM)

फसल काटने के बाद दाना कैसे निकालें?

  • सावधानी: चिया का दाना बहुत नाजुक होता है। अगर थ्रेशर की स्पीड (RPM) ज्यादा होगी, तो दाना टूट जाएगा या तेल छोड़ देगा (Oily Seeds)।
  • सेटिंग: थ्रेशर का चक्कर (RPM) कम रखें और जाली जीरो नंबर (सरसों वाली) लगाएं। अगर फसल कम है, तो लकड़ी से पीटकर दाना निकालना सबसे बेस्ट है।
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14. ग्रेडिंग और सफाई: भाव बढ़ाने का मंत्र (Value Addition)

मंडी में कचरे वाले माल का भाव आधा मिलता है।

  • मशीन: चिया के बीजों को स्पाइरल सेपरेटर (Spiral Separator) या अच्छी ग्रेडिंग मशीन से साफ करवाएं।
  • फर्क: बिना सफाई वाला माल अगर ₹12,000 बिकेगा, तो मशीन क्लीन (Sortex Quality) माल ₹18,000 में बिकेगा। सफाई का खर्चा मुश्किल से ₹500 आएगा, लेकिन मुनाफा ₹6000 बढ़ जाएगा।

15. अंतरवर्तीय खेती (Intercropping): डबल मुनाफा

क्या चिया के साथ कुछ और उगा सकते हैं?

  • लहसुन/प्याज: चिया के खेत की मेंढ़ों (Boundaries) पर आप लहसुन या प्याज लगा सकते हैं।
  • गेंदा (Marigold): हर 10 लाइन के बाद 1 लाइन गेंदे के फूल की लगाएं। यह मित्र कीटों (Bees) को आकर्षित करेगा, जिससे चिया में परागण (Pollination) अच्छा होगा और पैदावार बढ़ेगी।

16. स्टोरेज: नमी का दुश्मन (Storage Logic)

चिया सीड्स में तेल होता है। अगर आपने गीला दाना स्टोर कर दिया, तो उसमें ‘रेंसिडिटी’ (Rancidity) आ जाएगी, यानी तेल की बदबू आने लगेगी।

  • नियम: स्टोर करने से पहले दाने को अच्छी तरह धूप में सुखाएं। नमी (Moisture) 8% से कम होनी चाहिए।
  • बैग: जूट की बोरी की जगह अंदर प्लास्टिक लगी बोरी (HDPE Bags) का इस्तेमाल करें ताकि हवा न लगे।

17. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का सच (The Agreement Trap)

कई कंपनियां किसान को यह कहकर बीज देती हैं कि “हम ₹25,000 में वापस खरीदेंगे”।

  • सावधानी: एग्रीमेंट साइन करने से पहले कंपनी का पिछला रिकॉर्ड चेक करें। अक्सर कंपनियां फसल तैयार होने पर ‘क्वालिटी खराब है’ बोलकर माल रिजेक्ट कर देती हैं।
  • सलाह: कॉन्ट्रैक्ट के भरोसे न रहें, हमेशा खुली मंडी (Neemuch/Mandsaur) का विकल्प तैयार रखें।

“किसान साथियों, खेत को खाली छोड़ना मतलब अपना नुकसान करना। रबी और खरीफ के बीच में जो 3 महीने (मार्च-मई) मिलते हैं, वो ‘बोनस कमाई’ के हैं।

18. बारिश का डर: ‘जेल’ बनने से कैसे रोकें? (The Gel Factor)

यह चिया की सबसे बड़ी कमजोरी है।

  • विज्ञान: चिया के बीज पानी के संपर्क में आते ही अपने वजन से 10 गुना पानी सोख लेते हैं और उनके चारों तरफ ‘जेल’ (Gel) या लसलसा पदार्थ बन जाता है।
  • खतरा: अगर मार्च में फसल कटाई के समय बारिश हो गई, तो खड़ी फसल के बीज बालियों के अंदर ही ‘फूल’ जाएंगे और चिपक जाएंगे। फिर वो दाना मशीन से भी नहीं निकलेगा। पूरी फसल बर्बाद!
  • उपाय: मौसम विभाग (Weather App) पर नजर रखें। अगर बारिश की चेतावनी है, तो फसल को थोड़ा हरा (80% पका) रहते ही काट लें और उसे किसी शेड (छांव) में सुरक्षित रख लें। रिस्क बिल्कुल न लें।
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19. आर्गेनिक सर्टिफिकेट: भाव दोगुना करने का राज (Organic Premium)

चिया सीड्स को लोग धोकर नहीं खाते, इसे सीधे पानी में भिगोकर कच्चा खाया जाता है।

  • मार्केट: इसलिए अमीर ग्राहक (Health Conscious Buyers) वही चिया खरीदते हैं जिस पर “Organic Certified” लिखा हो।
  • कमाई: साधारण चिया अगर ₹15,000 क्विंटल है, तो ‘आर्गेनिक सर्टिफाइड’ चिया ₹25,000 से ₹30,000 तक बिकता है।
  • प्रो टिप: अगर आप 3 साल से खेत में केमिकल नहीं डाल रहे हैं, तो NPOP (भारत सरकार) का आर्गेनिक सर्टिफिकेट बनवा लें। यह कागज का टुकड़ा आपकी कमाई डबल कर देगा।

20. फसल चक्र: एक ही खेत में बार-बार न लगाएं (Crop Rotation)

लालच बुरी बला है। कई किसान अच्छा मुनाफा देखकर अगले साल उसी खेत में फिर चिया लगा देते हैं।

  • नुकसान: चिया जमीन से कुछ खास पोषक तत्व (Micronutrients) बहुत तेजी से खींचता है। लगातार लगाने से जमीन कमजोर हो जाती है और ‘उकठा रोग’ (Wilt) लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • नियम: जिस खेत में इस साल चिया लगाया है, अगले साल वहां दलहन (चना, मूंग, उड़द) लगाएं। दलहन जमीन में नाइट्रोजन वापस भर देगा। चिया को हर साल नए खेत में शिफ्ट करें।

21. पत्तियों का पीला पड़ना: जिंक या पानी? (Yellowing Diagnosis)

फसल के बीच में अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें, तो किसान घबराकर यूरिया डाल देते हैं। यह गलत है।

  • कारण 1: अगर निचले पत्ते पीले हैं, तो इसका मतलब पानी ज्यादा हो गया है। सिंचाई तुरंत रोक दें और खेत से पानी निकालें।
  • कारण 2: अगर ऊपर की नई पत्तियां पीली हैं, तो यह जिंक (Zinc) या सल्फर की कमी है।
  • इलाज: चिया तिलहनी फसल है, इसे सल्फर पसंद है। 5 किलो बेंटोनाइट सल्फर (Bentonite Sulphur) प्रति एकड़ डालने से पीलापन दूर होगा और दाने में तेल की मात्रा बढ़ेगी।

22. भूसे का उपयोग: कचरा नहीं, खाद है (Residue Management)

चिया की फसल कटने के बाद जो डंठल और भूसा बचता है, उसे जानवर नहीं खाते (क्योंकि इसमें गंध होती है)।

  • गलती: किसान इसे खेत में जला देते हैं।
  • फायदा: चिया के डंठल में बहुत सारा कार्बन होता है। इसे रोटावेटर चलाकर मिट्टी में ही मिला दें। यह ‘मल्चिंग’ का काम करता है और अगली फसल के लिए बेहतरीन हरी खाद (Green Manure) बन जाता है। इसे जलाने की गलती न करें।
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23. इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट: क्यों पागल है दुनिया चिया के पीछे?

यह जानना जरुरी है कि आपका माल आखिर खा कौन रहा है?

  • ग्लोबल डिमांड: अमेरिका, यूरोप और जापान में लोग अब ब्रेड-बिस्कुट से ज्यादा ‘हेल्थ फूड’ खा रहे हैं। भारत से चिया सीड्स का भारी मात्रा में निर्यात (Export) हो रहा है।
  • भारत का हब: मध्य प्रदेश का नीमच (Neemuch) और मंदसौर जिला चिया सीड्स का ‘ग्लोबल हब’ बन चुका है। यहाँ की क्वालिटी पूरी दुनिया में बेस्ट मानी जाती है।
  • भविष्य: आने वाले 5 साल तक इसकी डिमांड बढ़ने ही वाली है, क्योंकि शाकाहारी लोगों के लिए यह ओमेगा-3 (Omega-3) का एकमात्र सस्ता स्रोत है।

24. नफा-नुकसान का बैलेंस शीट (Profit & Loss – 1 Acre)

आइये, दूध का दूध और पानी का पानी करते हैं। हम चिया की तुलना गेहूं (Wheat) से करेंगे, ताकि फर्क साफ़ दिखे।

विवरण (Particulars)गेहूं (Wheat)चिया सीड्स (Chia)
A. लागत (Cost)
बीज₹1,200₹1,500
खाद (DAP/Urea)₹4,000₹1,500 (कम चाहिए)
पानी (सिंचाई)5-6 पानी2-3 पानी
निराई-गुड़ाई (लेबर)कम (खरपतवार नाशक से काम चलता है)₹5,000 (हाथ से करनी पड़ती है)
कुल खर्च₹12,000 – ₹15,000₹15,000 – ₹18,000
B. कमाई (Income)
उत्पादन (Yield)20 क्विंटल5-6 क्विंटल
भाव (Rate)₹2,275 (MSP)₹15,000 (औसत)
कुल बिक्री₹45,500₹75,000 – ₹90,000
C. शुद्ध मुनाफा (Net Profit)₹30,000₹60,000 से ₹70,000

विश्लेषण: चिया में खर्चा गेहूं के बराबर ही है, लेकिन मुनाफा दोगुना से तीन गुना है। सबसे बड़ी बचत पानी और बाड़बंदी (Fencing) में है, क्योंकि इसे जानवर नहीं खाते।


25. किसानों के ‘असली’ अनुभव (Real Case Studies)

1. रमेश पाटीदार (नीमच, MP) – “सक्सेस स्टोरी”

“मैं पहले हर साल गेहूं बोता था और नीलगाय से परेशान रहता था। रात-रात भर खेत पर सोना पड़ता था। 2023 में मैंने 2 बीघा में चिया लगाया। नीलगाय ने खेत की तरफ देखा भी नहीं। मुझे मंडी में ₹18,500 का भाव मिला। अब मैं गेहूं सिर्फ घर खाने लायक उगाता हूँ, बाकी 10 एकड़ में चिया, कलौंजी और अश्वगंधा करता हूँ।”

2. सुखविंदर सिंह (सिरसा, हरियाणा) – “एक गलती और सब खत्म”

“मैंने यूट्यूब देखकर चिया लगाया था। फसल बहुत अच्छी थी। लेकिन मैंने खरपतवार मारने के लिए वही दवा (2,4-D) डाल दी जो मैं गेहूं में डालता था। अगले दिन पूरा खेत जल गया। सीख: चिया में कभी भी खरपतवार नाशक (Weedicide) का स्प्रे न करें, हाथ से ही कचरा निकालें।”

“किसान भाइयों, चिया का बीज मिट्टी में मिलाते समय क्या सावधानी रखें? और पकी हुई फसल कैसी दिखती है?

👇 नीचे दिए गए वीडियो में मैंने अपने खेत का पूरा टूर कराया है। एक बार जरुर देखें ताकि कोई गलती न हो! 👇


26. चिया खेती के 5 तीखे सवाल (FAQs)

Q1: क्या चिया सीड्स को मशीन से काट सकते हैं (Reaper/Combine)? उत्तर: नहीं, रिस्क न लें। कंबाइन हार्वेस्टर से बहुत सारा बारीक दाना भूसे में उड़ जाता है। इसे मजदूरों से दरांती से कटवाएं और तिरपाल पर झाड़ें। तभी पूरा माल हाथ आएगा।

Q2: इसे बेचने के लिए कहाँ जाना पड़ेगा? उत्तर: सबसे बड़ी मंडी नीमच (MP) है। लेकिन अब दिल्ली की खारी बावली और हर राज्य की बड़ी अनाज मंडियों में भी व्यापारी इसे खरीदने लगे हैं। आप IndiaMART पर भी अपनी लिस्टिंग डाल सकते हैं।

Q3: क्या इसे गर्मियों (Zaid) में उगा सकते हैं? उत्तर: बिल्कुल नहीं! चिया रबी (सर्दी) की फसल है। इसे पकने के लिए ठंडक चाहिए। अगर मार्च के बाद तापमान 35 डिग्री से ऊपर गया, तो दाना सिकुड़ जाएगा और तेल नहीं बनेगा।

Q4: एक एकड़ में कितना बीज डालना सही है? उत्तर: सिर्फ 1 से 1.5 किलो। किसान सोचते हैं कि बीज बहुत बारीक है तो ज्यादा डाल दें। यह गलती न करें। अगर आपने 3 किलो बीज डाल दिया, तो पौधे इतने घने हो जाएंगे कि एक भी बाली (Flower) सही से नहीं आएगी।

Q5: क्या चिया, तुलसी (Basil) ही है? उत्तर: नहीं भाई! दोनों अलग हैं। तुलसी का बीज काला और गोल होता है (Falooda वाला)। चिया का बीज चितकबरा (Mottled) और अंडाकार होता है। दोनों का भाव और मार्केट अलग है। मिक्स न करें।

27. अंतिम निष्कर्ष: (Final Conclusion )

मेरे किसान भाइयों,

खेती घाटे का सौदा नहीं है, बस हमारा तरीका पुराना हो गया है। जब दुनिया बदल रही है, तो हम आज भी वही गेहूं-धान क्यों बो रहे हैं जिसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कौड़ियों का है?

चिया सीड्स की खेती का निचोड़ (Summary) यह है:

  1. समस्या का हल: अगर आप आवारा पशुओं (नीलगाय/सुअर) से परेशान होकर खेती छोड़ने का सोच रहे हैं, तो चिया आपके लिए संजीवनी है। इसे कोई जानवर नहीं खाता।
  2. पानी की बचत: जहाँ गेहूं को 5 पानी चाहिए, वहां यह 2 पानी में पक जाता है। गिरते जल स्तर वाले इलाकों के लिए यह भविष्य की फसल है।
  3. स्मार्ट शुरुआत: मैं यह नहीं कहता कि आप अपनी पूरी 10 एकड़ जमीन में चिया लगा दें। शुरुआत सिर्फ 1 एकड़ या 2 बीघा से करें। रिस्क कम लें, सीखें और जब मंडी का गणित समझ आ जाए, तब रकबा बढ़ाएं।

याद रखिये, “जो किसान रिस्क लेने से डरता है, वो कभी भी ‘सेठ’ नहीं बन सकता।” इस बार रबी सीजन में खेत के एक कोने में ‘सुपरफूड’ जरुर उगाएं।


महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer)

Mahayoddha.in पर दी गई जानकारी कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों के अनुभवों और मंडी के मौजूदा रुझानों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल शैक्षिक जागरूकता (Educational Purpose Only) है। चिया सीड्स की खेती में निवेश करने से पहले निम्नलिखित जोखिमों को गंभीरता से समझें:

  1. बाजार मूल्य जोखिम (No MSP Guarantee): गेहूं और धान की तरह चिया सीड्स पर सरकार कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं देती। इसका भाव पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मांग और सप्लाई पर निर्भर है। यह कभी ₹20,000 प्रति क्विंटल बिक सकता है, तो कभी गिरकर ₹8,000 भी हो सकता है। किसान को बाजार के उतार-चढ़ाव के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
  2. मौसम की संवेदनशीलता (Weather Risk): यह फसल बारिश के प्रति बहुत संवेदनशील है। अगर कटाई के समय (मार्च माह में) ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश हो गई, तो बीजों में लसलसापन (Gel Formation) आ जाता है और पूरी फसल खेत में ही बर्बाद हो सकती है।
  3. खरपतवार प्रबंधन (Weed Management): चिया चौड़ी पत्ती वाली फसल है, इसलिए इसमें 2,4-D या किसी भी आम खरपतवार नाशक (Herbicide) का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसमें सिर्फ हाथ से निराई-गुड़ाई (Manual Weeding) ही एकमात्र विकल्प है, जिससे लेबर का खर्च बढ़ सकता है।
  4. बीज अंकुरण: चिया का बीज बहुत बारीक और नाजुक होता है। अगर बुवाई के समय बीज ज्यादा गहराई में दब गया या नमी कम रही, तो अंकुरण (Germination) फेल हो सकता है। हम अनुशंसा करते हैं कि बुवाई से पहले बीज की क्वालिटी जरुर चेक करें।

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