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किसान भाइयों, क्या आपके खेत तक जाने के लिए अच्छा रास्ता है? या आज भी बारिश के दिनों में कीचड़ की वजह से आपको अपनी बैलगाड़ी या ट्रैक्टर सड़क पर ही खड़ा करना पड़ता है? खेतों के रास्तों का विवाद और खराब रास्ता हम किसानों की सबसे बड़ी सिरदर्दी है।
लेकिन अब चिंता छोड़िये! महाराष्ट्र सरकार ने 8 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक शासन निर्णय (GR) निकाला है। इस नए जीआर ने ‘मुख्यमंत्री बळीराजा शेत-पाणंद रस्ते योजना’ की पूरी तस्वीर बदल दी है। अब आपके खेत तक पक्का रास्ता बनाना न सिर्फ आसान होगा, अधिकांश मामलों में किसानों को अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ता।
चलिए, सचिन भाई की इस ग्राउंड रिपोर्ट में समझते हैं कि इस नई योजना का लाभ आपको कैसे मिलेगा।
1. क्या है 8 जनवरी 2026 का नया GR? (New Update)
सरकार ने देखा कि पुराने नियमों की वजह से शेत-रस्ते और पाणंद रास्तों के काम सालों तक अटके रहते थे। कभी मोजणी (Survey) के पैसे नहीं होते थे, तो कभी पड़ोसियों के विवाद की वजह से काम रुक जाता था।
नए जीआर की 3 सबसे बड़ी बातें:
- रॉयल्टी मुक्त मुरुम/मिट्टी: अब रास्तों के लिए लगने वाली मिट्टी या मुरुम निकालने के लिए सरकार को कोई रॉयल्टी (Royalty) नहीं देनी होगी।
- मुफ्त पुलिस सुरक्षा: अगर रास्ता बनाते समय कोई विवाद होता है, तो सरकार मुफ्त में पुलिस बंदोबस्त देगी।
- मुफ्त मोजणी (Free Survey): सबसे बड़ी खबर! अब रास्तों की मोजणी के लिए किसानों को भू-अभिलेख विभाग की फीस नहीं भरनी होगी। यह पूरी तरह फ्री होगा।
2. हिंगोली, परभणी और नांदेड़ के किसानों के लिए क्यों है यह खास?
हमारे हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिले की काली भारी मिट्टी बारिश में इतनी चिपचिपी हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल होता है। सचिन भाई की ज़मीनी बात: “मैंने खुद देखा है कि वसमत, औंढा और पूर्णा जैसे इलाकों में रास्तों के विवाद की वजह से सगे भाई एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। इस नई योजना का फायदा उठाकर हम आपस के झगड़े खत्म कर सकते हैं और अपने खेत तक ट्रैक्टर ले जा सकते हैं।”

3. योजना का मुख्य उद्देश्य (Purpose)
- किसानों को बारहमासी पक्का रास्ता देना।
- खेत से मंडी (Market) तक माल ले जाना आसान बनाना।
- बारिश के मौसम में फसलों का नुकसान बचाना।
4. आवेदन के लिए पात्रता और शर्तें (Eligibility)
- यह योजना मुख्य रूप से उन रास्तों के लिए है जो सरकारी रिकॉर्ड (नक्शा) पर दर्ज हैं।
- अगर रास्ता रिकॉर्ड पर नहीं है, तो ‘लोकसहभाग’ (जनभागीदारी) के माध्यम से उसे बनाया जा सकता है।
- गांव के कम से कम 5-10 किसानों का समूह मिलकर आवेदन करे तो काम जल्दी होता है।
5. आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)
अब प्रक्रिया बहुत सरल कर दी गई है:
- ग्राम पंचायत का प्रस्ताव: सबसे पहले अपनी ग्राम पंचायत में जाकर एक प्रस्ताव (Resolution) पास करवाएं।
- तहसीलदार को आवेदन: ग्राम पंचायत के पत्र के साथ तहसीलदार या तालुका कृषि अधिकारी को आवेदन दें।
- मुफ्त मोजणी की मांग: आवेदन में स्पष्ट लिखें कि 8 जनवरी 2026 के GR के अनुसार हमें मुफ्त मोजणी (Free Survey) चाहिए।
- स्थल निरीक्षण: इसके बाद तहसील कार्यालय से टीम आकर रास्ते का निरीक्षण करेगी।
6. सचिन भाई की ‘खास सलाह’ (Expert Tips for Farmers)
मेरे किसान भाइयों, रास्ता बनाना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, इसमें हमारी समझदारी भी जरूरी है:
- आपसी विवाद सुलझाएं: “रास्ता बनाने में सबसे बड़ी बाधा पड़ोसी किसान होता है। मेरी सलाह है कि कोर्ट-कचहरी के बजाय आपस में बैठकर बात सुलझाएं। रास्ता बनेगा तो आपकी और आपके पड़ोसी की जमीन की कीमत भी बढ़ेगी।”
- मुरुम का चुनाव: रास्ता बनाते समय नीचे बड़े पत्थर और ऊपर बारीक मुरुम का इस्तेमाल करें, ताकि बारिश में रास्ता धंसे नहीं।
- ड्रेनेज का ध्यान: रास्ते के दोनों तरफ छोटी नालियां जरूर बनाएं, वरना पानी रास्ते पर जमा होकर उसे खराब कर देगा।
- GR की कॉपी पास रखें: जब आप दफ्तर जाएं, तो 8 जनवरी 2026 के GR की एक कॉपी साथ रखें ताकि कोई अधिकारी आपको गुमराह न कर सके।
7. मुख्यमंत्री बळीराजा शेत-पाणंद रस्ते योजना 2026 – एक नज़र में पूरी जानकारी
| विषय | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री बळीराजा शेत-पाणंद रस्ते योजना |
| नवीन GR तारीख | 8 जनवरी 2026 |
| लागू राज्य | महाराष्ट्र |
| लाभार्थी | रिकॉर्ड वाले शेत-रस्ते / पाणंद रास्तों से जुड़े किसान |
| मोजणी (Survey) शुल्क | पूरी तरह मुफ्त |
| मुरुम / मिट्टी | रॉयल्टी मुक्त (GR अनुसार) |
| विवाद की स्थिति में | तहसीलदार द्वारा पुलिस बंदोबस्त |
| रास्ते की चौड़ाई | 15 से 20 फीट (नक्शा अनुसार) |
| निर्माण प्रकार | मिट्टी, मुरुम, खड़ीकरण (Metalling) |
| मजदूरी कार्य | मनरेगा (MGNREGA) से संभव |
| नियंत्रण अधिकारी | जिला कलेक्टर (DM) |
| आवेदन स्थान | ग्राम पंचायत / तहसील कार्यालय |
| किसानों को खर्च | सामान्यतः शून्य या बहुत कम |
| मुख्य लाभ | साल-भर चलने वाला पक्का खेत रास्ता |
8. ‘रॉयल्टी मुक्त’ मुरुम का असली मतलब क्या है?
पहले अगर किसान को रास्ता बनाने के लिए अपने ही खेत से या सरकारी खदान से मुरुम उठाना होता था, तो उसे सरकार को ‘रॉयल्टी’ देनी पड़ती थी, जो बहुत महंगी पड़ती थी। सचिन भाई की अपडेट: “8 जनवरी 2026 के नए नियम के अनुसार, अब इस योजना के लिए लगने वाले मुरुम और मिट्टी पर 100% रॉयल्टी माफ़ है। इससे रास्ते बनाने का खर्च 30% से 40% तक कम हो जाएगा।”
9. मोजणी (Survey) के लिए आमतौर पर मोजणी के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए
अक्सर देखा गया है कि मोजणी के लिए किसान को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और हज़ारों रुपये की फीस भरनी पड़ती थी। सचिन भाई की सलाह: “नए GR के तहत भू-अभिलेख विभाग को आदेश दिया गया है कि शेत-रास्तों के लिए ‘अग्रक्रम’ (Priority) दी जाए और इसकी मोजणी पूरी तरह मुफ्त की जाए। अगर कोई आपसे पैसे मांगे, तो उसे 8 जनवरी 2026 के GR का हवाला दें।”

10. विवाद होने पर ‘पुलिस बंदोबस्त’ का नया नियम
हिंगोली और नांदेड़ में कई रास्तों के काम सिर्फ इसलिए रुके हैं क्योंकि पड़ोसी किसान रास्ता खुदाई नहीं करने देते। समाधान: “अब अगर रास्ता रिकॉर्ड पर है और कोई उसे रोकता है, तो तहसीलदार के माध्यम से आपको मुफ्त पुलिस प्रोटेक्शन मिलेगा। “अब अवैध बाधाओं के कारण रास्तों के काम रुकने की संभावना कम होगी।”
11. मनरेगा (MGNREGA) और इस योजना का मेल
यह योजना सिर्फ मशीनों से नहीं, बल्कि मजदूरों से भी काम करवाती है। फायदा: “रास्ते की साइड की नालियां और मिट्टी डालने का काम मनरेगा के तहत किया जा सकता है। इससे गांव के लोगों को रोजगार भी मिलेगा और रास्ता भी पक्का बनेगा।
12. रास्तों की चौड़ाई कितनी होनी चाहिए?
तकनीकी जानकारी: “आमतौर पर पाणंद रास्ते 15 से 20 फीट चौड़े होने चाहिए ताकि दो ट्रैक्टर आसानी से पास हो सकें। नया GR कहता है कि रास्तों की चौड़ाई नक्शे के अनुसार ही रखी जाए, कोई भी किसान उस पर अतिक्रमण (Encroachment) नहीं कर पाएगा।

13. साल भर चलने वाले ‘बारहमासी’ रास्ते
सरकार का लक्ष्य सिर्फ मिट्टी डालना नहीं है। सिर्फ मिट्टी डालने से रास्ता अगले साल फिर खराब हो जाएगा। इस योजना में अब ‘खड़ीकरण’ (Metalling) पर जोर दिया जा रहा है। पक्का रास्ता बनाने के लिए जिला नियोजन समिति (DPDC) से अलग से फंड की मांग करें।
14. गांव के ‘नक्शा’ (Map) की अहमियत
कई बार हमें पता ही नहीं होता कि हमारे खेत का सरकारी रास्ता कहाँ से है। टिप: सबसे पहले अपने गांव का ‘नक्शा’ और ‘कमी-जास्ती पत्रक’ देखें। अगर नक्शे पर रास्ता है, तो सरकार उसे बनवाकर देने के लिए बाध्य है। हिंगोली के तहसील कार्यालय में आप डिजिटल नक्शा देख सकते हैं।

15. फल उत्पादन और रास्तों का रिश्ता
अगर आप केला, संतरा या हल्दी की खेती करते हैं (जैसा कि हिंगोली-नांदेड़ में बहुत होता है), तो अच्छा रास्ता आपके लिए पैसे बचाने का जरिया है। सचिन भाई की बात: “खराब रास्ते की वजह से व्यापारियों की गाड़ियां खेत तक नहीं आतीं और हमें सिर पर माल ढोना पड़ता है। अच्छा रास्ता होगा तो व्यापारी खुद खेत पर आएगा और आपको सही दाम मिलेगा।
16. कलेक्टर और तहसीलदार के विशेष अधिकार
नए GR ने कलेक्टर (DM) को इस योजना का मुख्य कंट्रोलर बनाया है। अपडेट: “अगर आपके इलाके में रास्ते का काम लटका हुआ है, तो आप जिला कलेक्टर के पास ‘जनता दरबार’ में शिकायत कर सकते हैं। अब तहसीलदार को हर महीने रास्तों की प्रोग्रेस रिपोर्ट सरकार को भेजनी होगी।
खेत का रास्ता अच्छा होने पर आप आधुनिक खेती कर सकते हैं। यह भी पढ़ें: [प्राकृतिक खेती 2026: खर्च जीरो, मुनाफा होगा हीरो]
17. भविष्य की खेती और ड्रोन सर्वे
2026 में सरकार अब रास्तों के लिए ड्रोन सर्वे का इस्तेमाल कर रही है। नई तकनीक: “मोजणी के काम में देरी न हो, इसके लिए कई जगहों पर ड्रोन से रास्तों की मैपिंग की जा रही है। इससे विवाद वाली जगह का सटीक पता चलता है और काम जल्दी शुरू होता है।
18. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या प्राइवेट रास्ते के लिए भी सरकारी मदद मिलेगी? उत्तर: नहीं, यह योजना मुख्य रूप से पाणंद रास्तों और रिकॉर्ड वाले शेत-रास्तों के लिए है। प्राइवेट रास्ते के लिए आपको पड़ोसियों की सहमति लेनी होगी।
Q2: मोजणी के लिए कितना समय लगता है? उत्तर: नए नियमों के अनुसार आवेदन के 30 दिनों के भीतर मोजणी की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
Q3: क्या मुरुम के लिए पैसे देने होंगे? उत्तर: नहीं, अगर मुरुम सरकारी जमीन या किसी प्रोजेक्ट से निकल रहा है, तो इस योजना के लिए वह पूरी तरह मुफ्त है।
किसान भाइयों, अक्सर सरकारी कागजी कार्यवाही को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए नीचे दिए गए वीडियो को पूरा देखें, जिसमें 8 जनवरी 2026 के नए शासन निर्णय (GR) को विस्तार से समझाया गया है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि खेत रास्ते का नक्शा कैसे निकाला जाता है और तहसीलदार को आवेदन देने का सही तरीका क्या है
19. Conclusion (निष्कर्ष)
खेत का रास्ता हमारी समृद्धि का रास्ता है। अगर रास्ता अच्छा होगा, तो खाद-बीज समय पर पहुंचेगा और आपकी उपज भी सही दाम पर मंडी पहुंचेगी। सरकार ने 2026 के इस नए जीआर से हमारे हाथ मजबूत किए हैं, अब बारी हमारी है।
अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे अपने गांव के WhatsApp ग्रुप में जरूर शेयर करें ताकि हर किसान को उसके हक के रास्ते की जानकारी मिले।
अस्वीकरण (Disclaimer): Mahayoddha.in एक निजी वेबसाइट है। यहाँ दी गई जानकारी 8 जनवरी 2026 के सरकारी जीआर पर आधारित है। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या तहसील कार्यालय से पुष्टि अवश्य करें।
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