Dragon Fruit Farming 2026 : कमलम की खेती से कमाएं लाखों ! जानें बुवाई देखरेख और कमाई की पूरी जानकारी

नमस्कार किसान भाइयों! खेती में अब वो जमाना लद गया जब हम सिर्फ पारंपरिक फसलों के भरोसे रहते थे. आज का दौर Smart Farming का है. क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा फल भी हो सकता है जो कैक्टस जैसा दिखता है, लेकिन उसकी कीमत मार्केट में सोने जैसी है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं Dragon Fruit यानी कमलम की.

आजकल हर कोई अपनी सेहत को लेकर जागरूक है और ड्रैगन फ्रूट एक ‘Superfood’ माना जाता है. यही कारण है कि इसकी डिमांड आसमान छू रही है. अगर आप अपनी कम उपजाऊ जमीन से भी लाखों का मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए एक ‘गाइड’ साबित होगा. इसे पूरा पढ़ें, क्योंकि अधूरी जानकारी अक्सर नुकसान का कारण बनती है.


1. ड्रैगन फ्रूट ही क्यों? (Benefits of Dragon Fruit Farming)

बहुत से किसान भाई पूछते हैं, “सचिन भाई, हम ड्रैगन फ्रूट ही क्यों लगाएं?” इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं:

  • Long Term Income: एक बार पौधा लगाओ और 20 से 25 साल तक फल पाओ. यह एक बार का निवेश है और जिंदगी भर की कमाई.
  • Low Water Requirement: अगर आपके इलाके में पानी कम है, तो भी टेंशन मत लीजिए. यह कैक्टस प्रजाति का है, इसे बहुत कम पानी लगता है.
  • Zero Pest Attack: इसमें कीड़े और बीमारियां लगने का खतरा न के बराबर है, जिससे कीटनाशकों (Pesticides) का खर्चा बच जाता है.

एक सच्चा अनुभव: जब हम परभणी पहुंचे (Real Success Story)

“दोस्तों, खेती सिर्फ इंटरनेट पर पढ़कर नहीं होती, इसे आँखों से देखना पड़ता है। हाल ही में, हमारे हिंगोली जिले के कुछ प्रगतिशील किसान भाइयों के साथ मुझे पड़ोस के जिले परभणी (Parbhani) जाने का मौका मिला।

वहां हमारी मुलाकात ड्रैगन फ्रूट के सफल किसान श्री सतीश राव जी से हुई। सतीश जी ने अपने खेत में हमें प्रैक्टिकल जानकारी दी। उन्होंने एक बहुत पते की बात कही शुरुआत में जब मैंने यह कैक्टस लगाया तो लोग हंसते थे, लेकिन आज जब उत्पादन निकल रहा है, तो वही लोग सलाह लेने आते हैं।’

सतीश राव जी के खेत को देखकर हमें यकीन हो गया कि अगर मराठवाड़ा की सूखी जमीन में वो सोना उगा सकते हैं, तो हम और आप क्यों नहीं?

Dragon Fruit Farming 2026 Mahayoddha

2. ड्रैगन फ्रूट की खेती: एक नजर में (Quick Summary Table)

विवरण (Details)पूरी जानकारी (Information)
उपयुक्त मिट्टी (Soil)रेतीली दोमट मिट्टी (Sandy Loam) – pH 5.5 to 7.0
पौधा लगाने का समयजून-जुलाई या फरवरी-मार्च
प्रति एकड़ खंभों की संख्या450 से 500 कंक्रीट के खंभे
प्रति खंभा पौधों की संख्या4 पौधे (खंभे के चारों तरफ)
सिंचाई पद्धति (Irrigation)ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation) सबसे बेस्ट
पहली उपज (First Harvest)पौधा लगाने के 18 से 24 महीने बाद
फलों का सीजनजून से लेकर नवंबर/दिसंबर तक
अनुमानित लागत (Investment)₹ 4 लाख से ₹ 5 लाख (प्रति एकड़)
अनुमानित आय (Income)₹ 8 लाख से ₹ 10 लाख (सालाना)
पौधे की उम्र (Life Span)20 से 25 साल तक
Dragon Fruit Farming 2026 Mahayoddha

3. जलवायु और मिट्टी (Climate and Soil Requirements)

ड्रैगन फ्रूट वैसे तो किसी भी मिट्टी में उग सकता है, लेकिन अगर आप ‘बंपर पैदावार’ चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • Soil: रेतीली दोमट मिट्टी (Sandy Loam Soil) इसके लिए सबसे बेस्ट है. मिट्टी का pH मान 5.5 से 7 के बीच होना चाहिए.
  • Temperature: यह 20°C से 40°C का तापमान आराम से झेल लेता है. ज्यादा ठंड या बहुत ज्यादा पाला (Frost) इसके लिए थोड़ा नुकसानदेह हो सकता है.
  • Drainage: आपके खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए. जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होना बहुत जरूरी है.

4. खंभों की तकनीक: पिलर और रिंग मेथड (Support System)

ड्रैगन फ्रूट एक बेल की तरह ऊपर चढ़ता है, इसलिए इसे सहारा देना पड़ता है. इसके लिए Pillar and Ring Method सबसे ज्यादा पॉपुलर है.

  • Pillars: 7 फीट लंबे कंक्रीट के खंभे बनवाएं. इन्हें 2 फीट जमीन के अंदर और 5 फीट ऊपर रखें.
  • Spacing: दो खंभों के बीच 8 से 10 फीट की दूरी रखें.
  • Rings: खंभे के टॉप पर एक सीमेंट या लोहे की रिंग लगाएं ताकि पौधे की शाखाएं छतरी की तरह नीचे लटक सकें. इसी छतरी पर सबसे ज्यादा फल लगते हैं.

5. किस्मों का चुनाव (Top Varieties of Dragon Fruit)

मार्केट में मुख्य रूप से 3 तरह के ड्रैगन फ्रूट मिलते हैं: (Dragon Fruit Farming 2026)

  1. White Flesh (सफेद गूदा): ऊपर से गुलाबी, अंदर से सफेद. इसकी डिमांड मार्केट में हमेशा रहती है.
  2. Red Flesh (लाल गूदा): ऊपर से गुलाबी, अंदर से गहरा लाल. यह ज्यादा मीठा होता है और इसकी कीमत भी ज्यादा मिलती है.
  3. Yellow Shell (पीला ड्रैगन फ्रूट): यह बहुत दुर्लभ और महंगा होता है.
किस्मों का चुनाव (Top Varieties of Dragon Fruit)

6. सिंचाई और खाद का मैनेजमेंट (Irrigation & Fertilizer)

  • Irrigation: ड्रैगन फ्रूट के लिए Drip Irrigation (टपक सिंचाई) सबसे बेस्ट है. इसे रोज पानी देने की जरूरत नहीं होती. गर्मियों में हफ्ते में दो बार और सर्दियों में 10 दिन में एक बार पानी काफी है.
  • Organic Manure: साल में दो बार (जून और दिसंबर) हर खंभे के नीचे 10 – 15किलो गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट जरूर डालें. इससे पौधों की ग्रोथ रॉकेट की तरह होती है.

7. हार्वेस्टिंग और कमाई का असली गणित (Profit Calculation)

अब आते हैं उस बात पर जिसके लिए आप इतनी मेहनत करेंगे—पैसा!

  • Investment: एक एकड़ में खंभे, पौधे और ड्रिप लगाने का खर्च लगभग 4 से 5लाख रुपये आता है.
  • Production: दूसरे साल से फल आना शुरू हो जाते हैं. तीसरे साल से एक एकड़ से लगभग 5 से 8 टन उत्पादन मिल सकता है.
  • Profit: अगर मार्केट में 100 रुपये किलो का भाव भी मिले, तो आप साल भर में 6 से 10 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं. सारा खर्चा काटकर भी आप हर साल लाखों के मुनाफे में रहेंगे.

नोट: खेती में मुनाफा आपके क्षेत्र की जलवायु, बाजार की मांग और आपके प्रबंधन पर निर्भर करता है। निवेश करने से पहले स्थानीय बाजार का सर्वे जरूर करें।


8. ड्रैगन फ्रूट की खेती में आने वाली चुनौतियाँ (Challenges)

सचिन भाई होने के नाते मैं आपको सिर्फ फायदे नहीं बताऊंगा, कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं:

  • शुरुआती लागत: इसमें पहले साल पैसा ज्यादा लगता है, इसलिए बजट बनाकर चलें.
  • धूप से बचाव: बहुत ज्यादा गर्मी (45°C+) होने पर सनबर्न का खतरा रहता है, इसके लिए पौधों पर शेड नेट का इस्तेमाल किया जा सकता है.

9. पौधों का चयन: कटिंग या टिश्यू कल्चर? (Selection of Plants)

ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करते समय किसान अक्सर इस बात में कंफ्यूज रहते हैं कि वो नर्सरी से Cuttings (कलम) लें या Tissue Culture वाले पौधे?

  • Cuttings: ये सस्ते होते हैं और जल्दी फल देने लगते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि कटिंग हमेशा उसी पौधे की लें जिसकी उम्र कम से कम 3-4 साल हो और जो पहले से अच्छे फल दे रहा हो.
  • Tissue Culture: ये पौधे थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन ये पूरी तरह से ‘Virus Free’ होते हैं और इनकी ग्रोथ एक जैसी होती है.
  • सचिन भाई की सलाह: अगर बजट कम है, तो किसी सफल किसान के खेत से अच्छी क्वालिटी की कटिंग लेना सबसे बेस्ट है.

10. हार्वेस्टिंग और ग्रेडिंग (Harvesting, Grading & Packing)

फल तैयार होने के बाद उसे सही तरीके से बाजार तक पहुँचाना भी एक कला है.

  1. सही समय: जब फल का रंग पूरी तरह से गुलाबी या लाल हो जाए और उसके ऊपर की ‘स्केल्स’ (पंख) मुड़ने लगें, तब समझें कि फल तोड़ने के लिए तैयार है.
  2. ग्रेडिंग: फलों को उनके वजन के हिसाब से अलग करें.
    1. A Grade: 400 ग्राम से ऊपर (इसका रेट सबसे ज्यादा मिलता है).
    2. B Grade: 250 से 400 ग्राम.
    3. C Grade: 250 ग्राम से कम.
  3. पैकिंग: फलों को फोम नेट (Foam Net) में लपेटकर प्लास्टिक या कार्डबोर्ड के बॉक्स में रखें. इससे फल ताजे रहते हैं और लंबी दूरी के मार्केट (जैसे दिल्ली, मुंबई) तक सुरक्षित पहुँचते हैं.
हार्वेस्टिंग और ग्रेडिंग (Harvesting, Grading & Packing)

11. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ – Human Style)

Q1: भाई, इसके पौधे कहाँ से मिलेंगे? Ans: आप सरकारी नर्सरी या किसी भरोसेमंद प्राइवेट नर्सरी से पौधे ले सकते हैं. हमेशा ‘Tissue Culture’ या अच्छी ‘Cuttings’ वाले पौधे ही चुनें.

Q2: क्या हम इसे इंटरक्रॉपिंग (Intercropping) के साथ कर सकते हैं? Ans: बिल्कुल! खंभों के बीच जो खाली जगह होती है, वहां आप शुरुआत में सब्जियां या दलहन उगाकर एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं.

Q3: क्या इसमें कोई सब्सिडी मिलती है? Ans: हाँ, महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार ‘मिडल मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर’ (MIDH) के तहत अच्छी सब्सिडी देती है. अपने जिले के कृषि अधिकारी से जरूर मिलें.

किसान भाइयों, क्या आप अपने क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने की सोच रहे हैं? अपनी राय या सवाल नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ-साथ अगर आप महाराष्ट्र की अन्य योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं, तो यह भी पढ़ें: [नमो शेतकरी योजना की 8वीं किस्त कब आएगी? यहाँ देखें तारीख]

दोस्तों, पढ़ने से ज्यादा समझ में तब आता है जब हम अपनी आंखों से देखते हैं। नीचे दिए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे किसान इस खेती से लाखों कमा रहे हैं। बुवाई से लेकर हार्वेस्टिंग तक का पूरा लाइव डेमो यहाँ देखें:”

12. निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, खेती अब सिर्फ गुजारा करने का तरीका नहीं, बल्कि एक ‘मुनाफे वाला बिजनेस’ बन चुका है. ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है. अगर आप पारंपरिक फसलों के चक्र से बाहर निकलकर कुछ नया करने की हिम्मत जुटाते हैं, तो आने वाला कल आपका है. याद रखिए, एक ‘महायोद्धा’ किसान वही है जो समय के साथ अपनी तकनीक बदलता है.

खेती-बाड़ी, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की ऐसी ही सही जानकारी के लिए Mahayoddha.in को रोज विजिट करें. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो, तो इसे अपने किसान दोस्तों और व्हाट्सएप ग्रुप में जरूर शेयर करें!

किसान भाइयों, मैं हिंगोली में देखता हूं कि सोयाबीन और कपास में अब वो बात नहीं रही। इसलिए मेरा सुझाव है कि अपने खेत के एक छोटे से हिस्से (आधा एकड़) में ड्रैगन फ्रूट लगाकर प्रयोग जरूर करें। यह आपकी किस्मत बदल सकता है।”


अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. खेती में निवेश करने से पहले कृपया अपने स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या सफल किसानों से सलाह अवश्य लें. Mahayoddha.in किसी भी वित्तीय लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.


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