नमस्कार किसान साथियों और उद्यमियों! मछली पालन तो सब करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी “पानी का बिच्छू” यानी केकड़ा (Crab) पालने के बारे में सोचा है?
शायद नहीं, क्योंकि हमें लगता है कि केकड़ा तो कीचड़ में होता है। लेकिन रुकिए! आज मैं आपको एक ऐसी तकनीक बताने जा रहा हूँ जिसे सिंगापुर और थाईलैंड के लोग इस्तेमाल करके करोड़पति बन रहे हैं।
इस तकनीक का नाम है— “वर्टिकल क्रैब बॉक्स सिस्टम” (Vertical Crab Box System)। इसमें न तालाब चाहिए, न कीचड़। सिर्फ प्लास्टिक के डिब्बों (Boxes) में केकड़ा पाला जाता है और यह ₹1,200 से ₹1,500 प्रति किलो बिकता है। इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘जिंदा डॉलर’ (Live Dollar) कहा जाता है।
आइये, इस हाई-टेक बिजनेस का पूरा ऑपरेशन समझते हैं।
1. मड क्रैब (Mud Crab) ही क्यों? (Species Selection)
दुनिया में केकड़े की हजारों प्रजातियां हैं, लेकिन पालने के लिए सिर्फ एक ही ‘राजा’ है:
- प्रजाति का नाम: Scylla Serrata (Green Mud Crab)।
- पहचान: यह आकार में बहुत बड़ा (1 किलो से 2 किलो तक) होता है। इसका कवच (Shell) हरा-काला होता है।
- खासियत: यह पानी से बाहर भी 3-4 दिन तक जिंदा रह सकता है। यही बात इसे एक्सपोर्ट के लिए नंबर 1 बनाती है, क्योंकि इसे जिंदा हवाई जहाज से विदेश भेजा जा सकता है।
2. पुरानी विधि vs नई ‘बॉक्स विधि’ (The Technology Shift)
- पुरानी विधि (तालाब): पहले लोग तालाब में केकड़े छोड़ देते थे। दिक्कत यह थी कि केकड़े ‘नरभक्षी’ (Cannibal) होते हैं। बड़ा केकड़ा छोटे को खा जाता है। 50% माल आपस में लड़कर मर जाता था।
- नई विधि (बॉक्स सिस्टम): इसे “अपार्टमेंट सिस्टम” भी कहते हैं।
- इसमें प्लास्टिक के छोटे-छोटे बॉक्स (Shoe Box जैसे) होते हैं जो एक के ऊपर एक रैक में रखे जाते हैं।
- नियम: “एक बॉक्स, एक केकड़ा”।
- फायदा: जब केकड़ा अकेला रहेगा, तो न किसी से लड़ेगा, न मरेगा। सर्वाइवल रेट 90% से ज्यादा होता है।

3. बिजनेस मॉडल: ‘फैटनिंग’ (Fattening) का खेल
इस बिजनेस में पैसा ‘बच्चा बड़ा करने’ (Grow Out) में नहीं है, बल्कि ‘मोटा करने’ (Fattening) में है। इसे ध्यान से समझें:
- वाटर क्रैब (Water Crab): जब केकड़ा अपना खोल (Shell) बदलता है, तो उसका मांस बहुत कम और पानी ज्यादा होता है। यह बाजार में सस्ता (₹300-₹400 किलो) मिलता है।
- मीट क्रैब (Meat Crab): हम सस्ते ‘वाटर क्रैब’ खरीदेंगे, उन्हें बॉक्स में रखेंगे, 45 दिन तक अच्छा खाना खिलाएंगे और जब वो मांस से भर जाएंगे, तो उन्हें ₹1500 किलो में बेचेंगे।
- जादू: सिर्फ 45 दिन में पैसा 3 गुना!
4. बॉक्स सेटअप और पानी (Setup & Water Quality)
आपको तालाब नहीं खोदना है, बस एक शेड (Shade) चाहिए।
- बॉक्स: बाजार में ‘Crab House’ या ‘Crab Boxes’ मिलते हैं। ये री-साइकिल प्लास्टिक के होते हैं।
- पानी: केकड़ा खारे पानी (Brackish Water) का जीव है।
- Salinity (खारापन): 15 से 25 PPT (Parts Per Thousand) सबसे बेस्ट है।
- अगर आपके पास समुद्र का पानी नहीं है, तो आप मीठे पानी में कच्चा नमक (Raw Salt) मिलाकर भी खारा पानी बना सकते हैं।
- सिस्टम: पानी हर बॉक्स में पाइप से जाएगा और गंदा पानी बाहर निकलेगा (RAS System)। पानी में ऑक्सीजन और सफाई का ध्यान रखना जरुरी है।
यह प्रक्रिया केवल सामान्य जानकारी के लिए है। वास्तविक अनुपात और तरीका स्थानीय जल गुणवत्ता और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
5. खाना क्या खिलाएं? (Feeding Management)
केकड़ा शुद्ध मांसाहारी (Non-Veg) है और बहुत पेटू होता है।
- भोजन: इसे “Trash Fish” (सस्ती छोटी मछलियां), घोंघा (Snail), सीपी (Clam) या चिकन का वेस्ट खिलाया जाता है।
- टाइमिंग: केकड़ा “रात्रिचर” (Nocturnal) है। यह रात में एक्टिव होता है। इसलिए खाना हमेशा शाम के समय दें।
- मात्रा: केकड़े के वजन का 5% से 8% खाना रोज देना है। अगर केकड़ा 500 ग्राम का है, तो उसे 25-30 ग्राम मछली दें।

6. ‘मोल्टिंग’ (Molting): सबसे नाजुक समय
केकड़ा अपनी जिंदगी में बार-बार अपना पुराना खोल उतारता है, इसे ‘केंचुली उतारना’ (Molting) कहते हैं।
- खतरा: जब केकड़ा खोल उतारता है, तो उसका शरीर मक्खन जैसा नरम होता है। उसे ‘Soft Shell Crab’ कहते हैं।
- मौका: वैसे तो सॉफ्ट शेल क्रैब बहुत नाजुक होता है, लेकिन फाइव स्टार होटलों में इसकी डिश (जिसे बिना छीले खाया जा सके) सबसे महंगी बिकती है। आप इसे इसी स्टेज पर फ्रोजन करके भी बेच सकते हैं।
7. हार्वेस्टिंग और मार्केटिंग (The Profit Stage)
40 से 50 दिन बाद केकड़े की जांच करें।
- चेक कैसे करें: केकड़े के पेट (नीचे का हिस्सा) को दबाकर देखें। अगर वो पत्थर जैसा कड़क है, तो समझो वो ‘फुल मीट’ हो गया है।
- बिक्री:
- एक्सपोर्ट एजेंट: चेन्नई, मुंबई और कोलकाता में एजेंट बैठे हैं जो इसे सिंगापुर, मलेशिया और चीन भेजते हैं।
- लग्जरी होटल: ताज, ओबेरॉय जैसे होटलों में शेफ को सीधे सप्लाई करें।
- भाव: 1 किलो से ऊपर के केकड़े (XL Size) का भाव सबसे ज्यादा (₹1200+) मिलता है।
8. नर और मादा की पहचान: असली पैसा कहाँ है? (Sex Determination)
केकड़ा खरीदने से पहले आपको पता होना चाहिए कि वह ‘लड़का’ है या ‘लड़की’।
- क्यों जरुरी: मादा केकड़ा (Female) जिसमें अंडे होते हैं, उसका भाव नर (Male) से दोगुना होता है।
- पहचान का तरीका: केकड़े को उल्टा करें और उसके पेट (Abdomen) पर बनी लकीर देखें।
- नर (Male): पेट पर उल्टे ‘V’ आकार (नुकीला) का निशान होता है।
- मादा (Female): पेट पर उल्टे ‘U’ आकार (चौड़ा और गोल) का निशान होता है।
- टिप: हमेशा मादा केकड़े को ज्यादा तवज्जो दें, इसे एक्सपोर्ट मार्केट में “Gold” माना जाता है।

9. ‘बेरी’ केकड़ा: ऑरेंज गोल्ड (Berry Crab – The Highest Value)
यह इस बिजनेस का सबसे महंगा प्रोडक्ट है।
- क्या है: जब मादा केकड़े के पेट के नीचे अंडे आ जाते हैं, तो वे नारंगी (Orange) रंग के दिखाई देते हैं। इसे ‘बेरी’ (Berry) कहते हैं।
- मार्केट: सिंगापुर और चीन में लोग इसे पागलपन की हद तक पसंद करते हैं।
- जुगाड़: अगर आपको वाटर क्रैब में कोई मादा मिले, तो उसे बॉक्स में स्पेशल डाइट (जैसे शार्क मछली का लीवर या स्क्विड) दें। 20 दिन में वह ‘बेरी’ बन जाएगी और भाव ₹2,000/kg तक जा सकता है।
10. पानी का पीएच और अमोनिया: साइलेंट किलर (Water Chemistry)
बॉक्स सिस्टम में पानी कम होता है, इसलिए गंदगी जल्दी होती है।
- अमोनिया (Ammonia): केकड़ा बहुत ज्यादा गंदगी (Poop) करता है। अगर अमोनिया 1 ppm से ऊपर गया, तो केकड़ा सुस्त हो जाएगा और मर जाएगा।
- pH मान: पानी का pH 7.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। अगर pH कम हुआ (एसिडिक), तो केकड़े का कवच (Shell) गलने लगेगा।
- उपाय: हर हफ्ते पानी चेक करने के लिए pH किट और अमोनिया किट (जो मछली पालन में यूज होती है) पास रखें।
11. बॉक्स की सफाई: ‘फ्लशिंग’ तकनीक (Cleaning Protocol)
केकड़े को गंदे घर में रहना पसंद नहीं है।
- समस्या: खाने के टुकड़े बॉक्स के कोनों में फंस जाते हैं और सड़ने लगते हैं।
- तरीका: बॉक्स सिस्टम में नीचे एक पाइप लगा होता है। दिन में एक बार वॉल्व खोलकर “Flush” करें ताकि नीचे जमा गंदगी बाहर निकल जाए।
- नियम: सफाई हमेशा खाना देने से पहले करें, खाना देने के बाद नहीं।

12. केकड़े को बांधने की कला (Tying Skill)
यह पॉइंट सुरक्षा (Safety) के लिए है। मड क्रैब का डंक (Claw) इतना ताकतवर होता है कि वह आपकी उंगली काट सकता है।
- तकनीक: हार्वेस्टिंग के समय केकड़े को नंगे हाथ न पकड़ें।
- जुगाड़: एक मोटी रस्सी या जूट की सुतली लें। केकड़े के दोनों डंकों को उसके शरीर से सटाकर ऐसे बांधें कि वह उन्हें खोल न सके। इसे “Trussing” कहते हैं। बिना बंधा केकड़ा कोई व्यापारी नहीं खरीदेगा।
13. ‘कैनिबालिज्म’ से बचाव: दांत तोड़ना (De-Clawing Strategy)
अगर आप बॉक्स की जगह टैंक या तालाब में रख रहे हैं, तो यह पॉइंट जरुरी है।
- स्वभाव: केकड़ा अपनी ही प्रजाति को खा जाता है (Cannibalism)।
- उपाय: स्टॉकिंग से पहले केकड़े के डंक (Claw) की नोक (Tip) को थोड़ा सा काट दिया जाता है। इससे वह खाना तो खा सकता है, लेकिन दूसरे केकड़े को मार नहीं सकता। (बॉक्स सिस्टम में इसकी जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि हर केकड़ा अलग रहता है)।
14. ग्रेडिंग सिस्टम: साइज का पैसा (Grading Standards)
मंडी में भाव “अंदाजे” से नहीं, “ग्रेड” से मिलता है। अपने पाठकों को यह चार्ट दें:
- XXL (Jumbo): 1 किलो से ऊपर (सबसे महंगा)।
- XL: 800 ग्राम से 1 किलो।
- Large (L): 600 से 800 ग्राम।
- Medium (M): 400 से 600 ग्राम।
- Small: 400 ग्राम से कम (इसे बेचने की गलती न करें, इसे वापस बॉक्स में डालकर बड़ा करें)।
15. बीमारी: शेल रॉट (Shell Rot Disease)
केकड़े को ज्यादा बीमारी नहीं लगती, लेकिन एक बीमारी खतरनाक है।
- लक्षण: केकड़े के कवच पर जंग जैसे धब्बे (Rusty Spots) या छेद दिखाई देना।
- कारण: पानी में बैक्टीरिया।
- इलाज: बीमार केकड़े को बॉक्स से निकालें और फॉर्मेलिन (Formalin) मिले पानी में 10 मिनट डुबोकर (Dip treatment) वापस रखें। बॉक्स को अच्छे से धोएं।
नोट: किसी भी रासायनिक उपचार का उपयोग स्थानीय मत्स्य अधिकारी या उत्पाद लेबल के निर्देशों के अनुसार ही करें। मात्रा, समय और विधि क्षेत्र व स्थिति पर निर्भर करती है।
16. पैकिंग और ट्रांसपोर्ट: बिना पानी के सफर (Live Transport)
केकड़ा पानी के बिना 3-4 दिन जिंदा रह सकता है, लेकिन उसे नमी (Moisture) चाहिए।
- पैकिंग: थर्मोकोल के बॉक्स में गीली जूट की बोरी या लकड़ी का बुरादा (Sawdust) बिछाएं।
- तापमान: बॉक्स के अंदर का तापमान 20°C से 25°C होना चाहिए। इसके लिए बॉक्स में बर्फ की एक बोतल रख दें। ठंडक में केकड़ा ‘कोमा’ (Hibernation) में चला जाता है और कम ऑक्सीजन में भी जिंदा रहता है।
17. MPEDA और सब्सिडी (Government Support)
भारत सरकार इस बिजनेस को बहुत प्रमोट कर रही है।
- संस्था: MPEDA (Marine Products Export Development Authority)।
- रजिस्ट्रेशन: अगर आप एक्सपोर्ट करना चाहते हैं, तो अपना फार्म MPEDA में रजिस्टर करवाएं।
- फायदा: वे आपको हेचरी (Hatchery) बनाने या बॉक्स सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी और टेक्निकल ट्रेनिंग फ्री में देते हैं।
18. लेग चेक: ‘लंगड़ा’ केकड़ा न खरीदें (Physical Quality Check)
जब आप सप्लायर से ‘वाटर क्रैब’ (बीज) खरीदते हैं, तो अक्सर वो आपको टूटे हुए पैरों वाला माल दे देते हैं।
- नुकसान: अगर केकड़े का एक भी पैर या डंक (Claw) टूटा हुआ है, तो वो अपना सारा खाना और एनर्जी उस पैर को ‘वापस उगाने’ (Regeneration) में लगा देगा, मोटा होने में नहीं।
- नियम: सिर्फ वही केकड़ा खरीदें जिसके दसों पैर (8 पैर + 2 डंक) सलामत हों। लंगड़ा केकड़ा आपका प्रॉफिट खा जाएगा।

19. चंद्रमा का कनेक्शन: पूर्णिमा और अमावस्या (The Lunar Effect)
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। केकड़े का सीधा संबंध चांद (Moon) से है।
- फैक्ट: पूर्णिमा (Full Moon) और अमावस्या (New Moon) के आसपास केकड़े सबसे ज्यादा ‘मोल्टिंग’ (केंचुली उतारना) करते हैं।
- रणनीति: इन दिनों में हार्वेस्टिंग (बिक्री) न करें, क्योंकि मोल्टिंग के बाद केकड़ा नरम (Soft) हो जाता है और वजन कम हो जाता है। हार्वेस्टिंग हमेशा चांद के दिनों के बीच में करें जब केकड़ा सबसे सख्त (Hard) हो।
20. सप्लीमेंट्स: केकड़े को ‘विटामिन’ चाहिए (Feed Additives)
बॉक्स में केकड़ा कैद है, उसे नेचुरल खाना नहीं मिल रहा। सिर्फ मछली खिलाने से काम नहीं चलेगा।
- जुगाड़: बाजार से सस्ती मछली (Trash Fish) को पीसते समय उसमें विटामिन सी (Vitamin C) और मल्टी-विटामिन पाउडर (जो मछली/झींगा वाला आता है) मिलाएं।
- फायदा: इससे केकड़े की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ती है और उसका रंग (Colour) चमकदार हरा बनता है, जो एक्सपोर्ट में अच्छा भाव दिलाता है।
नोट: सप्लीमेंट का चयन और मात्रा विशेषज्ञ या फीड निर्माता की सलाह से ही करें।
21. डेटा मैनेजमेंट: हर बॉक्स का ‘आधार कार्ड’ (Box Labeling)
जब आपके पास 1000 बॉक्स होंगे, तो आप भूल जाएंगे कि किस बॉक्स में केकड़ा कब डाला था।
- सिस्टम: हर बॉक्स के बाहर एक छोटा व्हाइट बोर्ड मार्कर से लिखें:
- Date: किस तारीख को डाला?
- Weight: डालते समय वजन कितना था?
- फायदा: 30 दिन बाद वजन चेक करें। अगर वजन नहीं बढ़ा, तो समझो वो केकड़ा बीमार है या खाना नहीं खा रहा। उसे तुरंत हटा दें। बिना रिकॉर्ड के यह बिजनेस नहीं हो सकता।
[बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग:] टैंक में मछली पालने का पूरा सेटअप और खर्चा जानें।
22. पानी का तापमान: हीटर या चिलर? (Temperature Shock)
केकड़ा 25°C से 30°C में खुश रहता है।
- सर्दी में: अगर तापमान 20°C से नीचे गया, तो केकड़ा खाना छोड़ देगा। बॉक्स रूम को चारों तरफ से प्लास्टिक से पैक कर दें (Greenhouse effect)।
- गर्मी में: अगर तापमान 32°C से ऊपर गया, तो पानी में ऑक्सीजन कम हो जाएगी। शेड के ऊपर स्प्रिंकलर (पानी का छिड़काव) चलाएं। तापमान स्थिर रखना जरुरी है।
23. ‘प्री-शिपमेंट’ धुलाई: बदबू का इलाज (Purging Strategy)
एक्सपोर्ट करने से 2 दिन पहले खाना देना बंद कर दें।
- कारण: अगर पेट भरा हुआ केकड़ा पैक किया, तो वो बॉक्स में गंदगी (Poop) कर देगा। 2 दिन में वो बॉक्स के अंदर ही मर जाएगा क्योंकि अमोनिया बन जाएगा।
- प्रोसेस: इसे ‘Purging’ कहते हैं। केकड़े को साफ पानी में रखें ताकि उसका पेट खाली हो जाए। इससे वो ट्रांसपोर्ट में लंबा टिकता है।
24. लीगल चेक: छोटे केकड़े की मनाही (Minimum Legal Size)
सरकार ने पर्यावरण बचाने के लिए नियम बनाए हैं।
- कानून: 500 ग्राम से छोटे जंगली केकड़े को पकड़ना या बेचना कई राज्यों में गैर-कानूनी है (ताकि वे बड़े होकर अंडे दे सकें)।
- सावधानी: सप्लायर से माल लेते समय ध्यान दें कि आप ‘अंडर-साइज’ (Undersized) माल न खरीदें, वरना वन विभाग (Forest Dept) या फिशरीज वाले चालान काट सकते हैं। हमेशा 500 ग्राम+ का माल ही पालें।
केकड़ा पालन का बिजनेस सिर्फ ‘पालने’ का नहीं, बल्कि ‘बेचने’ (Selling) का है। अगर आपने 1 किलो का केकड़ा तैयार कर लिया, लेकिन उसे लोकल मछली बाजार में ₹200 में बेचा, तो आप घाटे में रहेंगे। इसे ‘सही जगह’ बेचना आना चाहिए।

25. इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट: ‘जिंदा डॉलर’ का ग्लोबल रूट (The Export Map)
भारत से केकड़ा दुनिया के उन देशों में जाता है जहाँ लोग सीफूड के दीवाने हैं।
- सबसे बड़े खरीदार: चीन (China), सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड।
- चाइनीज न्यू ईयर: जब फरवरी में चीनी नया साल आता है, तो केकड़े की डिमांड इतनी बढ़ जाती है कि भाव ₹2,000 प्रति किलो तक पहुंच जाता है।
- हवाई जहाज का सफर: चूंकि मड क्रैब पानी के बिना जिंदा रहता है, इसे ‘थर्मोकोल बॉक्स’ में पैक करके सीधे चेन्नई या कोलकाता एयरपोर्ट से फ्लाइट में लोड किया जाता है और 5 घंटे में यह सिंगापुर की प्लेट पर होता है। एक्सपोर्ट केवल वैध लाइसेंस, MPEDA पंजीकरण और अधिकृत एजेंट के माध्यम से ही संभव है।
- भारत की स्थिति: आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय एक्सपोर्ट में सबसे आगे हैं। अगर आप इंटरनल (घरेलू) बाजार में बेचना चाहते हैं, तो दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर के 5-स्टार होटल्स आपके टारगेट होने चाहिए।
26. नफा-नुकसान का बैलेंस शीट (Profit & Loss – Export Quality)
आइये, 500 बॉक्स के एक ‘मिनी स्टार्टअप’ का हिसाब लगाते हैं। (नोट: यह एक्सपोर्ट क्वालिटी केकड़े का हिसाब है)
| विवरण (Particulars) | खर्च / अनुमान (₹) |
| A. वन टाइम सेटअप (One Time Cost) | |
| 500 बॉक्स + रैक + फिल्ट्रेशन सिस्टम (RAS) | ₹1,50,000 |
| ऑक्सीजन मोटर और पाइपिंग | ₹20,000 |
| कुल सेटअप लागत | ₹1,70,000 |
| B. रनिंग कॉस्ट (45 दिन का एक चक्र) | |
| 500 वाटर क्रैब (बीज) @ ₹350/kg (औसत 500g) | ₹87,500 |
| फीड (मछली/घोंघा) | ₹15,000 |
| बिजली और लेबर | ₹10,000 |
| कुल रनिंग खर्च | ₹1,12,500 |
| C. कमाई (Income) | |
| मृत्यु दर (Mortality 10%) = 450 केकड़े बचे | |
| अंतिम वजन (बढ़कर 700-800 ग्राम) | 350 kg (कुल माल) |
| बिक्री (एक्सपोर्ट भाव ₹1,200/kg) | ₹4,20,000 |
| D. शुद्ध मुनाफा (Net Profit) | (4,20,000 – 1,12,500) = ₹3,07,500 |
विश्लेषण: सिर्फ 45 दिन में ₹1.12 लाख लगाकर ₹3 लाख कमाना! यह 200% का रिटर्न है। लेकिन शर्त यही है— माल एक्सपोर्ट क्वालिटी (जिंदा और कड़क) होना चाहिए। नोट: यह आंकड़े संभावित बाजार परिस्थितियों पर आधारित अनुमान हैं। वास्तविक लाभ स्थान, समय, गुणवत्ता और बाजार मांग पर निर्भर करता है।
27. किसानों के ‘असली’ अनुभव (4 Real Case Studies)
1. प्रदीप रेड्डी (नेल्लोर, आंध्र प्रदेश) – “बीमारी से बचने का रास्ता”
“मैं 10 साल से ‘वेनामी झींगा’ (Shrimp) कर रहा था। 2023 में ‘व्हाइट स्पॉट’ बीमारी आई और मेरा पूरा तालाब 2 दिन में साफ हो गया। 20 लाख का नुकसान हुआ। फिर मैंने शेड में ‘क्रैब बॉक्स’ लगाए। इसमें अगर एक केकड़ा मरता है, तो बीमारी फैलती नहीं है। आज मैं झींगे से कम कमाता हूँ, लेकिन मेरी कमाई ‘सुरक्षित’ (Safe) है। अब मुझे रात को नींद अच्छी आती है।”
2. विक्रम मल्होत्रा (पुणे, अर्बन फार्मर) – “दुकान में खेती”
“मैं एक IT कंपनी में जॉब करता हूँ। मेरे पास खेत नहीं था। मैंने अपने घर के बेसमेंट (Basement) में 200 बॉक्स लगाए। मैं रविवार को मछली बाजार से कचरा मछली (Trash Fish) लाता हूँ और फ्रीज कर लेता हूँ। रोज शाम को 1 घंटा देता हूँ। पिछले महीने मैंने पुणे के एक सीफूड रेस्टोरेंट को 150 किलो केकड़ा बेचा। मेरी सैलरी से ज्यादा मेरा ‘साइड बिजनेस’ दे रहा है।”
3. अब्दुल करीम (कोच्चि, केरल) – “एक गलती की सजा”
“मैंने जोश में आकर 1000 बॉक्स लगा लिए। लेकिन मैंने ‘पानी की क्वालिटी’ पर ध्यान नहीं दिया। मेरे फिल्टर काम नहीं कर रहे थे और पानी में अमोनिया बढ़ गया। 3 दिन के अंदर मेरे 600 केकड़े मर गए। सीख: बॉक्स सिस्टम में ‘फिल्ट्रेशन’ (RAS) ही भगवान है। अगर पानी साफ नहीं रख सकते, तो यह काम मत करो।”
4. सुष्मिता सेन (सुंदरबन, पश्चिम बंगाल) – “महिला शक्ति”
“हम पहले जंगल से छोटे केकड़े पकड़कर सस्ते में बेच देते थे। फिर हमने उन्हें पालना शुरू किया। अब मैं सिर्फ ‘मादा केकड़ा’ (Female Crab) को बड़ा करती हूँ। जब उनके पेट में अंडे (Orange Eggs) आ जाते हैं, तो मैं उन्हें एक्सपोर्ट एजेंट को बेचती हूँ। एक ‘अंडे वाली मादा’ का मुझे ₹1500 मिलता है। अब हमारा पूरा गांव यही करता है।”
“दोस्तों, क्या आप देखना चाहते हैं कि केकड़ा बॉक्स के अंदर खाना कैसे खाता है और पानी कैसे साफ़ होता है?
👇 नीचे दिए गए वीडियो में देखें ‘वर्टिकल क्रैब फार्म’ का लाइव टूर। सेटअप का एक-एक पाइप समझें! 👇
28. केकड़ा पालन के 5 तीखे सवाल (FAQs)
Q1: क्या मीठे पानी (Sweet Water) में मड क्रैब पाल सकते हैं? उत्तर: मड क्रैब को खारा पानी (Brackish Water) पसंद है। मीठे पानी में यह जिंदा तो रह लेगा, लेकिन बढ़ेगा नहीं और उसका मांस बेस्वाद हो जाएगा। आपको पानी में नमक मिलाकर कम से कम 5-10 PPT खारापन रखना ही होगा।
Q2: बीज (Water Crab) कहाँ से मिलेगा? उत्तर: यह सबसे बड़ी समस्या है। इसकी अभी कोई बड़ी हैचरी (Factory) नहीं है। आपको तटीय इलाकों (Coastal Areas) के मछुआरों या कलेक्शन एजेंटों से संपर्क करना होगा जो समुद्र से पकड़कर लाते हैं।
Q3: क्या इसे घर की छत पर कर सकते हैं? उत्तर: जी हाँ! लेकिन ध्यान रहे, पानी का वजन बहुत ज्यादा होता है। 1000 बॉक्स का मतलब है कई टन पानी। अपनी छत की मजबूती चेक करवा लें। और शेड लगाना जरुरी है ताकि धूप से पानी गर्म न हो।
Q4: बॉक्स की कीमत क्या है? उत्तर: एक अच्छी क्वालिटी का ‘क्रैब बॉक्स’ (Crab House) भारत में ₹250 से ₹400 के बीच मिलता है। आप इसे Indiamart से थोक में खरीद सकते हैं।
Q5: अगर केकड़ा खाना छोड़ दे तो? उत्तर: इसका मतलब दो ही हैं— या तो वो ‘मोल्टिंग’ (खोल उतारने) वाला है, या पानी ख़राब है। अगर खोल उतारने वाला है, तो उसे डिस्टर्ब न करें। अगर पानी ख़राब है, तो तुरंत पानी बदलें।
29. अंतिम निष्कर्ष: कीचड़ से निकलकर ‘कॉर्पोरेट’ बनें (Conclusion)
मेरे प्रगतिशील किसान साथियों और नए उद्यमियों,
मड क्रैब फार्मिंग (Mud Crab Farming) को केवल एक ‘खेती’ समझने की गलती न करें। यह “जल-कृषि का कॉर्पोरेट बिजनेस” है। जैसे पोल्ट्री फार्मिंग अब ‘बैकयार्ड’ से निकलकर ‘फैक्ट्री’ बन गई है, वैसे ही केकड़ा पालन अब तालाब से निकलकर ‘बॉक्स’ में आ गया है।
इस पूरी गाइड का अंतिम निचोड़ (Summary) यह है:
- तकनीक ही राजा है: यह बिजनेस मेहनत से ज्यादा ‘अनुशासन’ (Discipline) मांगता है। अगर आप रोज पानी का pH चेक नहीं कर सकते या मोटर खराब होने पर रात को 2 बजे नहीं उठ सकते, तो कृपया इस बिजनेस में हाथ न डालें। यहाँ एक गलती की कीमत पूरी फसल है।
- भविष्य सुनहरा है: समुद्र में प्रदूषण बढ़ रहा है और जंगली केकड़े कम हो रहे हैं। दूसरी तरफ, लग्जरी होटलों में इसकी मांग 20% सालाना बढ़ रही है। यानी आने वाला समय ‘बॉक्स फार्मिंग’ का ही है।
- अनुभव आधारित जानकारी: अपनी जमा-पूंजी का 100% इसमें न लगाएं। शुरुआत एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ (सिर्फ 100-200 बॉक्स) से करें। पहले एक चक्र (45 दिन) पूरा करें, केकड़े के व्यवहार को समझें, मार्केट में एजेंट से मिलें। जब पहली कमाई हाथ में आ जाए, तभी इसे 1000 बॉक्स तक ले जाएं।
“सफल वही है जो लहरों के भरोसे नहीं बैठता, बल्कि अपना खुद का समंदर (टैंक) बनाता है!”
अस्वीकरण (Disclaimer)
Mahayoddha.in पर दी गई जानकारी जलीय कृषि वैज्ञानिकों (Aquaculture Experts), MPEDA के दिशा-निर्देशों और सफल निर्यातकों के अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल शैक्षिक जागरूकता (Educational Purpose Only) है। इस प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले निम्नलिखित जोखिमों को गंभीरता से समझें:
- जीवित मृत्यु दर (High Mortality Risk): केकड़ा एक जीवित प्राणी है। बॉक्स सिस्टम में भी तकनीकी खराबी (जैसे बिजली जाना, ऑक्सीजन मोटर फेल होना) या पानी में संक्रमण (Infection) से 100% तक मृत्यु दर हो सकती है। इसके लिए पावर बैकअप (जनरेटर) होना अनिवार्य है।
- बाजार और मूल्य (Market Volatility): ₹1,500/kg का भाव केवल ‘एक्सपोर्ट क्वालिटी’ (500 ग्राम+, कठोर और जिंदा) केकड़े पर मिलता है। अगर केकड़ा मर गया या उसका वजन कम रह गया, तो स्थानीय बाजार में उसका भाव ₹200/kg भी मुश्किल से मिलता है।
- बीज की उपलब्धता (Seed Dependency): केकड़े का बीज (Crablet) अभी भी प्राकृतिक स्रोतों (Wild Catch) पर निर्भर है। कई बार मौसम खराब होने पर बीज नहीं मिलता, जिससे आपका सेटअप महीनों तक खाली पड़ा रह सकता है।
- कानूनी अनुपालन (Legal Compliance): तटीय क्षेत्रों में खारा पानी (Saline Water) उपयोग करने के लिए तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) या स्थानीय मत्स्य विभाग से अनुमति लेना आवश्यक हो सकता है। बिना लाइसेंस के जंगली केकड़ों का भंडारण गैर-कानूनी हो सकता है।
निवेशक अपने विवेक (Self-Discretion) का प्रयोग करें। वेबसाइट किसी भी वित्तीय घाटे के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।


