राम-राम मेरे किसान योद्धाओं! कैसे हो आप सब? उम्मीद है सब मजे में होंगे।
भाइयों, आज हम एक ऐसी कड़वी सच्चाई पर बात करने वाले हैं जिसे हम रोज महसूस करते हैं। आज खेती में सबसे बड़ी समस्या क्या है? “खर्च ज्यादा और आमदनी कम।” यूरिया, डीएपी (DAP) और कीटनाशकों (Pesticides) की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऊपर से ये केमिकल हमारी मिट्टी को बंजर बना रहे हैं।
लेकिन क्या आपको पता है? अब हवा का रुख बदल रहा है। साल 2026 में सरकार ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ (Zero Budget Natural Farming) पर बहुत बड़ा पैसा खर्च कर रही है। अगर आप रासायनिक खाद छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ते हैं, तो सरकार आपको सिर्फ तालियां नहीं देगी, बल्कि सीधे बैंक खाते में सालाना प्रोत्साहन अनुदान भी देगी। आज आपका भाई सचिन आपको इस नई क्रांति की पूरी ए-बी-सी-डी (ABCD) समझाएगा।
1. प्राकृतिक खेती क्या है? (What is Natural Farming?)
सरल शब्दों में कहें तो, प्रकृति के साथ जुड़कर की जाने वाली खेती। इसमें बाजार से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। न खाद, न दवा। आपके घर की गाय का गोबर और गौमूत्र ही आपकी ‘फैक्ट्री’ है।
इसे ‘जीरो बजट’ इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें लागत 0 रुपये होती है। बीज आपके घर के होते हैं और खाद आपके गौवंश से आती है।
2. PM-PRANAM योजना: सरकार कैसे करेगी मदद? (Govt Support)
भारत सरकार ने 2026 में PM-PRANAM (Promotion of Alternate Nutrients for Agriculture Management) योजना को बहुत आक्रामक तरीके से लागू किया है।
- सीधा फायदा: जो राज्य या जिले रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करेंगे, सरकार उस बचत का 50% पैसा सीधे उस क्षेत्र के किसानों और किसान समूहों (FPOs) को अनुदान के रूप में वापस देगी।
- सालाना प्रोत्साहन: प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण (Registration) कराने वाले किसानों को हर साल प्रति एकड़ के हिसाब से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
3. घर पर बनाएं ‘जीवामृत’: खाद का खर्चा 100% खत्म
भाइयों, यूरिया के पीछे भागना छोड़िए। हिंगोली और परभणी के सफल किसान अब ‘जीवामृत’ का जादू दिखा रहे हैं। इसे बनाने की एकदम आसान विधि यहाँ देखें:
जरूरी सामग्री:
- 10 किलो ताज़ा गाय का गोबर।
- 10 लीटर गौमूत्र (जितना पुराना हो उतना अच्छा)।
- 2 किलो गुड़ (पुराना गुड़)।
- 2 किलो बेसन (चने का आटा)।
- 1 मुट्ठी अपने खेत के मेड की मिट्टी।
- 200 लीटर पानी।
बनाने का तरीका: इन सबको एक प्लास्टिक के ड्रम में मिला दें और 2 से 3 दिनों तक छाया में रखें। दिन में दो बार लकड़ी से घोलें। बस! आपका 200 लीटर पावरफुल लिक्विड खाद तैयार है। इसे सिंचाई के पानी के साथ छोड़ें या फवारणी करें।

4. हिंगोली-परभणी का ‘हल्दी’ अनुभव (Hingoli-Parbhani Insight)
भाइयों, मैंने खुद देखा है कि हिंगोली के बसमत और परभणी के कुछ प्रगतिशील किसानों ने रासायनिक खाद पूरी तरह बंद कर दी है।
- सफल कहानी: बसमत के एक किसान ने अपनी 5 एकड़ हल्दी पूरी तरह सेंद्रिय (Organic) तरीके से उगाई। परिणाम? उनकी हल्दी की क्वालिटी इतनी जबरदस्त थी कि उसे सीधे यूरोप (Europe) भेजने का ऑर्डर मिला।
- मुनाफा: केमिकल वाली हल्दी 7000-8000 रुपये क्विंटल बिकती है, लेकिन उनकी ‘नेचुरल हल्दी’ 15000 रुपये क्विंटल से भी ज्यादा दाम पर बिकी। जब खर्च 0 हो और भाव डबल मिले, तभी तो किसान ‘महारथी’ बनेगा!
5. प्राकृतिक खेती के 5 मुख्य स्तंभ (5 Pillars)
- बीजामृत: बुवाई से पहले बीजों का गौमूत्र और गोबर से उपचार करें ताकि बीमारी न लगे।
- जीवामृत: मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने के लिए।
- आच्छादन (Mulching): मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए फसल के अवशेषों का उपयोग।
- वाफसा (Aeration): मिट्टी में हवा और पानी का संतुलन।
- कीट नियंत्रण: नीम का अर्क और दशपर्णी अर्क का उपयोग करें।

6. सरकार से मिलने वाला अनुदान (Subsidy Details 2026)
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार अलग-अलग चरणों में पैसा देती है:
- किसान समूह (FPO): अगर 20 किसान मिलकर एक ग्रुप बनाते हैं, तो सरकार उन्हें 5,00,000 से 10,00,000 रुपये तक का फंड देती है।
- व्यक्तिगत सहायता: छोटे किसानों को प्रशिक्षण और किट खरीदने के लिए सालाना 12,000 से 15,000 रुपये की मदद दी जा रही है।
| श्रेणी | पात्रता | राशि (₹) | उद्देश्य | नोट्स |
|---|---|---|---|---|
| FPO / किसान समूह | 20+ किसान | 5,00,000 – 10,00,000 | पैकिंग, प्रोसेसिंग, ट्रेनिंग | राज्य/जिला अलग-अलग |
| व्यक्तिगत किसान | छोटे किसान | 12,000 – 15,000 वार्षिक | प्रशिक्षण, जैविक किट | KVK/TAO आवेदन |
| राज्य प्रोत्साहन | रासायनिक खाद कम करने वाले राज्य | %-आधारित | प्राकृतिक पोषक तत्व | अलग नियम |
| सर्टिफिकेशन | 2–3 वर्ष प्राकृतिक खेती | Organic / PGS प्रमाण पत्र | ब्रांडिंग व मूल्य | प्रमाणन नियम अनुसार |
7. अपना माल ‘ब्रांड’ कैसे बनाएं? (Certification & Tag)
भाइयों, सिर्फ खेती करना काफी नहीं है, उसे ‘नेचुरल’ साबित करना भी जरूरी है।
- PGS-India: यह एक सरकारी पोर्टल है जहाँ आप अपने खेत का पंजीकरण कर सकते हैं।
- Organic Tag: 3 साल तक प्राकृतिक खेती करने के बाद आपको ‘सेंद्रिय प्रमाण पत्र’ मिलता है। इसके बाद आप अपना माल रिलायंस, बिग बास्केट जैसे बड़े स्टोर्स में या विदेशों में 3 गुना ज्यादा दाम पर बेच सकते हैं।
8. प्राकृतिक खेती और ‘इंटरक्रॉपिंग’ (Intercropping Magic)
भाइयों, प्राकृतिक खेती का असली मजा ‘मिश्र खेती’ में है।
- फायदा: अगर आप मुख्य फसल के साथ छोटी फसलें (जैसे चने के साथ सरसों, या कपास के साथ तुअर) लेते हैं, तो कीटों का हमला कम होता है।
- मुनाफा: एक ही खर्च में आपको दो-तीन फसलों का उत्पादन मिलता है। हिंगोली के कुछ किसान अब अपनी मुख्य फसल के चारों ओर ‘गेंदे के फूल’ (Marigold) लगा रहे हैं, जिससे कीड़े फूलों की तरफ आकर्षित होते हैं और मुख्य फसल बच जाती है।

9. ‘दशपर्णी अर्क’ (Dashparni Ark): घर पर बनाएं कीटनाशक
महंगे कीटनाशक खरीदने की अब कोई जरूरत नहीं। 10 तरह की कड़वी पत्तियों को गौमूत्र में सड़ाकर आप घर पर ही दुनिया का सबसे बेहतरीन कीटनाशक बना सकते हैं।
- बचत: इससे आपके साल भर के कम से कम 5,000 से 15,000 रुपये बचेंगे।
10. ‘सॉइल टेस्टिंग’ (Soil Health) और प्राकृतिक बदलाव
रासायनिक खाद डालने से मिट्टी पत्थर जैसी कड़ी हो जाती है। प्राकृतिक खेती शुरू करने के मात्र 6 महीने बाद आप देखेंगे कि आपकी मिट्टी में केंचुओं (Earthworms) की संख्या बढ़ने लगी है।
- Tip: अपनी मिट्टी की जांच हर साल सरकारी लैब में कराएं। जब आपकी मिट्टी में ‘कार्बन’ (Carbon Content) की मात्रा बढ़ेगी, तो आपकी फसल बिना खाद के भी हरी-भरी रहेगी।
11. पशुपालन और खेती का अटूट रिश्ता
बिना गाय के प्राकृतिक खेती अधूरी है। सरकार अब उन किसानों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है जो प्राकृतिक खेती के साथ-साथ ‘देशी गाय’ पालते हैं।
- Go-Seva Subsidy: कई राज्यों में देशी गाय खरीदने के लिए 50% से 80% तक की सब्सिडी दी जा रही है। एक गाय का गोबर 30 एकड़ जमीन के लिए जीवामृत बनाने के काम आ सकता है।
12. किसानों के लिए ‘ई-नाम’ (e-NAM) और डिजिटल मार्केटिंग
भाइयों, अपना माल सिर्फ गांव के व्यापारी को न बेचें।
- Direct Selling: ‘ई-नाम’ पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें। इससे आप अपना सेंद्रिय माल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु के बड़े खरीदारों को सीधे बेच सकते हैं।
- सोशल मीडिया: अपने खेत की वीडियो यूट्यूब या इंस्टाग्राम पर डालें। लोग सीधे आपसे संपर्क करेंगे और आपको मंडी से 20% से 40% ज्यादा रेट देंगे।
13. महिलाओं की भागीदारी और ‘ड्रोन’ का साथ
2026 में प्राकृतिक खेती में महिलाएं (बचत गट) सबसे आगे हैं। सरकार महिलाओं को प्राकृतिक खाद बनाने के लिए ट्रेनिंग और छोटे प्लांट लगाने के लिए 2,00,000 से 5,00,000 रुपये तक का अनुदान दे रही है। साथ ही, जीवामृत का छिड़काव करने के लिए अब ‘ड्रोन’ (Drones) का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
ड्रोन तकनीक के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा यह लेख पढ़ें: [नमो ड्रोन दीदी योजना 2026: 80% सब्सिडी की पूरी जानकारी]“

14. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1: क्या प्राकृतिक खेती से पैदावार (Yield) कम होती है? Ans: शुरू के 1-2 साल पैदावार थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन तीसरे साल से पैदावार बढ़ जाती है और खर्च 0 होने की वजह से मुनाफा ज्यादा होता है।
Q2: पंजीकरण कहाँ करना होगा? Ans: आप अपने नजदीकी ‘कृषि विज्ञान केंद्र’ (KVK) या तालुका कृषि अधिकारी (TAO) कार्यालय में जाकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
लाइव डेमो के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें: अगर आप भी अपनी खेती का खर्च जीरो करना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके बहुत काम आएगा।
15. अस्वीकरण (Disclaimer)
महत्वपूर्ण जानकारी: इस लेख में दी गई जानकारी ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’ और सरकारी योजनाओं (जैसे PM-PRANAM) के सामान्य ज्ञान और समाचार माध्यमों पर आधारित है। सचिन भाई (Mahayoddha.in) का उद्देश्य किसानों तक सही जानकारी पहुँचाना है, लेकिन:
- योजनाओं में बदलाव: सरकारी योजनाओं के नियम, अनुदान की राशि और आवेदन की प्रक्रिया समय-समय पर सरकार द्वारा बदली जा सकती है।
- सटीकता: यद्यपि हमने जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास किया है, फिर भी पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी योजना में आवेदन करने से पहले अपने नजदीकी तालुका कृषि कार्यालय (TAO) या आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जाकर जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।
- खेती के परिणाम: प्राकृतिक खेती के परिणाम आपकी जमीन की उर्वरता, मौसम और आपकी मेहनत पर निर्भर करते हैं।
- वित्तीय निर्णय: किसी भी प्रकार के निवेश या वित्तीय निर्णय के लिए लेखक या वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होंगे।
– टीम महायोद्धा (Mahayoddha.in)
15. निष्कर्ष (Conclusion)
मेरे योद्धाओं, समय आ गया है कि हम अपनी जमीन को रसायनों के जहर से आज़ाद कराएं। प्राकृतिक खेती न केवल आपकी जेब भरेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ जमीन देगी। हिंगोली और परभणी के किसान बदल रहे हैं, क्या आप तैयार हैं?
सचिन (Mahayoddha.in)


