राम-राम मेरे शेतकरी योद्धाओं!
कैसे हो आप सब? उम्मीद है सब मजे में होंगे।
भाइयों, अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं—
“सचिन भाई, खेती के साथ ऐसा कौन सा छोटा बिजनेस करें जिसमें रिस्क कम हो और मुनाफा नगद मिले?”
तो मेरा जवाब होता है—
👉 देसी और कडकनाथ मुर्गी पालन।
2026 का यह साल उन किसानों के लिए है जो लीक से हटकर सोचते हैं। आज के समय में शहर के लोग कडकनाथ के मांस के लिए 800 से 1,000 रुपये किलो तक देने को तैयार हैं। सही प्लानिंग और सही मार्केट मिल जाए, तो यह काम खेती के साथ-साथ आपकी आमदनी का मजबूत साधन बन सकता है।
आज के इस लेख में हम मुर्गी पालन का पूरा “पोस्टमार्टम” करेंगे—
- कितनी लागत आएगी?
- सरकार कितनी सब्सिडी देती है?
- और सबसे जरूरी— हिंगोली और परभणी की मंडियों में इसे बेचना कैसे है?
चलिए, शुरू करते हैं!
1. कडकनाथ और गावरान: बाजार की नई जान
भाइयों, बॉयलर मुर्गी तो हर कोई पाल रहा है। उसमें बीमारी ज्यादा आती है और दवाइयों का खर्च भी बढ़ जाता है। इसके उलट—
कडकनाथ (Kadaknath)
- इसका मांस, खून और हड्डियां काले रंग की होती हैं।
- लोकमान्यता और कुछ अध्ययनों के अनुसार, इसमें प्रोटीन ज्यादा और फैट कम माना जाता है।
- शहरों और होटल इंडस्ट्री में इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है।
- हेल्थ-केयर, फिटनेस और औषधीय गुणों वाले मांस के लिए ग्राहक तैयार हैं।
गावरान (Desi)
- असली गांव की गावरान मुर्गी
- इसका अंडा आज भी 15–20 रुपये में बिकता है
- जबकि बॉयलर अंडा सिर्फ 5–7 रुपये का होता है
- देसी मुर्गी के स्वाद और लंबे जीवन के कारण बाजार में डिमांड लगातार बनी रहती है
यही वजह है कि देसी और कडकनाथ दोनों मिलकर बाजार की नई जान बन चुके हैं।
टिप: यदि आप सही क्वालिटी और सही नस्ल का ध्यान रखते हैं, तो हिंगोली और परभणी मंडियों में आसानी से ग्राहक मिल सकते हैं।
2. मेरा अनुभव: हिंगोली और परभणी मंडी का हाल (Market Insight)
भाइयों, मैंने हाल ही में हिंगोली की रविवार मंडी और परभणी के लोकल मार्केट का दौरा किया।
परभणी अपडेट
- परभणी के पास के होटल व्यवसायी
- “सावजी” और “काला रस्सा” के लिए
- सीधे किसानों के फार्म से कडकनाथ उठा रहे हैं
- मतलब, अगर आप सीधे ग्राहकों तक पहुंचेंगे तो बिचौलियों पर खर्च कम होगा और प्रॉफिट ज्यादा मिलेगा
हिंगोली अपडेट
- छोटे स्तर पर मुर्गी पालन तो हो रहा है
- लेकिन प्रोफेशनल शेड और प्लानिंग के साथ काम करने वालों की कमी है
- 500 मुर्गियों से शुरुआत करने वालों के लिए यह बाजार अभी खुला है
- सही मार्केटिंग और डिजिटल प्रमोशन से आप आसानी से अपनी जगह बना सकते हैं
सलाह: शुरू में 500–1000 मुर्गियों से ही शुरुआत करें।
बड़े प्रोजेक्ट में जल्दी उतरने से रिस्क बढ़ जाता है।
3. सरकार की योजनाएं और सब्सिडी (Govt Schemes 2026)
सचिन भाई हमेशा पक्की जानकारी देते हैं। 2026 में सरकार इन योजनाओं के जरिए मदद कर रही है:
अहिल्यादेवी होळकर योजना
- SC / ST वर्ग के किसानों को
- मुर्गी पालन के लिए 75% तक अनुदान
- योजना की राशि राज्य और पात्रता पर निर्भर करेगी
पशु संवर्धन विभाग योजना
- सामान्य वर्ग के किसानों के लिए
- 50% सब्सिडी
- 100 मुर्गियों का यूनिट आसानी से सेट किया जा सकता है
MSRLM (महिला बचत गट)
- महिला बचत गटों को
- 2 लाख से 5 लाख रुपये तक कम ब्याज पर लोन / अनुदान
- शुरुआत में महिलाओं के लिए यह बेहतरीन अवसर है
नोट: योजनाओं और राशि में समय-समय पर बदलाव हो सकता है। आवेदन से पहले अपने तहसील या जिला पशु संवर्धन विभाग से पुष्टि जरूर करें।
4. मुर्गियों का शेड कैसे बनाएं? (Shed Construction)
भाइयों, सही शेड = कम बीमारी = ज्यादा मुनाफा।
- दिशा: हमेशा पूर्व-पश्चिम (East-West)
- जगह: 100 मुर्गियों के लिए 150–200 sq.ft
- फर्श: लकड़ी का बुरादा या धान का छिलका (Bhus)
- सफाई: हर हफ्ते
- हवादार: खिड़कियों और छत पर वेंटिलेशन
टिप: शेड का साइज और डिजाइन मौसम और मुर्गियों की संख्या पर निर्भर करता है। सही दिशा और वेंटिलेशन बीमारी कम करता है।
5. खान-पान और टीकाकरण (Feeding & Vaccination)
फ्री-रेंज पद्धति
- मुर्गियों को दिन में खेत या खुले आंगन में छोड़ें
- कीड़े-मकोड़े, घास और बचा अनाज खा सकती हैं
- दाने का खर्च 50–60% तक कम हो सकता है
टीकाकरण
- रानीखेत और लसोटा जैसे टीके समय पर दें
- एक बीमार मुर्गी पूरे फार्म को संक्रमित कर सकती है
टिप: शुरुआत में सही फीड + सही टीकिंग + फ्री-रेंज अपनाएं।
यह आपके खर्च और रिस्क दोनों कम करेगा।

6. नफे का गणित: 500 मुर्गियों का उदाहरण
यह गणित अनुमानित है, वास्तविक लाभ बाजार, देखभाल और खर्च पर निर्भर करता है।
- लागत: 500 चूजे + दाना + दवा = 60,000–80,000 रुपये
- अवधि: 4–5 महीने
- औसत बिक्री: 600–700 रुपये प्रति मुर्गा
सही मार्केट मिलने पर 2.5 लाख रुपये तक का प्रॉफिट संभव है।
नोट: बाजार के अनुसार मुनाफा कम या ज्यादा हो सकता है।
क्र. Item / Activity खर्च (Cost) बिक्री / Income Net Profit / लाभ 1 500 कडकनाथ चूजे + दाना + दवा ₹60,000 – ₹80,000 500 मुर्गी × ₹700 प्रति मुर्गा = ₹3,50,000 ₹2,50,000+ 2 Free Range खान-पान (दाना बचत) – – दाने पर 60% तक बचत 3 Azolla फीड (स्वयं उगाना) कम (₹1,000–2,000) – दाने का खर्च 15–20% कम 4 हैचरी / Incubator से चूजे बेचना ₹5,000 – ₹15,000 मशीन चूजे बिक्री से ₹10,000 – ₹20,000+ Extra Income 5 Droppings से खाद बिक्री – ₹200–400 प्रति बोरी × बोरी की संख्या Extra Income 5,000–10,000 प्रति चार महीने
7. सचिन भाई की सलाह (Personal Opinion)
- शुरुआत 100–200 मुर्गियों से करें
- सीधे ढाबे और होटल से संपर्क करें
- बिचौलियों से बचें
- अंडों की बिक्री पर खास ध्यान दें
- मार्केटिंग डिजिटल भी करें
8. बायो-सिक्योरिटी: बीमारी से बचाव
- Foot Bath: शेड के दरवाजे पर
- No Entry: बाहरी लोगों की एंट्री बंद
- गर्मी में शेड ठंडा रखें (Gunny Bags + Water Sprinkling)
याद रखें: एक बीमार मुर्गी पूरे फार्म को नुकसान पहुँचा सकती है।
9. अजोला (Azolla) खेती: मुर्गियों के लिए फ्री का टॉनिक
अजोला एक सुपर फूड की तरह है। इसे मुर्गियों के दाने में मिलाकर खर्च कम और मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।
अजोला क्या है?
- पानी में उगने वाली हरी काई (Fern)
- 25–30% प्रोटीन
- फॉस्फोरस, कैल्शियम और आयरन का अच्छा स्रोत
कैसे उगाएं?
- जमीन या टंकी में 10–12 इंच पानी भरें
- 2–3 किलो अजोला बीज डालें
- रोज हल्का पानी और पोषण (cow dung slurry) मिलाएं
- 7–10 दिन में अजोला भरपूर बढ़ने लगता है
फायदा
- मुर्गियां इसे बहुत पसंद करती हैं
- दाने का खर्च 15–20% कम
- मांस का वजन तेजी से बढ़ता है
- अंडों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है
स्टोरेज और फीडिंग
- ताज़ा अजोला दिन में 2–3 बार दें
- ज्यादा समय तक न रखें, सूखने से पोषण घटता है
टिप: छोटे फार्म के लिए अजोला सबसे सस्ता और असरदार प्रोटीन सोर्स है।

10. ‘हैचरी’ मशीन से बढ़ाएं मुनाफा (Hatchery Business)
जब फार्म थोड़ा सेट हो जाए, तो Incubator / Hatchery में निवेश करें।
Incubator क्या करता है?
- मुर्गियों के अंडों से चूजे निकालता है
- चूजों को बेचकर अतिरिक्त आय
- एक मशीन की कीमत 5,000–15,000 रुपये
फायदे
- चूजे खरीदने की जरूरत कम
- ग्रामीण क्षेत्रों में एक दिन के देसी चूजे की मांग हमेशा रहती है
- बढ़ते मार्केट और कम निवेश में high ROI
इस्तेमाल का तरीका
- अंडे रखें 37–38°C तापमान पर
- नमी 55–60% तक रखें
- 18 दिन बाद ह्यूचिंग शुरू, 21 दिन में चूजे
- Brooding के लिए अलग शेड
मार्केटिंग
- छोटे गांवों में chicks delivery
- होटल / ढाबे वाले सीधे चूजे खरीद सकते हैं
- Social Media और WhatsApp से local demand बताएं
टिप: Hatchery सिर्फ मुनाफा नहीं बढ़ाता, बल्कि फार्म की self-sustainability भी मजबूत करता है।
11. लाइट और वेंटिलेशन का गणित
मुर्गियों की ग्रोथ के लिए रोशनी और हवा दोनों बहुत जरूरी हैं।
लाइटिंग
- रात में 2–4 घंटे अतिरिक्त रोशनी
- मुर्गियां ज्यादा दाना खाती हैं
- जल्दी बड़ी होती हैं
वेंटिलेशन
- अमोनिया गैस और नमी कम करता है
- बीमारियों से बचाव
- खिड़कियों पर जाली और पर्दे सही रखें
मॉनिटरिंग
- गर्मी और ठंड में तापमान चेक करें
- शेड का तापमान 25–30°C आदर्श
सही लाइट और वेंटिलेशन = healthy birds + better profit

12. वेस्ट मैनेजमेंट: बीट से खाद
- खुद की खेती में इस्तेमाल
- या 200–400 रुपये प्रति बोरी बिक्री
मुर्गियों की बीट से बनी खाद का उपयोग आप प्राकृतिक खेती में कर सकते हैं, जिससे यूरिया-डीएपी का खर्च बचता है। यह भी पढ़ें: [प्राकृतिक खेती 2026: खर्च जीरो, मुनाफा हीरो]

13. बैंक लोन और CIBIL
- मुद्रा लोन / KCC
- CIBIL स्कोर > 750 अच्छा माना जाता है
- बैंक की शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं
14. पोल्ट्री ट्रेनिंग कहाँ से लें?
15. Free Range Poultry System
- मुर्गियों को बंद पिंजरे में न रखना
- खेत में घूमने दें
- दाने और खर्चा कम
- मांस और अंडे की गुणवत्ता बेहतर
16. Brooding: शुरुआती देखभाल
- पहले 15 दिन खास ध्यान
- तापमान 32–35°C
- साफ पानी और हल्का दाना
- सही Brooding = सफल पोल्ट्री
17. बायो-सिक्योरिटी (Bio-Security): मुर्गियों का सुरक्षा कवच
भाइयों, अक्सर मुर्गियां बाहर से आने वाली बीमारियों की वजह से मरती हैं।
बायो-सिक्योरिटी केवल बीमारी से बचाव नहीं, बल्कि आपके निवेश की सुरक्षा भी है।
Foot Bath
- शेड के दरवाजे पर छोटा गड्ढा या टब बनाएं
- इसमें Potassium Permanganate या फिनाइल मिला पानी रखें
- अंदर जाने से पहले पैर डुबोना अनिवार्य
Entry Control
- शेड में अनजान लोगों को न जाने दें
- कर्मचारी या परिवार वाले ही शेड में प्रवेश करें
- बाहर से आने वाली चीज़ों को sanitize / साफ करना जरूरी
तापमान और गर्मी
- हिंगोली और परभणी में गर्मी बहुत बढ़ जाती है
- शेड पर Gunny Bags डालकर पानी छिड़कें
- हीट स्ट्रोक से मुर्गियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं
कीट और रोग नियंत्रण
- शेड के आसपास की जमीन साफ रखें
- घास और गंदगी शेड में न हो
- Regular vaccination और deworming जरूरी
नोट: Bio-Security = कम रिस्क + ज्यादा प्रॉफिट
किसान भाइयों, सिर्फ लेख पढ़ने से काम नहीं चलता, चीजों को अपनी आँखों से देखना बहुत जरूरी है। नीचे दिए गए वीडियो में आप कड़कनाथ मुर्गी पालन का सफल बिजनेस मॉडल और हैचरी मशीन (Incubator) कैसे काम करती है, इसकी पूरी जानकारी लाइव देख सकते हैं। इस वीडियो को पूरा देखें ताकि आप अपनी खुद की हैचरी यूनिट शुरू करने का तरीका समझ सकें:
18. मार्केटिंग का नया तरीका: डिजिटल किसान
भाइयों, अब सिर्फ मंडी के भरोसे मत रहिए। आज के समय में डिजिटल मार्केटिंग आपका सबसे बड़ा साथी बन सकता है।
WhatsApp Group
- अपने गाँव और तहसील के व्हाट्सएप ग्रुप में फार्म की फोटो और वीडियो डालें।
- हर फोटो में मुर्गियों की संख्या, वज़न और नस्ल बताएं।
- छोटे होटल और ढाबों को सीधे मैसेज भेजें।
YouTube / Reels
- अपने फार्म की छोटी वीडियो बनाएं:
- शेड का सफाई प्रोसेस
- मुर्गियों की फ्री-रेंज घुमंतू पद्धति
- अजोला या हरी फीड का इस्तेमाल
- लोग मेहनत देखते ही आपके पास सीधे खरीदने आएंगे।
- वीडियो में हमेशा सही जानकारी और साफ दिखावट रखें।
Agro प्रदर्शनी
- परभणी या हिंगोली में होने वाली कृषि प्रदर्शनी / एग्रो शो में स्टॉल लगाएं।
- वहां दिस्प्ले में मुर्गियों का मांस और अंडे रखें।
- स्टॉल पर contact info + whatsapp number जरूर दें।
Facebook / Instagram
- लोकल मार्केटिंग के लिए छोटे Ads चला सकते हैं।
- पोस्ट में मुर्गी का वजन, नस्ल, और ताज़गी बताएं।
टिप: डिजिटल मार्केटिंग से आप सीधे ग्राहक तक पहुँचते हैं। बिचौलियों पर खर्च बचता है और प्रोफिट बढ़ता है।

19. FAQ – Poultry 2026
Q1: कडकनाथ के चूजे कहाँ मिलेंगे?
कृषि विश्वविद्यालय / जिला पशु संवर्धन कार्यालय
Q2: बदबू आती है?
सफाई और बुरादा सही रखने से 90% कम
Q3: चूजे मरते हैं?
Brooding सही से करें, मृत्यु दर 2–5% तक
20. डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल जानकारी के लिए है।
मुर्गी पालन में बाजार, मौसम और बीमारी का रिस्क रहता है।
किसी भी योजना या निवेश से पहले संबंधित विभाग या पशु चिकित्सक से सलाह जरूरी है।
21. निष्कर्ष (Conclusion)
मेरे शेतकरी योद्धाओं,
2026 में खेती के साथ स्मार्ट बिजनेस सोच जरूरी है।
कडकनाथ और गावरान मुर्गी पालन एक ऐसा विकल्प है जो सही मेहनत और सही दिशा में आपको आर्थिक मजबूती की ओर ले जा सकता है।
हिंगोली और परभणी की धरती मेहनती किसानों की है।
बस जरूरत है सही कदम उठाने की।
– आपका अपना सचिन (Mahayoddha.in) 🚩
लेखक के बारे में (About the Author):


