नमस्कार किसान भाइयों! कैसे हैं आप सब? रब्बी का सीजन अब खत्म होने को है और हमारे खेत खाली हो रहे हैं. अब सवाल यह है कि इस तपती गर्मी में कौन सी फसल ली जाए जो कम पानी में ‘सोना’ उगल दे?
भाई, गर्मी के मौसम में उन्हाळी मूग (Summer Mung) और भुईमूग (Groundnut) से बेहतर कुछ नहीं है. ये फसलें कम समय में तैयार होती हैं और बाजार में इनका रेट भी तगड़ा मिलता है. आज आपका भाई सचिन आपको बताएगा कि 2026 में वो कौन सी टॉप 5 किस्में (Varieties) हैं जो कम पानी में भी आपको मालामाल कर सकती हैं. चलिए, दिल थाम के बैठिए और पूरी जानकारी पढ़िए!
1. उन्हाळी मूग और भुईमूग ही क्यों? (Why Choose These Crops?)
देखो भाई, गर्मी में पानी की किल्लत (Shortage) हर जगह होती है. ऐसे में:
- Short Duration: मूग 60-70 दिनों में और भुईमूग 110-120 दिनों में पक कर तैयार हो जाते हैं.
- Soil Fertility: इन फसलों की जड़ों में ‘राइजोबियम’ होता है, जो जमीन में नाइट्रोजन फिक्स करता है. यानी आपकी जमीन की ताकत बढ़ती है.
- Double Profit: फसल के बाद जो चारा (Fodder) बचता है, वो पशुओं के लिए ‘बादाम’ जैसा होता है.
2. मूग की टॉप 5 उन्नत किस्में (Top 5 Mung Varieties 2026)
सचिन भाई, बीज (Seed) ही फसल की नींव है. अगर बीज सही नहीं, तो मेहनत बेकार. यहाँ देखें 2026 की बेस्ट किस्में:
- SML 668: यह किस्म सिर्फ 60 दिनों में तैयार होती है. इसके दाने मोटे और चमकीले होते हैं.
- IPM 02-3: इसे ‘विराट’ भी कहते हैं. यह पीला मोजेक (Yellow Mosaic) बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है.
- Phule M-2: महाराष्ट्र के मौसम के लिए एकदम कड़क किस्म. कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती है.
- PKV AKM-4: इसकी फलियां एक साथ पकती हैं, जिससे कटाई में आसानी होती है.
- Utkarsha: गर्मी को सहन करने की जबरदस्त ताकत इसमें होती है.
3. भुईमूग (Groundnut) की टॉप 5 किस्में (Top 5 Groundnut Varieties)
भुईमूग के लिए ये किस्में 2026 में धूम मचाएंगी:
- TAG 24: महाराष्ट्र के किसानों की पहली पसंद. कम फैलाव वाली और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्म.
- Phule Unnati: इसके दाने बड़े होते हैं और तेल की मात्रा भी ज्यादा होती है.
- JL 501: यह किस्म जल्दी पकती है और रोगों से लड़ने में सक्षम है.
- GPBD 4: लीफ स्पॉट बीमारी के खिलाफ इसमें जबरदस्त ताकत है.
- TG 37A: यह किस्म भारी और मध्यम जमीन दोनों के लिए बढ़िया है.
4. खेत की तैयारी और बुवाई का सही समय (Field Preparation & Sowing Time)
भाई, उन्हाळी फसल में टाइमिंग का बड़ा खेल है:
- Mung Sowing: 15 फरवरी से 15 मार्च तक बुवाई पूरी कर लें. देर करेंगे तो बारिश में फसल खराब हो सकती है.
- Groundnut Sowing: 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच बुवाई करना सबसे बेस्ट है.
- Preparation: खेत को 2-3 बार अच्छे से जोत लें और जमीन को समतल (Level) कर लें ताकि पानी हर कोने में पहुंचे.
5. खाद नियोजन (Fertilizer Management: दमादार फसल के लिए)
सिर्फ यूरिया डालने से काम नहीं चलेगा भाई! फसल को संतुलित डाइट (Balanced Diet) चाहिए:
- Base Dose: बुवाई के समय 20 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर दें.
- Sulfur: भुईमूग के लिए ‘सल्फर’ (Sulfur) सबसे जरूरी है. यह दानों में तेल बढ़ाता है और दानों को वजनदार बनाता है.
- Nano Urea: बुवाई के 30 -40 दिन बाद नैनो यूरिया का स्प्रे करें, इससे फसल हरी-भरी रहेगी.
अगर आप भी कम पानी में ऐसी खेती करना चाहते हैं और अपना खुद का खेत तालाब बनाना चाहते हैं, तो यह पढ़ें: [मागेल त्याला शेततळे योजना 2026: पूरी जानकारी यहाँ देखें]

6. पानी का मैनेजमेंट (Irrigation Tips for Summer)
गर्मी में पानी ही सब कुछ है:
- Drip Irrigation: अगर मुमकिन हो तो ‘ठिबक’ (Drip) का इस्तेमाल करें. इससे 30-40% पानी बचता है और पैदावार बढ़ती है.
- Critical Stages: मूग में फूल आते समय और भुईमूग में फलियां (Pods) बनते समय पानी की कमी न होने दें.
7. सचिन भाई के ‘महायोद्धा’ टिप्स (Special Tips for Farmers)
देखो भाइयों, मैं आपके साथ गप्पे मार रहा हूँ तो कुछ सीक्रेट भी बता देता हूँ:
- Seed Treatment (बीज ): बुवाई से पहले बीजों को ‘राइजोबियम’ और ‘पी.एस.बी’ (PSB) कल्चर से ट्रीट जरूर करें. इससे पौधों को हवा से नाइट्रोजन खींचने में मदद मिलती है.
- Weed Control: बुवाई के 48 घंटे के अंदर ‘पेंडीमेथालिन’ (Pendimethalin) का छिड़काव करें ताकि खरपतवार (Weeds) उगे ही नहीं.
- Gypsum: भुईमूग में बुवाई के 45 दिन बाद ‘जिप्सम’ (Gypsum) डालें, इससे मूंगफली के दाने खाली नहीं रहेंगे.

8. कीट और रोग प्रबंधन (Pest & Disease Control)
- Aphids & Jassids: गर्मी में रस चूसने वाले कीड़े बहुत आते हैं. इसके लिए पीले स्टिकी ट्रैप (Yellow Sticky Traps) लगाएं.
- Yellow Mosaic: मूग में पीला मोजेक रोकने के लिए सफेद मक्खी (White Fly) को कंट्रोल करना जरूरी है. इसके लिए नीम तेल (Neem Oil) का स्प्रे करें.
9. हार्वेस्टिंग और भंडारण (Harvesting & Storage)
- जब 75-80% फलियां सूख जाएं, तब मूग की कटाई कर लें.
- भुईमूग उखाड़ने के बाद उसे 2-3 दिन धूप में अच्छे से सुखाएं. नमी 10% से कम होने पर ही बोरियों में भरें.
10. उन्हाळी मूंग और मूंगफली की खेती 2026: एक नज़र में जानकारी
| विशेषताएँ (Features) | उन्हाळी मूंग (Summer Mung) | उन्हाळी मूंगफली (Groundnut) |
| बुवाई का समय | 15 फरवरी से 15 मार्च | 15 जनवरी से 15 फरवरी |
| टॉप किस्में | SML 668, फुले M-2, विराट | TAG 24, फुले उन्नति, JL 501 |
| प्रति एकड़ बीज | 6 से 8 किलो | 40 से 50 किलो (दाने) |
| बीज उपचार | राइजोबियम + पी.एस.बी (PSB) | कार्बेन्डाझिम + राइजोबियम |
| सिंचाई का अंतराल | 8 से 10 दिन (मिट्टी के अनुसार) | 10 से 12 दिन |
| मुख्य उर्वरक (खाद) | DAP (50 किलो) + सल्फर | DAP (50 किलो) + जिप्सम (100 किलो) |
| मुख्य कीट और रोग | सफेद मक्खी, मावा (Aphids) | सफेद लट (Grubs), टिक्का रोग |
| फसल की अवधि | 60 से 70 दिन | 110 से 120 दिन |
| औसत पैदावार | 4 से 6 क्विंटल | 8 से 12 क्विंटल |
| बाजार भाव 2026 | ₹7,000 – ₹8,500 | ₹5,500 – ₹7,000 |

11. इंटरक्रॉपिंग (Intercropping) का स्मार्ट तरीका
मेरे भाई, अगर आप रिस्क कम करना चाहते हैं, तो ‘इंटरक्रॉपिंग’ बेस्ट है.
- आप भुईमूग के साथ सूरजमुखी (Sunflower) या मक्का (Maize) की कुछ लाइनें लगा सकते हैं.
- इससे जमीन की नमी बनी रहती है और अगर एक फसल में रेट कम मिला, तो दूसरी फसल आपको बचा लेगी.
12. गर्मियों में मल्चिंग (Mulching) का जादू
तपती धूप में जमीन से पानी बहुत जल्दी भाप (Evaporate) बन जाता है.
- अगर मुमकिन हो, तो पिछले सीजन का कचरा या सूखी घास दो लाइनों के बीच बिछा दें.
- इसे ‘नेचुरल मल्चिंग’ कहते हैं. इससे जमीन का तापमान कम रहता है और खरपतवार (Weeds) भी कम उगते हैं.

13. नैनो फर्टिलाइजर (Nano Fertilizers) का सही इस्तेमाल
2026 में अब पुराने बोरी वाले खाद के साथ नैनो खाद का जमाना है.
- Nano DAP: बुवाई के समय बीजों को नैनो डीएपी से कोट करें.
- Nano Urea: जब फसल 40 दिन की हो जाए, तब इसका स्प्रे करें. इससे पौधों को सीधा पोषण मिलता है और खर्चा भी कम आता है.
14. पोलिनेशन (Pollination) और मधुमक्खियों का रोल
मूग और भुईमूग में पैदावार बढ़ाने के लिए मधुमक्खियां (Honey Bees) बहुत जरूरी हैं.
- अपने खेत के कोनों पर कुछ गेंदे के फूल (Marigold) लगाएं.
- ये फूल मधुमक्खियों को आकर्षित करेंगे, जिससे परागीकरण (Pollination) अच्छा होगा और फलियां ज्यादा लगेंगी.

15. जिब्रेलिक एसिड (Gibberellic Acid) का चमत्कार
अगर आपकी फसल की ग्रोथ रुकी हुई है:
- 0.001% वाला जिब्रेलिक एसिड का स्प्रे करें.
- यह पौधों की कोशिकाओं (Cells) को बढ़ाता है और फूलों की संख्या में 20-30% की बढ़ोतरी करता है. पर ध्यान रहे, इसका इस्तेमाल सिर्फ एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें.
16. बोरॉन (Boron) की कमी को कैसे पहचानें?
सचिन भाई, अगर आपकी मूंगफली के दाने अंदर से काले या खोखले निकल रहे हैं, तो समझो जमीन में ‘बोरॉन’ की कमी है.
- बुवाई के समय 5 किलो बोरेक्स प्रति एकड़ डालें.
- इससे दाने चमकदार, वजनी और मीठे बनते हैं.
17. गर्मी में जंगली जानवरों से बचाव (Crop Protection)
उन्हाळी फसलों में पानी और हरियाली देखकर जंगली सुअर (Wild Boars) और नीलगाय बहुत आते हैं.
- खेत के चारों तरफ ‘साड़ी’ या ‘बैटरी वाला झटका मशीन’ लगाएं.
- सौर ऊर्जा से चलने वाले ‘अल्ट्रासोनिक रिपेलर’ भी 2026 में बहुत पॉपुलर हो रहे हैं, जो आवाज से जानवरों को दूर रखते हैं.
18. फसल बीमा (Crop Insurance 2026) का महत्व
भाई, कुदरत का कोई भरोसा नहीं. बेमौसम बारिश या ओलावृष्टि (Hailstorm) सब तबाह कर सकती है.
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अपनी उन्हाळी फसल का बीमा जरूर कराएं.
- बहुत कम प्रीमियम में आपको बड़ी सुरक्षा मिलती है.
19. ‘वैल्यू एडिशन’ (Value Addition) से ज्यादा मुनाफा
सिर्फ कच्चा माल मत बेचो भाई!
- अगर आप भुईमूग का तेल निकाल कर या मूंगफली को भूनकर पैकेट में बेचते हैं, तो आपको 2-3 गुना ज्यादा पैसा मिलेगा.
- छोटे लेवल पर ‘ऑइल मिल’ लगाने के लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है.
20. मिट्टी की सेहत का रखें ख्याल (Soil Health)
उन्हाळी फसल लेने के बाद खेत को 2-3 हफ्ते के लिए खुला छोड़ दें.
- तेज धूप से जमीन के अंदर के हानिकारक कीटाणु मर जाते हैं.
- इसे ‘सॉइल सोलराइजेशन’ (Soil Solarization) कहते हैं. इससे अगले सीजन (खरिप) की फसल बहुत तगड़ी होती है.
मराठवाड़ा में पानी की किल्लत होती है, इसलिए आप इसे ऐसे लिख सकते हैं:
21. मिट्टी और पानी के संदर्भ में (Soil & Water)
“किसान भाइयों, हमारे हिंगोली और परभणी के इलाकों में गर्मी में पानी बहुत नीचे चला जाता है। इसलिए ‘Phule M-2’ जैसी किस्में यहाँ के लिए वरदान हैं क्योंकि इन्हें कम पानी लगता है।”
22. अपना निजी अनुभव या किस्सा (Personal Touch)
इसे पढ़कर पाठक को भरोसा होता है:
“पिछले साल मैंने हिंगोली की मंडी में देखा था कि जिन भाइयों ने मूंग की ग्रेडिंग की थी, उन्हें ₹200 ज्यादा रेट मिला। इसलिए सफाई पर ध्यान दें।” या फिर “हाल ही में मैंने परभणी कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से बात की, उन्होंने बताया कि गर्मी में ‘सल्फर’ का इस्तेमाल मराठवाड़ा की मिट्टी के लिए बहुत जरूरी है।”
23. सफल किसान का उदाहरण (Success Story)
“हमारे हिंगोली जिले के वसमत (Basmath) इलाके के एक किसान भाई ने इसी तकनीक से पिछले साल मूंग की बंपर पैदावार ली थी।”
24. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ – Summer Farming)
Q1: क्या मूग की खेती कम पानी में हो सकती है? Ans: हाँ भाई, मूग को सिर्फ 3-4 पानियों की जरूरत होती है, बशर्ते आपने सही किस्म चुनी हो.
Q2: भुईमूग में खाली दाने (Pops) क्यों रह जाते हैं? Ans: जमीन में कैल्शियम और सल्फर की कमी की वजह से ऐसा होता है. जिप्सम का इस्तेमाल इसे ठीक कर सकता है.
Q3: गर्मियों में खाद कौन सी डालें? Ans: हमेशा जैविक खाद (Organic Manure) को प्राथमिकता दें और रासायनिक खाद का इस्तेमाल मिट्टी परीक्षण के बाद ही करें.
किसान भाइयों, सिर्फ पढ़ने से काम नहीं चलता, खेत की तैयारी और बीजों का चुनाव अपनी आंखों से देखना भी जरूरी है। नीचे दिए गए वीडियो में कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है कि 2026 में कम पानी में ज्यादा पैदावार कैसे लें और खाद का सही तालमेल कैसे बिठाएं
नोट: वीडियो को अंत तक देखें ताकि आप बुवाई के समय कोई गलती न करें
25. निष्कर्ष (Conclusion)
मेरे किसान योद्धाओं, उन्हाळी मूग और भुईमूग सिर्फ फसल नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में आपकी आय का एक मजबूत जरिया हैं. अगर आप सही किस्म और सही खाद प्रबंधन (Fertilizer Planning) अपनाएंगे, तो कम पानी में भी आप शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.
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अस्वीकरण (Disclaimer):
यह जानकारी सामान्य कृषि सिद्धांतों पर आधारित है. जलवायु और मिट्टी के अनुसार परिणाम अलग हो सकते हैं. बुवाई से पहले अपने स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.


