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विहीर (कुआं) सिर्फ पानी का एक गड्ढा नहीं होती, वह हमारे खेत की रगों में बहने वाला खून है। विहीर सिर्फ पानी नहीं देती, वह हमारी फसल, हमारे परिवार की खुशहाली और हमारे भविष्य की गारंटी होती है।
लेकिन पिछले कुछ सालों में हमने क्या देखा? बरसात आती तो है, पर टिकती नहीं। पानी आता तो है, पर ज़मीन में ठहरता नहीं। नतीजा यह होता है कि मार्च-अप्रैल आते-आते हमारी विहीर जवाब दे देती है। हिंगोली हो या परभणी, मराठवाड़ा का हर किसान आज एक ही सवाल पूछ रहा है— “सचिन भाई, अब क्या करें? हर साल नई बोरवेल खोदना मुमकिन नहीं है।”
इसी गंभीर समस्या का स्थायी समाधान है— विहीर पुनर्भरण (Well Recharge) और सरकारी अनुदान 2026।
1. विहीर पुनर्भरण क्या है? (What is Well Recharge?)
सरल भाषा में समझिए किसान भाइयों— बरसात का जो पानी बहकर खेत से बाहर निकल जाता है, वह हमारा नुकसान है। लेकिन उसी पानी को अगर हम वैज्ञानिक तरीके से ज़मीन के अंदर उतार दें, तो वही पानी साल भर हमारी विहीर का जलस्तर (Water Level) बनाए रखता है।
विहीर पुनर्भरण का मतलब है— बारिश के पानी को फिल्टर करके सीधे कुएं या उसके आसपास की ज़मीन में उतारना। इससे न सिर्फ आपकी विहीर, बल्कि आसपास की बोरवेल में भी पानी बढ़ जाता है।
2. 2026 में यह तकनीक इतनी ज़रूरी क्यों है?
आज की खेती तीन बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है:
- अनियमित बारिश: कभी अतिवृष्टि, तो कभी सूखा।
- बढ़ती गर्मी: जिससे पानी जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है।
- गिरता भूजल स्तर: बोरवेल अब 500-600 फीट तक भी सूखी निकल रही हैं।
हिंगोली के वसमत तालुका के किसान रमेशराव बताते हैं— “पहले हमारी विहीर जून तक पानी देती थी, अब फरवरी में ही तल दिखने लगता है।” इसी संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 2026 में विहीर पुनर्भरण को प्राथमिकता दी है।

3. सरकारी अनुदान 2026: आपको क्या फायदा मिलेगा? (Subsidy Details)
सरकार 2026 में ‘जलयुक्त शिवार अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) के तहत विहीर पुनर्भरण के लिए भारी अनुदान दे रही है।
| विवरण | जानकारी |
| अनुमानित खर्च | ₹40,000 – ₹80,000 |
| सरकारी अनुदान | 50% से 80% तक |
| किसान का हिस्सा | ₹10,000 – ₹30,000 |
| मुख्य लाभ | पानी की उपलब्धता 10-12 महीने |
4. विहीर पुनर्भरण के 3 वैज्ञानिक तरीके
सरकार ने इन तीन तरीकों को मान्यता दी है:
- रिचार्ज पिट (Recharge Pit): विहीर के पास 10x10x10 फीट का गड्ढा बनाकर उसमें कंकड़, रेत और गिट्टी की परतें डाली जाती हैं।
- रिचार्ज ट्रेंच (नाली विधि): खेत की ढलान के अनुसार नाली बनाकर पानी को ज़मीन में उतारा जाता है।
- बोर + विहीर कॉम्बो: सूखी बोरवेल को रिचार्ज शाफ्ट बनाकर विहीर में पानी उतारा जाता है।

5. ज़मीनी रिपोर्ट: हिंगोली और परभणी के सफल किसानों की कहानी
हिंगोली (औंढा तालुका): किसान शिवाजी पवार का अनुभव कमाल का है। वे कहते हैं— “2024 में हमने विहीर पुनर्भरण कराया। 2025 में पहली बार ऐसा हुआ कि अप्रैल में भी मेरी मोटर चालू रही। अब मैं सोयाबीन के साथ गर्मी की सब्जियां भी ले पा रहा हूँ।”
परभणी (पूर्णा तालुका): किसान गजानन देशमुख कहते हैं— “अगर रिचार्ज नहीं कराया होता, तो इस साल मेरी कपास की फसल पूरी तरह सूख जाती। पहले विहीर मार्च में सूखती थी, अब जून तक साथ देती है।”
6. सचिन भाई की 5 गोल्डन टिप्स (Expert Advice)
किसान भाइयों, काम शुरू करने से पहले ये बातें गांठ बांध लें:
- बारिश से पहले काम करें: रिचार्ज का काम मई के महीने तक पूरा हो जाना चाहिए।
- फिल्टर बेड का ध्यान रखें: अगर आप बिना फिल्टर किए पानी डालेंगे, तो विहीर में कीचड़ जमा हो जाएगा।
- सरकारी अनुमति: अनुदान चाहिए तो काम शुरू करने से पहले कृषि सहायक (Krishi Sahayak) से पूर्व-अनुमति (Pre-sanction) जरूर लें।
- स्थान का चयन: हमेशा ढलान की तरफ रिचार्ज पिट बनाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी वहां जमा हो।
- रखरखाव: हर साल बारिश से पहले रिचार्ज पिट की ऊपरी रेत बदल दें ताकि पानी तेज़ी से अंदर जाए।
7. आवेदन प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप (How to Apply)
- सबसे पहले अपने तालुका कृषि कार्यालय (TAO) में संपर्क करें।
- ज़रूरी दस्तावेज़: ज़मीन का 7/12 उतारा, विहीर का फोटो, आधार कार्ड और बैंक पासबुक।
- ऑनलाइन फॉर्म: ‘महाडीबीटी’ (MahaDBT) पोर्टल पर जाकर जल संरक्षण (Water Conservation) सेक्शन में आवेदन करें।
- निरीक्षण: कृषि अधिकारी आकर आपकी विहीर का GPS लोकेशन लेंगे।
- पैसा सीधे बैंक में: काम पूरा होने के बाद अनुदान की राशि सीधे आपके खाते (DBT) में आएगी।
8. रबी और खरीफ दोनों फसलों की गारंटी
जब कुआं रिचार्ज होता है, तो जमीन की नमी (Moisture) लंबे समय तक बनी रहती है। सचिन भाई की सलाह: “अक्सर क्या होता है, अक्टूबर में बारिश जाने के बाद रबी की बुवाई के लिए जमीन में नमी नहीं बचती। लेकिन रिचार्ज वाले खेत में नमी होने के कारण आप गेहूं और चने की फसल बिना किसी डर के ले सकते हैं। यानी एक ही बारिश के पानी पर दो फसलें!”
9. महिलाओं का कष्ट कम और घर में सुख-शांति
कुआं रिचार्ज होना सिर्फ खेती के लिए नहीं, घर के लिए भी जरूरी है। ज़मीनी हकीकत: अगर विहीर में पानी रहेगा, तो घर की महिलाओं को पीने का पानी दूर से नहीं लाना पड़ेगा। पशुओं को पानी पिलाना आसान हो जाएगा। यह सुकून सरकारी अनुदान से कहीं ज्यादा कीमती है।
10. विहीर पुनर्भरण + ड्रिप सिंचाई: जबरदस्त कॉम्बिनेशन
रिचार्ज से पानी बचाएं और ड्रिप (Drip) से उसे सही इस्तेमाल करें। सचिन भाई का फॉर्मूला: “अगर आप कुआं रिचार्ज करते हैं और साथ में ठिबक (Drip) का इस्तेमाल करते हैं, तो आपकी फसल की पैदावार 40% तक बढ़ सकती है। सरकार ड्रिप पर भी भारी सब्सिडी देती है, इन दोनों का साथ आपकी गरीबी दूर कर सकता है।”

11. पानी की गुणवत्ता (Water Quality) में सुधार
लगातार पानी खींचने से कुएं का पानी खारा होने लगता है। वैज्ञानिक कारण: बारिश का शुद्ध पानी जब कुएं में उतरता है, तो वह खारेपन (TDS) को कम कर देता है। इससे पानी ‘हल्का’ हो जाता है, जो फसलों की बढ़त के लिए और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति के लिए बेहतरीन होता है।
12. सामूहिक पुनर्भरण: पूरे गांव का फायदा
अगर आपके आस-पास के 5-10 किसान मिलकर रिचार्ज करते हैं, तो पूरे इलाके का जलस्तर ऊपर आता है। सचिन भाई का आह्वान: “अकेले काम करने से अच्छा है कि पड़ोसी किसानों को भी प्रेरित करें। अगर पूरा इलाका रिचार्ज होगा, तो उस क्षेत्र की एक भी बोरवेल कभी नहीं सूखेगी।”
13. जमीन की कीमत में भारी बढ़ोतरी
पानी वाली जमीन की कीमत सूखी जमीन से हमेशा तीन गुना ज्यादा होती है। मार्केट टिप: जिस खेत में 12 महीने पानी वाली विहीर होती है, उसे कोई भी ऊंचे दाम पर खरीदने को तैयार रहता है। रिचार्ज पर किया गया 20-30 हजार का खर्च आपकी जमीन की वैल्यू लाखों में बढ़ा देता है।
14. प्रकृति का कर्ज उतारने का मौका
हम जमीन से सालों से सिर्फ पानी निकाल रहे हैं, उसे वापस कुछ नहीं देते। सचिन भाई के विचार: “विहीर पुनर्भरण कुदरत को हमारा एक ‘रिटर्न गिफ्ट’ है। यह पुण्य का काम है क्योंकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए जमीन के अंदर पानी की बैंक जमा कर रहे हैं।”
15. बिजली बिल और मोटर की मरम्मत में बचत
जब कुएं में पानी का स्तर ऊपर होता है, तो मोटर को पानी खींचने में कम ताकत लगानी पड़ती है। टेक्निकल टिप: पानी कम होने पर मोटर बार-बार गर्म होकर जल जाती है। कुआं भरा रहेगा तो मोटर लोड नहीं लेगी, बिजली कम जलेगी और बार-बार होने वाला रिपेयरिंग का खर्चा भी बचेगा।

16. क्लाइमेट चेंज (Climate Change) का एकमात्र इलाज
2026 में बारिश का कोई भरोसा नहीं है—कभी 2 घंटे में बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो कभी महीनों सूखा रहता है। समाधान: ऐसी स्थिति में ‘फ्लैश रेन’ (तेज बारिश) के पानी को पकड़कर जमीन में उतारना ही समझदारी है। यही भविष्य की खेती का असली मंत्र है।
17. भविष्य की चेतावनी: ‘पानी नहीं तो परवाना नहीं’
आने वाले समय में सरकार नए बोरवेल खोदने पर कड़े प्रतिबंध लगा सकती है। सावधान: ऐसी संभावना है कि भविष्य में उन्हीं किसानों को नई बिजली कनेक्शन या सरकारी लाभ मिलेंगे जिन्होंने ‘वॉटर हार्वेस्टिंग’ या रिचार्ज किया होगा। इसलिए समय रहते यह काम पूरा कर लेना ही बेहतर है।
पानी बचाने के इस महा-अभियान को सफल बनाने के लिए यह लेख भी पढ़ें: ड्रिप इरिगेशन सब्सिडी 2026: 80% तक की छूट यहाँ देखें
18. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या पुरानी विहीर को रिचार्ज किया जा सकता है? जी हाँ, पुरानी और सूखी विहीर के लिए यह तकनीक सबसे ज्यादा असरदार है।
Q2. क्या इसके लिए अलग से परमिशन लेनी पड़ती है? अनुदान के लिए सरकारी अनुमति ज़रूरी है, लेकिन अगर आप अपने खर्च पर करना चाहते हैं तो कोई पाबंदी नहीं है।
“किसान भाइयों, विहीर पुनर्भरण (Well Recharge) सुनने में शायद कठिन लगे, लेकिन इसे करना बहुत आसान है। नीचे दिए गए वीडियो में आप Recharge Pit बनाने की पूरी विधि और सरकारी अनुदान पाने का लाइव डेमो देख सकते हैं। यह वीडियो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में बनाया गया है, इसे पूरा देखें ताकि आपसे खुदाई या फिल्टर लगाने में कोई गलती न हो
20. सचिन भाई की सलाह (Heart to Heart)
मेरे किसान भाइयों! हर साल नई बोरवेल खोदना समझदारी नहीं, मजबूरी है। लेकिन विहीर पुनर्भरण ‘अक्लमंदी’ है। यह खर्च नहीं, बल्कि आपके खेत में किया गया ‘निवेश’ है। पानी खत्म हुआ तो खेती खत्म, और रिचार्ज नहीं किया तो हम शिकायत करने का हक भी खो देंगे।
आज ही फैसला लें, अपनी विहीर को पुनर्जीवित करें और अपने बच्चों के लिए पानी बचाएं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
Mahayoddha.in एक निजी और जानकारी साझा करने वाली वेबसाइट है। यह लेख केवल किसानों को सामान्य मार्गदर्शन देने के लिए लिखा गया है।
सरकारी योजनाओं, अनुदान, और सब्सिडी की शर्तें, पात्रता, राशि और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। इसलिए, किसी भी योजना के लिए आवेदन करने से पहले हमेशा:
- संबंधित सरकारी वेबसाइट (जैसे कृषि विभाग, जलसंपदा विभाग या PMKSY पोर्टल) चेक करें।
- अपने नजदीकी तालुका/जिला कृषि कार्यालय (TAO/DAO) में जाकर जानकारी की पुष्टि करें।
- अगर बैंक या ऑनलाइन DBT (Direct Benefit Transfer) सिस्टम से सब्सिडी लेने जा रहे हैं, तो सभी दस्तावेज़ और नियमों को पूरी तरह समझ लें।
ऐसा करने से आप न केवल अपना पैसा सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आवेदन अस्वीकृत होने या नियम उल्लंघन की संभावना भी कम हो जाती है।
सारांश: इस वेबसाइट की जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य सलाह के लिए है, और किसी भी वित्तीय या कानूनी निर्णय के लिए आधिकारिक स्रोत की पुष्टि आवश्यक है।
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